अमेरिका-कनाडा में व्यापार वार्ता बिना समझौता टूटने के बाद शनिवार से 20 अरब डॉलर के कनाडाई उत्पादों पर 50% अमेरिकी टैरिफ लागू हो गया है। इससे दोनों देशों में ट्रेड वॉर शुरू हो गया है और कनाडाई पीएम मार्क कार्नी ने अमेरिका को डॉलर के बदले डॉलर देने का एलान किया है।
कनाडा की जगह ले सकेंगे भारतीय उत्पाद
इस ट्रेड वॉर को अमेरिकी-कनाडाई मीडिया ने भारत के लिए मौका बताया है। भारत को इसका लाभ ट्रेड-डायवर्जन नीति के तहत मिल सकता है। वाशिंगटन पोस्ट ने लिखा है कि अमेरिका जब भी किसी एक देश पर भारी टैरिफ लगाता है, तो अमेरिकी आयातक अक्सर वैकल्पिक आपूर्तिकर्ता तलाशते हैं, जिससे भारत जैसे प्रतिस्पर्धी देशों को कुछ लाभ मिल सकता है।
बड़े भूचाल का सीधा व परोक्ष लाभ भारतीय उद्यमियों को
अमेरिकी बाजार में कनाडाई सामान की जगह भारतीय उत्पाद ले सकते हैं। इनमें ऑटो कंपोनेंट्स और आईटी सेक्टर प्रत्यक्ष लाभ में रहेंगे। विश्व व्यापार में आए इस बड़े भूचाल का सीधा व परोक्ष लाभ भारतीय अर्थव्यवस्था, निर्यातकों और आईटी सेक्टर को मिलने के पूरे आसार हैं। कनाडा के द ग्लोब एंड मेल ने कहा, जो सामान अमेरिका जाता था अब उसे सस्ते दामों पर भारत भेजने की अच्छी संभावनाएं हैं। कनाडा अब नए बाजार खोलेगा, जिसमें भारत प्रमुख होगा।
अमेरिका से टैरिफ के बावजूद लाभ
अमेरिकी टैरिफ-नीति से भारत भी अछूता नहीं है। 23 जुलाई को अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने सेक्शन 301 के तहत भारत पर अतिरिक्त 10% टैरिफ लगाया, जो प्रभावी है। हालांकि यह कई प्रतिस्पर्धी देशों से कम है। भारतीय निर्यात संगठन ने इसे भारत सरकार के कदमों को अमेरिकी मान्यता के रूप में देखा है।
जेनरिक दवाओं की मांग बढ़ेगी
अमेरिकी सरकार द्वारा कनाडा के ऑटो पार्ट्स, औद्योगिक सामग्री, सीमेंट और कंज्यूमर प्रोडक्ट्स पर 50% टैरिफ थोपे जाने से ये सामान अमेरिका में काफी महंगे हो जाएंगे। ऐसे में अमेरिकी कंपनियां विकल्प के रूप में भारत की ओर रुख करेंगी। जेनेरिक दवाओं और टेक्सटाइल में तुरंत 10 से 15% उछाल आ सकता है।



