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सरकार का बड़ा फैसला: पेट्रोल-डीजल निर्यात पर विंडफॉल टैक्स बढ़ा, एटीएफ पर राहत दी गई


सरकार ने मंगलवार (1 सितंबर) को पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में वृद्धि की है। अगले पखवाड़े के लिए विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) पर इस कर को मामूली रूप से घटाया गया है। वित्त मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी कर इन परिवर्तनों की जानकारी दी। ये सभी नई दरें 1 सितंबर से प्रभावी हो गई हैं।

डीजल के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी) के साथ सड़क और बुनियादी ढांचा उपकर अब 25 रुपये प्रति लीटर हो गया है। यह पहले 24 रुपये प्रति लीटर था, जिसमें एक रुपये की वृद्धि हुई है। वहीं, एटीएफ के निर्यात पर एसएईडी 19 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है, जो पहले 19.5 रुपये प्रति लीटर था। पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क को शून्य से बढ़ाकर 1.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि घरेलू खपत के लिए पेट्रोल और डीजल की मौजूदा शुल्क दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

विंडफॉल कर क्यों बढ़ाया गया?

सरकार ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच 27 मार्च को डीजल और एटीएफ के निर्यात पर यह शुल्क लगाया था। इस कर का मुख्य उद्देश्य देश में ईंधन की घरेलू उपलब्धता बढ़ाना था। यह निर्यातकों को वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण होने वाले मूल्य अंतर का अनुचित लाभ उठाने से रोकने के लिए भी था। युद्ध शुरू होने के बाद से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें काफी बढ़ गई थीं। इस विंडफॉल कर का लक्ष्य पश्चिम एशिया संकट के बीच निर्यात को हतोत्साहित करके पेट्रोलियम उत्पादों की घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करना था।

शुल्क दरों में क्या बदलाव आया है?

डीजल निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी) और सड़क व बुनियादी ढांचा उपकर अब 25 रुपये प्रति लीटर हो गया है। यह पहले 24 रुपये प्रति लीटर था, जिसमें एक रुपये की वृद्धि दर्ज की गई है। विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) पर एसएईडी को 19.5 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 19 रुपये प्रति लीटर किया गया है। पेट्रोल निर्यात पर शुल्क को शून्य से बढ़ाकर 1.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। ये सभी नई दरें 1 सितंबर से प्रभावी हो गई हैं।

यह कर कब से लागू है?

सरकार ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण 27 मार्च को डीजल और एटीएफ के निर्यात पर यह शुल्क लगाया था। इस शुल्क दर को हर पखवाड़े संशोधित किया जाता रहा है। पेट्रोल निर्यात पर यह शुल्क 16 मई से लागू किया गया था। इसका उद्देश्य वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का लाभ घरेलू बाजार में भी पहुंचाना था। यह सुनिश्चित करना था कि घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त आपूर्ति बनी रहे।



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