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सिप तोड़ना नहीं, मौका छोड़ना नहीं: वैश्विक अनिश्चितता और युद्ध से घटा निवेश, अपनाएं क्या रणनीति?


एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) के मई के आंकड़ों ने कई निवेशकों के दिल की धड़कन बढ़ा दी है। वैश्विक अनिश्चितता और युद्ध के बीच मई में इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश मासिक आधार पर 40 फीसदी घटा है। मई में सिर्फ 22,878 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश हुआ। अप्रैल में यह आंकड़ा 38,148 करोड़ और मार्च में 40,450 करोड़ रुपये था।

इस गिरावट से डरकर अगर आप भी अपना निवेश घटाने की सोच रहे हैं, तो ठहरिए….

राहत की खबर है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम और होर्मुज जलमार्ग खोलने पर सहमति बनने के बाद से बाजार में लगातार निचले स्तरों से वापसी शुरू हुई है। पिछले चार कारोबारी सत्रों में निफ्टी-50 में करीब 4 फीसदी की तेजी आ चुकी है।  

तो क्या अब जोश में आकर एकमुश्त पैसा बाजार में झोंक देना चाहिए?

बाजार जब मंदी या दबाव के दौर से निकलकर वापस ऊपर की ओर कदम बढ़ा रहा हो, तो अपने पोर्टफोलियो के आईने को साफ करने का यह सबसे मुफीद समय है।

अंडरपरफॉर्मर फंड्स की छंटनी करें: अगर आपका कोई इक्विटी फंड अपनी ही श्रेणी के दूसरे प्रतिस्पर्धी फंड्स और अपने बेंचमार्क सूचकांक के मुकाबले लगातार खराब प्रदर्शन कर रहा है, तो इस रिकवरी के दौर में उससे बाहर निकलिए। रिकवरी में जब उस फंड की एनएवी थोड़ी सुधरे, तो पैसा निकालकर किसी मजबूत फंड में लगा दें।

स्मॉल और मिडकैप से करें आंशिक मुनाफावसूली: अगर आपके कुल पोर्टफोलियो में छोटी कंपनियों का हिस्सा आपकी तय सीमा से बहुत ज्यादा बढ़ चुका है, तो वहां से आंशिक मुनाफा निकालकर उसे लार्जकैप या डेट फंड्स में लगाएं।

रिकवरी के दौर में अब क्या होनी चाहिए निवेश रणनीति?

जब बाजार में रिकवरी शुरू होती है, तो आम निवेशक अक्सर पीछे छूट जाने के डर (FOMO) का शिकार हो जाता है। वह सोचता है कि अगर अभी सारा पैसा नहीं लगाया, तो ट्रेन छूट जाएगी। जोश में आकर होश खोने की यह गलती आपके पूरे वित्तीय भविष्य को नुकसान पहुंचा सकती है।


  • सिप को बनाएं सुरक्षा कवच: बाजार चाहे गिरे या रिकवरी दिखाकर नए शिखर पर जाए, आपकी हर महीने जाने वाली एसआईपी की किस्तें भूलकर भी रुकनी नहीं चाहिए। जब बाजार गिरता है, तो आपको उसी पैसे में ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं, और जब बाजार रिकवरी दिखाता है, तो वही पुरानी सस्ती यूनिट्स आपके पोर्टफोलियो के रिटर्न को आसमान पर ले जाती हैं।


     


  • एकमुश्त बड़ा पैसा झोंकने से बचें: चूंकि बाजार अभी-अभी युद्ध के दबाव से बाहर निकला है, इसलिए वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने महंगाई और ब्याज दरों की चुनौतियां पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। रिकवरी के शुरुआती दिनों में एकमुश्त बड़ी पूंजी बाजार में न लगाएं।


     


  • एसटीपी का अचूक नुस्खा: अगर आपके पास निवेश करने के लिए बड़ी रकम है, तो सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) का रास्ता चुनें। अपनी पूरी पूंजी को पहले किसी सुरक्षित लिक्विड या मनी मार्केट डेट फंड में रख दें, और वहां से एक निश्चित राशि हर हफ्ते या हर महीने अपनी पसंद के इक्विटी फंड में ट्रांसफर होने दें।

अब सवाल है, मौजूदा अनिश्चित लेकिन रिकवरी वाले बाजार को देखते हुए एसेट अलोकेशन कैसा होना चाहिए?


  • 60% इक्विटी: इस हिस्से में से भी बड़ा भाग (60 से 70%) लार्जकैप या फ्लेक्सीकैप फंड्स में होना चाहिए।

  • 30% डेट: यह हिस्सा शॉर्ट-ड्यूरेशन फंड या बैंकिंग एंड पीएसयू डेट फंड में होना चाहिए। यह पैसा आपको बैंक एफडी से बेहतर तरलता और रिटर्न की संभावना देता है।

  • 10% सोना: पोर्टफोलियो में इसे रखने से मजबूत सुरक्षा ढाल मिलेगी।

 






























आयु वर्ग जोखिम क्षमता एसेट अलोकेशन अनुपात (इक्विटी : डेट : सोना) सुझाई गई फंड श्रेणियां
   25 से 35 वर्ष उच्च जोखिम 80 : 15 : 05 स्मॉलकैप, मिडकैप, फ्लेक्सीकैप और सेक्टोरल फंड्स का मिश्रण
   35 से 50 वर्ष मध्यम जोखिम 60 : 30 : 10 लार्जकैप, फ्लेक्सीकैप, लार्ज एंड मिडकैप और शॉर्ट-टर्म डेट फंड्स
   50 वर्ष से           अधिक कम जोखिम 30 : 60 : 10 बैलेंस्ड एडवांटेज फंड, मल्टी एसेट अलोकेशन फंड, लिक्विड/डेट फंड्स

पीछे मत हटिए, अनुशासित रहिए  

मई महीने में म्यूचुअल फंड निवेश का गिरना सिर्फ इस बात का प्रतीक था कि खुदरा निवेशक युद्ध की आहट और कच्चे तेल के बढ़ते तेवरों को देखकर थोड़े सहमे हुए और सतर्क थे। अब जब बाजार ने निचले स्तरों से रिकवरी दिखाना शुरू कर दिया है, तो पैर पीछे खींचने का नहीं, बल्कि अनुशासन दिखाने का समय है। अपनी वित्तीय स्थिति, उम्र और जोखिम क्षमता के अनुसार अपने पोर्टफोलियो को व्यवस्थित करें और निरंतर निवेश करते रहें।

– विजय मंत्री


संस्थापक, विजय मंत्री फाइनेंशियल सर्विसेस प्रा. लि.

2026 में इक्विटी फंड्स में निवेश

 






























महीना     निवेश (रुपये में)
जनवरी           24,028 करोड़
फरवरी     25,978 करोड़
मार्च     40,450 करोड़
अप्रैल     38,440 करोड़
मई     22,908 करोड़

स्रोत: एम्फी



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