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व्यापार समझौता: ‘न्यूजीलैंड भारत में 20 अरब डॉलर निवेश करेगा, विनिर्माण-रोजगार को मिलेगा बढ़ावा’, बोले गोयल


केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को बताया कि भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत न्यूजीलैंड भारत में 20 अरब डॉलर का निवेश करेगा। यह निवेश भारत के विनिर्माण, बुनियादी ढांचे और सेवाओं को मजबूत करेगा। इससे देश में नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। मंत्री की यह टिप्पणी 20 अक्तूबर को भारत-न्यूजीलैंड एफटीए के लागू होने से पहले आई है।

यह समझौता न्यूजीलैंड के बाजार में प्रवेश करने वाले सभी भारतीय निर्यातों को शुल्क-मुक्त पहुंच प्रदान करेगा। गोयल ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि न्यूजीलैंड की यह 20 अरब डॉलर की निवेश प्रतिबद्धता विनिर्माण, बुनियादी ढांचे, सेवाओं और नवाचार को मजबूत करने की अपार क्षमता रखती है। यह उद्यम और रोजगार को भी समर्थन देगी। यह निवेश प्रतिबद्धता समझौते का एक महत्वपूर्ण घटक है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार से आगे बढ़ाना है। गोयल ने यह भी कहा कि यह समझौता भारतीय किसानों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), उद्यमियों और विभिन्न क्षेत्रों के श्रमिकों को लाभ पहुंचाएगा।

भारतीय निर्यात को शुल्क-मुक्त पहुंच से क्या लाभ?

20 अक्तूबर से न्यूजीलैंड जाने वाले भारत के हर क्षेत्र के 100 फीसदी सामान पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। इस शुल्क-मुक्त पहुंच से भारतीय निर्यातों की प्रतिस्पर्धात्मकता में काफी सुधार होने की उम्मीद है। विशेष रूप से कपड़ा, परिधान, चमड़ा और जूते जैसे श्रम-गहन क्षेत्रों को इसका बड़ा फायदा मिलेगा। इसके अलावा, इंजीनियरिंग सामान, फार्मास्यूटिकल्स और कृषि उत्पादों के लिए भी न्यूजीलैंड के बाजार में नए अवसर खुलेंगे। यह भारतीय उत्पादों को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा।

किसानों के लिए समझौते में क्या है खास?

पीयूष गोयल ने एक विशेष कृषि साझेदारी के माध्यम से भारतीय किसानों के लिए कई लाभों पर भी जोर दिया। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य कृषि उत्पादकता और किसानों की आय में सुधार करना है। भारतीय किसानों को फल, सब्जियां, मसाले और अन्य कृषि उत्पादों के लिए न्यूजीलैंड में व्यापक बाजार पहुंच मिलेगी। उत्पादकता बढ़ाने और उच्च आय का समर्थन करने के लिए दोनों देशों के बीच सहयोग भी बढ़ेगा। इस कृषि साझेदारी के तहत सेब, कीवीफ्रूट और शहद जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जाएंगे। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि डेयरी सहित भारत के संवेदनशील कृषि क्षेत्रों को इस समझौते के तहत पूरी तरह संरक्षित रखा जाएगा।

समझौते का आर्थिक लक्ष्य और क्रियान्वयन क्या है?

भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता 27 अप्रैल को हस्ताक्षरित हुआ था और 21 सितंबर को इसकी पुष्टि की गई थी। वर्तमान में वस्तुओं और सेवाओं में द्विपक्षीय व्यापार 2.4 अरब डॉलर है। दोनों देशों ने 2030 तक 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर के व्यापार का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। वाणिज्य और उद्योग विभाग राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम करेंगे। वे किसानों, उद्यमियों और कारोबारियों को इस एफटीए से उत्पन्न होने वाले विभिन्न अवसरों के बारे में सूचित करेंगे, ताकि वे इसका अधिकतम लाभ उठा सकें।



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