Homeव्यवसायसरकार का कड़ा रुख: 'भारत न जीएम उत्पाद आने देगा और न...

सरकार का कड़ा रुख: ‘भारत न जीएम उत्पाद आने देगा और न डेयरी क्षेत्र खोलेगा’, बोले पीयूष गोयल


अंतरराष्ट्रीय मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) को लेकर भारत सरकार ने अपनी नीति और प्राथमिकताओं पर स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया है कि भारत ने कभी भी किसी व्यापार समझौते में अपने डेयरी क्षेत्र को विदेशी कंपनियों के लिए नहीं खोला है और न ही भविष्य में आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) उत्पादों के आयात की अनुमति देगा। दिल्ली स्थित किरोड़ी मल कॉलेज में छात्रों को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि डेयरी और कृषि उत्पाद देश के लिए बेहद संवेदनशील विषय हैं, और सरकार व्यापार समझौतों में देश के किसानों, मछुआरों तथा एमएसएमई के हितों से कोई समझौता नहीं करेगी।

एफटीए में डेयरी सेक्टर और जीएम उत्पादों को शामिल न करने की क्या वजहें हैं?

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, डेयरी और कृषि देश के करोड़ों छोटे व सीमांत किसानों की आजीविका का मुख्य आधार हैं। विकसित देशों में अत्यधिक मशीनीकृत और सब्सिडी वाली खेती प्रणाली से आने वाले सस्ते जीएम फसलों व उत्पादों के बड़े पैमाने पर आयात से घरेलू बाजार में कीमतें गिर सकती हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंच सकता है। इसके अलावा, जीएम उत्पाद और डेयरी आयात खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण जोखिम, धार्मिक संवेदनाओं और घरेलू किसानों के संरक्षण से सीधे जुड़े हुए हैं। अमेरिका जैसे विकसित देश जीएम कृषि और डेयरी उत्पादों के निर्यात में गहरी रुचि रखते हैं, लेकिन भारत के नियम पूरी तरह स्पष्ट हैं। 

धार्मिक और सांस्कृतिक संवेदनाओं पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने बताया कि विदेशी देशों में अक्सर डेयरी उत्पाद या पनीर बनाने के लिए बछड़े के पेट से मिलने वाले ‘रेनेट’ एंजाइम अथवा जानवरों से बने चारे का इस्तेमाल किया जाता है। भारत में ऐसे उत्पादों के प्रवेश पर सख्त प्रतिबंध है और इसके लिए कड़े प्रमाणन की आवश्यकता होती है ताकि देश के एक बड़े वर्ग की धार्मिक भावनाएं आहत न हों।

एफटीए में भारत के अपने व्यापारिक हित और लक्ष्य क्या हैं?

व्यापार वार्ताओं में भारत की रणनीति को समझाते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि देश हमेशा उन क्षेत्रों में तरजीही बाजार पहुंच हासिल करने का प्रयास करता है जहां भारतीय उद्योग अत्यधिक प्रतिस्पर्धी हैं। 


  • प्रमुख फोकस क्षेत्र: भारत कपड़ा, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि उत्पाद और रत्न एवं आभूषण जैसे क्षेत्रों के लिए विदेशी बाजारों में शुल्क में रियायत मांगता है।

  • प्रतिस्पर्धियों पर बढ़त: इसका उद्देश्य वियतनाम, चीन, इंडोनेशिया, मलेशिया और फिलीपींस जैसे प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में भारतीय सामानों पर कम आयात शुल्क सुनिश्चित करना है।

  • घरेलू विनिर्माण और रोजगार: सरकार देश में विनिर्माण, सरकारी नौकरियों और नियमित रोजगार के साथ-साथ युवाओं के लिए स्टार्टअप्स और उद्यमिता के नए अवसर पैदा करने पर जोर दे रही है।

भारत का निर्यात लक्ष्य क्या है और मौजूदा स्थिति कैसी है?

देश के वैश्विक व्यापार आंकड़ों की जानकारी देते हुए मंत्री ने बताया कि भारत वर्ष 2026-27 तक वस्तुओं और सेवाओं का कुल निर्यात 1 ट्रिलियन (1,000 अरब) डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य पर तेजी से काम कर रहा है।


  • छमाही प्रदर्शन (अप्रैल-सितंबर 2026): वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही के दौरान भारत का कुल निर्यात लगभग 480 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो सालाना आधार पर करीब 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

  • आगामी लक्ष्य: 1 ट्रिलियन डॉलर का वार्षिक लक्ष्य हासिल करने के लिए वित्त वर्ष की शेष छमाही (अक्टूबर से मार्च) में 520 अरब डॉलर के निर्यात की आवश्यकता है।

  • अक्तूबर के संकेत: मंत्री ने संकेत दिया कि अक्टूबर महीने में भी निर्यात के आंकड़े काफी उत्साहजनक रहे हैं, जिन्हें आधिकारिक तौर पर नवंबर के मध्य में जारी किया जाएगा।

टनल बोरिंग मशीन और विमान निर्माण जैसे मुद्दों पर भारत का क्या रुख?

चीन द्वारा टनल बोरिंग मशीनों पर निर्यात नियंत्रण लगाए जाने से जुड़े सवाल पर पीयूष गोयल ने भारत की आत्मनिर्भरता का रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि यदि टनल बोरिंग मशीनों की आपूर्ति प्रभावित होती है, तो भारत इनका निर्माण खुद देश के भीतर करेगा। उन्होंने याद दिलाया कि जब दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (रेयर अर्थ) की आपूर्ति रोकी गई थी, तब भी भारत किसी के सामने मदद मांगने नहीं गया था। 



इसके साथ ही देश में विमानों की उपलब्धता बढ़ाने और नागरिक उड्डयन व पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सरकार एमब्रायर, एयरबस और बोइंग जैसी प्रमुख विमान निर्माता कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रही है।

पीयूष गोयल का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर कई विकसित देश भारत पर अपना कृषि व डेयरी बाजार खोलने का दबाव बना रहे हैं। केंद्रीय मंत्री के इस स्पष्ट संदेश से साफ है कि भारत वैश्विक व्यापार विस्तार के साथ-साथ अपनी खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और धार्मिक संवेदनाओं से कोई समझौता नहीं करेगा। ट्रिलियन डॉलर के निर्यात लक्ष्य की ओर बढ़ते भारत के लिए घरेलू उद्योगों का संरक्षण और वैश्विक स्पर्धा में बढ़त हासिल करना ही मुख्य नीतिगत स्तंभ बना हुआ है।



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments