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सस्ता ऑटो बीमा कहीं महंगा न पड़ जाए: आज प्रीमियम बचाएंगे, कल क्लेम में ज्यादा गंवाएंगे; इन बातों का रखें ध्यान


भारतीय उपभोक्ता सौदेबाजी का उस्ताद माना जाता है। कपड़े, जूते या मोबाइल खरीदते वक्त मोलभाव करके पैसे बचाना समझदारी हो सकती है, लेकिन बीमा बाजार में यह चतुराई सबसे बड़ी मूर्खता साबित होती है। बीमा कोई सामान्य उत्पाद नहीं है, इसका प्रीमियम कंपनी द्वारा लिए जाने वाले जोखिम की सटीक कीमत होता है। अगर प्रीमियम घट रहा है, तो इसका सीधा मतलब है कि आपका सुरक्षा कवच भी सिकुड़ रहा है।

फ्री कुछ नहीं होता

फाइनेंशियल मार्केट का एक ही नियम है, देयर इज नो फ्री लंच। डिस्काउंट पूरी तरह कानूनी हो सकता है, लेकिन वह कभी मुफ्त नहीं होता। कभी प्रीमियम घटाने के लिए बाढ़ से होने वाले नुकसान  का कवर हटा दिया जाता है, तो कभी गाड़ियों में ऑथराइज्ड नेटवर्क गैराज की शर्त जोड़ दी जाती है।

पॉलिसी खरीदते या रिन्यू कराते वक्त जब भी कोई एजेंट आपको कम प्रीमियम का ऑफर दे, तो पहली फुर्सत में उससे यह सवाल पूछिए:

क्या पॉलिसी से कोई जरूरी ऐड-ऑन हटाया गया है?

क्या इसमें डिडक्टिबल या को-पे की नई शर्त जोड़ी गई है?

क्या अधिकृत गैराजों के कैशलेस नेटवर्क को सीमित कर दिया गया है?

क्लेम का गणित: छोटा फायदा, बड़ा नुकसान

सिर्फ प्रीमियम ही नहीं, क्लेम करते वक्त भी समझदारी जरूरी है। मान लीजिए गाड़ी की विंडशील्ड टूट गई और खर्च 8,000 रुपये आया। इंश्योरेंस कंपनी यह क्लेम पास कर देगी, लेकिन इसके बदले आपका 50 फीसदी तक पहुंचा नो-क्लेम बोनस एक झटके में शून्य या काफी नीचे आ जाएगा। अगले साल रिन्यूअल पर आपको इस क्लेम से कहीं ज्यादा प्रीमियम भरना पड़ेगा।

ध्यान दें ग्राहक

बीमा बचत का जरिया नहीं, अनहोनी से बचाव का वित्तीय सुरक्षा कवच है। जब आप प्रीमियम में चंद रुपये बचाने के लिए मोलभाव करते हैं, तो वास्तव में आप अपना ही हाथ काट रहे होते हैं। सबसे सस्ती पॉलिसी कभी सबसे सुरक्षित पॉलिसी नहीं होती। छूट असली हो सकती है, लेकिन उस छूट की असली कीमत क्लेम के वक्त ब्याज समेत चुकानी पड़ती है।

तारीख पता है?


आईपीओ मेनबोर्ड लिस्टिंग

15 सितंबर: प्रणव कंस्ट्रक्शन (351 करोड़ रुपये)

16 सितंबर: ग्लासवॉल सिस्टम (428 करोड़ रुपये), कनोहर इलेक्ट्रिकल (1056 करोड़), प्रासोल केमिकल्स (500 करोड़ रुपये)

17 सितंबर: एसेट रिकंस्ट्रक्शन (733 करोड़ रुपये), स्टीमहाउस इंडिया (414 करोड़ रुपये), मनीपाल पेमेंट (805 करोड़ रुपये), एलसीसी प्रोजेक्ट्स (427 करोड़ रुपये), करमतारा इंजीनियरिंग (875 करोड़ रुपये), रेंटोमोजो लि. (1256 करोड़ रुपये)

18 सितंबर: वीग्लांड डेवलपर (210 करोड़ रुपये)

डिस्क्लेमर: इस लेख में छपे विचार, राय और निवेश संबंधी सुझाव अलग-अलग विशेषज्ञों, ब्रोकर फर्मों या रिसर्च संस्थानों के हैं। इनसे अखबार या उसके प्रबंधन की सहमति जरूरी नहीं है। कृपया किसी भी तरह का निवेश फैसला लेने से पहले अपने पंजीकृत वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें। इस जानकारी के आधार पर होने वाले किसी भी नुकसान की जिम्मेदारी अखबार या उसके प्रबंधन की नहीं होगी।



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