कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा गुरुवार को केरल के वायनाड दौरे पर थीं। इस दौरान उन्होंने KINFRA पार्क की एक बेकिंग यूनिट में केक बनाया और कपकेक बनाने की कोशिश की। प्रियंका ने सिर पर हेयर नेट पहनकर केक पर आइसिंग की। उन्होंने कपकेक के सांचे में केक का बैटर भरने की भी कोशिश की। इस दौरान वहां मौजूद शेफ और कर्मचारियों ने उन्हें बेकिंग के बारे में बताया। इस दौरान वे कल्लूूर, नूलपुझा के राजीव गांधी मेमोरियल मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल भी गईं। जहां उन्होंने छात्रों के साथ डांस किया। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने गुरुवार को बताया कि 12 साल की उम्र से उन्होंने घर पर पढ़ाई की थी। उनके साथ उनके भाई राहुल गांधी भी घर पर पढ़ते थे। उन्होंने यह बात केरल के वायनाड के सुल्तान बथेरी स्थित राजीव गांधी मेमोरियल मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल में कही। प्रियंका यहां 14 साल के एक छात्र के सवाल का जवाब दे रही थीं। छात्र ने उनसे बचपन और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली परिवार में बड़े होने का अनुभव पूछा था। प्रियंका ने कहा कि उनकी दादी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या उनके घर में हुई थी। प्रियंका ने बताया कि इसके बाद उन्होंने स्कूल जाना बंद कर दिया। वह स्कूल की पढ़ाई पूरी होने तक घर पर ही पढ़ती रहीं। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद बदली जिंदगी प्रियंका ने कहा, “आपने इंदिरा गांधी के बारे में सुना है? वह मेरी दादी थीं। हम एक ही घर में रहते थे।” उन्होंने कहा, “जब मैं 12 साल की थी, तब जिस घर में रहती थी, वहीं उनकी हत्या कर दी गई। इसके बाद मैं स्कूल नहीं गई।” प्रियंका ने बताया कि वह और राहुल गांधी अकेले घर पर पढ़ते थे। दोनों ज्यादा बाहर नहीं जा सकते थे और उनके ज्यादा दोस्त भी नहीं थे। उन्होंने कहा, “हम दोनों घर में काफी हद तक बंद होकर रह गए थे।” प्रियंका ने छात्र से कहा कि वह बाहर जा पाती है, घूम पाती है और अपनी जिंदगी का आनंद ले पाती है, यह उसके लिए अच्छी बात है। घर में काम करने वाली महिला को बताया रोल मॉडल एक अन्य छात्र ने प्रियंका से उनके रोल मॉडल के बारे में पूछा। कांग्रेस सांसद ने बताया कि उनकी रोल मॉडल वह महिला हैं, जो उनके बच्चों के तीन महीने की उम्र से उनके घर में काम कर रही हैं। प्रियंका ने कहा कि वह महिला मजबूत हैं। उन्होंने कई मुश्किलों के बावजूद उनके घर में दिन-रात काम किया है। उन्होंने कहा कि वह महिला उनके बच्चों की मां की तरह देखभाल करती हैं और उन्हें प्यार देती हैं। उन्होंने संघर्षों और दुखों के बीच हमेशा अपने लिए आवाज उठाई है। प्रियंका ने बताया कि जब उस महिला ने अपना एक बच्चा खोया, तब भी वह अगले दिन काम पर आ गईं। प्रियंका ने उन्हें आराम करने और घर पर रहने को कहा था। उन्होंने कहा, “उन्होंने मना कर दिया। उन्होंने कहा कि वह काम करना चाहती हैं।” कक्षा 7 के बाद पढ़ाई कमजोर हुई प्रियंका ने बताया कि कक्षा 7 तक वह अच्छी छात्रा थीं। इसके बाद उनका पढ़ाई में प्रदर्शन कमजोर हो गया था। बाद में इसमें सुधार हुआ। छात्रों