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सर्राफा बाजार: सोने की चमक फीकी, लगातार चौथे दिन गिरा भाव; जानें चांदी की कीमतों पर क्या अपडेट


राष्ट्रीय राजधानी में सोने के दाम लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरे हैं। सोमवार को 10 ग्राम सोने का भाव 1,500 रुपये घटकर 1,60,900 रुपये हो गया। वैश्विक बाजार के नकारात्मक संकेतों और निवेशकों की मुनाफावसूली से यह गिरावट आई है। शुक्रवार को 99.9 फीसदी शुद्धता वाला सोना 1,62,400 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था।

व्यापारियों ने बताया कि हाल के हफ्तों में सोने की मजबूत बढ़त के बाद लगातार मुनाफावसूली हो रही है। धातु अपनी पिछली तेजी को बरकरार रखने में विफल रही, जिससे व्यापारियों ने अपनी स्थिति कम की। हालांकि, स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, चांदी का भाव 2,45,500 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) पर स्थिर रहा। लेमन मार्केट्स डेस्क के शोध प्रमुख गौरव गर्ग ने कहा कि फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वॉर्श के जैक्सन होल संगोष्ठी में आक्रामक भाषण के बाद सोने की कीमतें दबाव में रहीं। इस भाषण से सितंबर की बैठक में ब्याज दर में बढ़ोतरी की उम्मीदें बढ़ गईं। 

उच्च अमेरिकी ट्रेजरी आय और मजबूत डॉलर ने भी कीमती धातुओं पर दबाव डाला, जिससे उनकी हालिया गिरावट और बढ़ गई। वैश्विक स्तर पर, हाजिर सोना मामूली गिरावट के साथ 4,448.56 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। हालांकि, चांदी लगभग एक फीसदी बढ़कर 66.97 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

क्या ब्याज दरें बढ़ने की आशंका है?

बुलियन बाजार ने अमेरिका-ईरान सैन्य हमलों के बाद बढ़ती तेल कीमतों से भी संकेत लिए। ऊर्जा दरों में वृद्धि से मुद्रास्फीति की चिंताएं बढ़ी हैं। इससे सख्त मौद्रिक नीति की संभावना मजबूत हुई है। मीरा एसेट शेयरखान के कमोडिटीज प्रमुख प्रवीण सिंह ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच हमलों के बाद हाजिर सोना 4,440 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है। इन ताजा हमलों ने तेल की कीमतों को बढ़ा दिया है। इससे ब्याज दर में बढ़ोतरी की संभावना और बढ़ गई है।

सोने के भाव क्यों गिरे?

वॉर्श ने शुक्रवार को वैश्विक स्तर पर ऊंची मुद्रास्फीति का हवाला दिया था। उन्होंने कहा था कि अंतर्निहित उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) और व्यक्तिगत उपभोग व्यय (पीसीई) के रुझान उत्साहजनक नहीं थे। उनके इन बयानों के बाद धातु को वैश्विक स्तर पर झटका लगा। यह 4,455 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस के करीब बंद हुई थी। वॉर्श ने यह भी कहा कि अल्पकालिक ब्याज दरें मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में प्रभावी हो सकती हैं।

फेडरल रिजर्व का क्या रुख है?

फेडरल रिजर्व के अधिकारियों को जल्द कार्रवाई करनी होगी, यदि मुद्रास्फीति जल्द कम नहीं होती है। वॉर्श की इन आक्रामक टिप्पणियों ने ब्याज दर में बढ़ोतरी की उम्मीदों को बढ़ाया। इससे कीमती धातुओं में और मुनाफावसूली शुरू हो गई। वैश्विक संकेतों और घरेलू बाजार की मुनाफावसूली ने सोने की कीमतों पर दबाव बनाए रखा है।



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