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सुप्रीम कोर्ट-लोगों की सुरक्षा पर अधिकारियों को चेतावनी दी: कहा- काम नहीं हुआ तो दिल्ली हाईकोर्ट के गेट पर धरना देंगे; मामला सड़क सुरक्षा से जुड़ा




सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के पास सड़क पार करने वाले लोगों की सुरक्षा के मामले में अधिकारियों को चेतावनी दी। कोर्ट ने कहा कि अगर काम पूरा नहीं हुआ, तो दोनों जज दिल्ली हाईकोर्ट के गेट पर धरने पर बैठ जाएंगे और काम पूरा होने तक घर नहीं जाएंगे। कोर्ट ने यह भी कहा कि अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) बनर्जी को भी घर नहीं जाने दिया जाएगा। यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट के पास सड़क पार करने वाले लोगों की सुरक्षा से जुड़ा है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने 15 सितंबर को केंद्र सरकार से कहा था कि वह दिल्ली हाईकोर्ट और नेशनल जूलॉजिकल पार्क के पास सड़क पार करने वाली जगह पर स्पीड ब्रेकर और रंबल स्ट्रिप्स लगाने पर फैसला ले। याचिका डॉक्टर एस राजसीकरन ने 2013 में दायर की थी पिछले साल जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने दिल्ली हाईकोर्ट के पास पैदल सड़क पार करने की सही व्यवस्था नहीं होने पर चिंता जताई थी। सड़क सुरक्षा सुधारने के लिए यह याचिका हड्डियों के विशेषज्ञ डॉक्टर एस. राजसीकरन ने 2013 में दायर की थी। कोर्ट ने कहा था कि इस व्यस्त सड़क पर ट्रैफिक सिग्नल, फुट ओवरब्रिज और सुरक्षा के दूसरे इंतजाम नहीं होने से सड़क पार करने वाले लोगों की जान को खतरा रहता है। गौरव बोले- रेड लाइट लगाना काफी नहीं है सुनवाई के दौरान कोर्ट की मदद के लिए नियुक्त एमिकस क्यूरी गौरव अग्रवाल ने बताया कि केंद्र सरकार ने उस जगह रेड लाइट सिग्नल लगवा दिया है। केवल रेड लाइट लगाना काफी नहीं है। वहां स्पीड ब्रेकर और रंबल स्ट्रिप्स लगाने की जरूरत है। उन्होंने सुझाव दिया कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय गाड़ियों और पैदल चलने वालों की आवाजाही का अध्ययन करे। सॉलिसिटर जनरल बोले- रेड लाइट लगाना पर्याप्त है अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रम बनर्जी ने कहा कि रेड लाइट लगाना पर्याप्त है, लेकिन अगर कोर्ट को लगता है कि और इंतजाम की जरूरत है, तो केंद्र सरकार इसके लिए तैयार है। इस पर जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि यह लोगों की जान का सवाल है। हम दोनों वहां जाएंगे। आप भी हमारे साथ चलिए। सभी लोग वहां जाएंगे। यह जनहित का मामला है। सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में सर्वे का निर्देश दिया था अक्टूबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में सर्वे कराने का निर्देश दिया था, ताकि उन जगहों की पहचान की जा सके, जहां पैदल सड़क पार करने के लिए बेहतर इंतजाम की जरूरत है। दिल्ली हाईकोर्ट के पास की सड़क भी इनमें शामिल थी। कोर्ट ने कहा था कि मथुरा रोड पर दिल्ली हाईकोर्ट और राष्ट्रीय प्राणी उद्यान के पास हर दिन हजारों कर्मचारी, वकील, मुकदमों से जुड़े लोग, बच्चे और परिवार सड़क पार करते हैं। वहां न रेड लाइट है, न फुट ओवरब्रिज और न ही गाड़ियों की रफ्तार कम करने के इंतजाम। इससे लोगों की जान को खतरा रहता है।



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