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सबरीमाला गोल्ड केस-पूर्व TDB चीफ के खिलाफ सबूत मिले: केरल हाईकोर्ट ने SIT को नया केस दर्ज करने की मंजूरी दी


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कोच्चि2 मिनट पहले

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सबरीमाला मंदिर में लगी इसी सोने की प्लेट में सोना कम होने की शिकायत मिली थी।

केरल के सबरीमाला मंदिर के गोल्ड चोरी मामले में एसआईटी ने दावा किया है कि जांच में त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) के पूर्व अध्यक्ष पीएस प्रशांत के खिलाफ अहम सबूत मिले हैं।

एसआईटी ने कहा कि उसके पास कई अधिकारियों और बोर्ड सदस्यों की भूमिका से जुड़े पर्याप्त सबूत हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि इस मामले में आपराधिक धोखेबाजी, जालसाजी और साजिश जैसे गंभीर अपराध बनते हैं।

केरल हाईकोर्ट के जस्टिस राजा विजयराघवन वी और जस्टिस केवी जयकुमार की डिवीजन बेंच ने कहा कि एसआईटी इस मामले में नया केस दर्ज कर सकती है। SIT चाहे तो 2025 की गोल्ड प्लेटिंग को लेकर अलग से नया मामला दर्ज कर सकती है। या फिर अपनी जांच निष्कर्षों को 2019 में सोने के गायब होने से जुड़े पहले से चल रहे मामले में जोड़ सकती है।

हाईकोर्ट ने कहा कि कुछ अन्य अधिकारियों और पूर्व बोर्ड सदस्यों की भूमिका की जांच अभी जारी है। अगर उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत मिलते हैं, तो एसआईटी उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई कर सकती है। मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को होगी।

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पहले पूरा मामला जानिए

सबरीमाला मंदिर से जुड़े इस मामले में आरोप है कि मंदिर के गर्भगृह और द्वारपालक मूर्तियों पर लगी सोने की परत वाले तांबे के प्लेट्स से सोना निकाला गया और उसे हड़प लिया गया।

इस मामले की जांच के लिए बनी केरल सरकार की SIT ने पाया कि देवस्वोम बोर्ड के अधिकारियों ने बिना सही अनुमति ये प्लेट्स बाहर दीं और इसमें कारोबारी व अन्य लोगों की मिलीभगत थी।

प्रशांत ने अपने ऊपर लगे आरोप खारिज किए

पूर्व टीडीबी अध्यक्ष पीएस प्रशांत ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि 2025 की गोल्ड प्लेटिंग में उनके खिलाफ कोई सीधा आरोप नहीं है, सिर्फ अदालत की अनुमति नहीं लेने की बात कही गई है।

पी.एस. प्रशांत का कहना है कि प्रतिमाओं को दोबारा गोल्ड प्लेटिंग के लिए भेजने में सभी नियमों का पालन किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि उनके बोर्ड को 2019 में कथित सोने की हेराफेरी की कोई जानकारी नहीं थी।

कारीगरों ने सोने की परत चढ़ाकर उसे शेप दिया।

कारीगरों ने सोने की परत चढ़ाकर उसे शेप दिया।

SIT की जांच में खुलासा- बचा हुआ सोना अभी भी उन्नीकृष्णन पोट्टी के पास

  • दो विशेषज्ञ संस्थानों की रिपोर्ट अभी आना बाकी है। वहीं, श्रीकोविल से कथित तौर पर सोना गायब होने के मामले की जांच लगभग पूरी हो चुकी है और जल्द ही अंतिम रिपोर्ट पेश की जाएगी।
  • चेन्नई में प्रतिमाओं की पुरानी सोने की परत हटाई गई थी। नई परत चढ़ाने के लिए बहुत कम सोने की जरूरत थी, लेकिन बचा हुआ सोना कथित तौर पर गायब कर दिया गया।
  • काम ठीक नहीं होने के बावजूद प्रतिमाओं के लिए 40 साल की वारंटी का प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया। जबकि कुछ ही महीनों में सोने की परत खराब हो गई और नीचे की तांबे की सतह दिखने लगी।
  • 2019 में हुई कथित सोने की हेराफेरी को छिपाने के लिए 2025 में प्रतिमाओं को दोबारा चेन्नई भेजने की योजना बनाई गई।
  • नवंबर 2023 में पीएस प्रशांत के टीडीबी अध्यक्ष बनने के बाद मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी ने उनका भरोसा जीता और फिर दोबारा गोल्ड प्लेटिंग का प्रस्ताव आगे बढ़ाया।
  • बोर्ड के कुछ सदस्यों को यह पता था कि 2019 में बचा हुआ सोना अभी भी उन्नीकृष्णन पोट्टी के पास है। इसके बावजूद कार्रवाई करने के बजाय उन्होंने कथित तौर पर मामले को दबाने में मदद की।
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अब तक 11 आरोपियों की गिरफ्तारी

इस केस में मुख्य आरोपी मंदिर के पूर्व पुजारी नंबूदरी उन्नीकृष्णन पोट्टी, सोना व्यापारी डी मणि और त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष ए पद्मकुमार भी गिरफ्तार हो चुके हैं। इसके साथ ही 9 अन्य लोगों की गिरफ्तारी हुई है।

मामले के 3 मुख्य किरदार

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मंदिर से 500 करोड़ का सोना चोरी होने का दावा

SIT का कहना है कि इसमें देवस्वोम अधिकारियों की गंभीर लापरवाही और अनधिकृत तरीके से प्लेट्स सौंपने के मामले सामने आए हैं। SIT ने हाईकोर्ट को बताया है कि यह एक संगठित साजिश थी, जिसमें मंदिर की अन्य सोने से मढ़ी वस्तुओं को भी हटाकर सोना निकालने की योजना थी।

ED अब यह जांच करेगी कि क्या इस प्रक्रिया से ‘अपराध की आय’ बनी है और जरूरत पड़ने पर आरोपियों की संपत्तियां भी अटैच की जा सकती हैं।

इससे पहले गोल्ड स्कैम मामले में SIT को अहम जानकारी देने वाले कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला ने दावा करते हुए कहा था- ‘मंदिर के सोने की चोरी में TDB बोर्ड के पुराने अधिकारियों की मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता। मेरा अनुमान है कि गायब संपत्तियों की कीमत लगभग 500 करोड़ हो सकती है।

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