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लोधूरा से कुरूगुय्या तक…इन 3 बुग्यालों को पर्यटन नक्शे में क्यों जुड़वाने की मांग?


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Bageshwar News : लोधूरा, कुरूगुय्या और डांग्गू बुग्याल को उत्तराखंड के पर्यटन नक्शे में शामिल करने की मांग तेज हो गई है. स्थानीय लोगों का कहना है कि ये बुग्याल प्राकृतिक सुंदरता, हिमालयी नजारों और ट्रेकिंग की अपार संभावनाओं से भरपूर हैं. प्रचार-प्रसार और मूलभूत सुविधाओं के अभाव में यहां अपेक्षित संख्या में पर्यटक नहीं पहुंच पाते हैं. लीती गांव के पूर्व ग्राम प्रधान आनंद प्रकाश लोकल 18 से बताते हैं कि अगर इन बुग्यालों को राज्य के पर्यटन मानचित्र में आधिकारिक रूप से शामिल किया जाता है, तो यहां तक पहुंचने वाले ट्रेक मार्गों का विकास होगा. युवाओं का पलायन कम करने में भी मदद मिल सकती है.

बागेश्वर. कपकोट विकासखंड के लीती क्षेत्र में स्थित लोधूरा बुग्याल, कुरूगुय्या बुग्याल और डांग्गू बुग्याल को उत्तराखंड के पर्यटन नक्शे में शामिल करने की मांग लगातार जोर पकड़ रही है. स्थानीय ग्रामीणों, सामाजिक संगठनों और पर्यटन से जुड़े लोगों का कहना है कि ये तीनों बुग्याल प्राकृतिक सौंदर्य, शांत वातावरण और हिमालय की मनोरम चोटियों के अद्भुत दृश्य के लिए प्रसिद्ध हैं. इसके बावजूद प्रचार-प्रसार और मूलभूत सुविधाओं के अभाव में यहां अपेक्षित संख्या में पर्यटक नहीं पहुंच पाते हैं. लीती के पूर्व ग्राम प्रधान आनंद प्रकाश ने लोकल 18 को बताया कि लीती क्षेत्र के ये बुग्याल समुद्र तल से ऊंचाई पर फैले विशाल घास के मैदान हैं, जहां गर्मियों के मौसम में रंग-बिरंगे जंगली फूल खिलते हैं. साफ मौसम में यहां से नंदा कोट, नंदा देवी पूर्व, पंचाचूली और हिमालयी पर्वत श्रृंखलाओं के आकर्षक दृश्य दिखाई देते हैं. ट्रेकिंग, कैंपिंग, प्रकृति फोटोग्राफी और एडवेंचर पर्यटन के लिए यह क्षेत्र काफी संभावनाएं रखता है.

क्या-क्या बदल जाएगा इससे

आनंद प्रकाश का कहना है कि यदि इन बुग्यालों को राज्य के पर्यटन मानचित्र में आधिकारिक रूप से शामिल किया जाता है, तो यहां तक पहुंचने वाले ट्रेक मार्गों का विकास होगा. रास्तों पर दिशा संकेतक, सुरक्षा व्यवस्था, विश्राम स्थल, पेयजल, शौचालय और ठहरने जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित की जा सकेंगी. इससे देश-विदेश के पर्यटकों को यहां आने में सुविधा मिलेगी और क्षेत्र की पहचान भी बढ़ेगी. बुग्यालों का विकास केवल पर्यटन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे स्थानीय लोगों की आजीविका भी मजबूत होगी. गांवों में होमस्टे, स्थानीय गाइड, घोड़ा-खच्चर सेवा, कैंपिंग संचालन, पारंपरिक भोजन और हस्तशिल्प व कृषि उत्पादों की बिक्री जैसे नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे. इससे युवाओं का पलायन कम करने में भी मदद मिल सकती है.

बड़ा सहारा मिलेगा

उत्तराखंड में औली, दयारा, बेदनी और अली बुग्याल जैसे कई घास के मैदान पहले से ही देश-विदेश के पर्यटकों के बीच लोकप्रिय हैं. यदि लीती क्षेत्र के इन तीनों बुग्यालों को भी इसी तरह विकसित किया जाए, तो बागेश्वर जिले को पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान मिल सकती है. ग्रामीणों ने सरकार और पर्यटन विभाग से मांग की है कि लोधूरा, कुरूगुय्या और डांग्गू बुग्याल का विस्तृत सर्वे कराया जाए और इन्हें राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों की सूची में शामिल किया जाए. उनका कहना है कि पर्यावरण के अनुकूल विकास होने से जहां प्राकृतिक विरासत सुरक्षित रहेगी. बागेश्वर जिले में पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा सहारा मिलेगा.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें



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