के सवालों के जवाब में उन्होंने अपने पसंदीदा विषय भी बताए। उन्होंने कहा कि उन्हें भौतिकी, गणित और जीव विज्ञान पसंद था। प्रियंका ने कहा, “मैं जीव विज्ञान में अच्छी थी, लेकिन गणित में नहीं।” आदिवासी संस्कृति को बचाने की बात बातचीत के दौरान प्रियंका ने कहा कि कांग्रेस आदिवासी संस्कृति को बचाने और उसकी रक्षा करने के लिए कई काम करना चाहती है। उन्होंने आदिवासी संस्कृति को राष्ट्रीय धरोहर बताया। उन्होंने कहा कि पूर्वजों ने एक-दूसरे से सीखा। उन्होंने जंगलों, नदियों, पहाड़ों, समुद्रों और प्रकृति से भी सीख ली। प्रियंका ने कहा कि पूर्वजों ने प्रकृति के साथ रहना और उसका सम्मान करना सीखा था। उनके मुताबिक, खुद को बहुत समझदार मानने वाले लोग यह बात भूल गए हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी संस्कृति और परंपराओं में ऐसा ज्ञान है, जो पूरी दुनिया के लिए बेहद कीमती है। यह ज्ञान किताबों और बड़े संस्थानों से मिलने वाली कई चीजों से भी ज्यादा महत्वपूर्ण है। वायनाड में आदिवासी यूनिवर्सिटी का सपना प्रियंका ने कहा कि केरल में कांग्रेस नेतृत्व वाली UDF सरकार की पहलों में वायनाड में आदिवासी यूनिवर्सिटी की स्थापना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि इसका मकसद आदिवासी बच्चों को अवसर देना और उनकी संस्कृति व विरासत को बचाए रखना है। प्रियंका ने कहा, “हमारा सपना है कि इस यूनिवर्सिटी में दुनिया में उपलब्ध सबसे अच्छे अवसर मिलें। आप आधुनिक और बेहतरीन माहौल में पढ़ें।” उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी में पढ़ाई का एक बड़ा हिस्सा आदिवासी परंपराओं, संस्कृति और विरासत से जुड़ा होगा। प्रियंका ने छात्रों से कहा कि उनकी पुरानी विरासत, संस्कृति और अपनी परंपराएं हैं। उन्हें इन पर गर्व होना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह यूनिवर्सिटी उत्कृष्ट शिक्षा का केंद्र बनेगी। साथ ही, यह आदिवासी परंपराओं को बचाने का वैश्विक उदाहरण भी बनेगी। प्रियंका ने कहा कि यह एक अनोखी यूनिवर्सिटी होगी। इसमें आदिवासी समुदायों से भी शिक्षक आएंगे। उन्होंने कहा कि इससे छात्र अपनी परंपराओं, भाषाओं और संस्कृतियों को समझ सकेंगे। वे उनका सम्मान करना और उनसे सीखना भी जानेंगे। उन्होंने कहा कि छात्र इसके साथ उन सभी विषयों की पढ़ाई कर सकेंगे, जो दुनिया की प्रमुख यूनिवर्सिटीज में पढ़ाए जाते हैं। प्रियंका ने कहा, “यही हमारा सपना है। हम चाहते हैं कि यह शैक्षणिक उत्कृष्टता और पूरे भारत की आदिवासी संस्कृतियों को बचाने का केंद्र बने।” स्कूल के लिए फंड देने का भरोसा प्रियंका ने माना कि स्कूल को फंड की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वह स्कूल को फंड देने और सुविधाएं बेहतर करने के लिए हर संभव मदद करेंगी। उन्होंने मुस्कुराते हुए एक शर्त भी रखी। प्रियंका ने कहा, “जब मैं नई सुविधाओं का उद्घाटन करने वापस आऊं, तो आप मुझे ठीक से अपना नृत्य सिखाएंगे।”
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वायनाड की बेकरी में प्रियंका गांधी ने बनाया केक: कप केक भी बनाया; बच्चों के साथ डांस करने पहुंचीं
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