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सोना सस्ता होगा या महंगा: WGC की रिपोर्ट में दूसरी छमाही के लिए क्या अनुमान? भारत की मांग पर भी नजर


साल 2026 की दूसरी छमाही में सोने की कीमतें सीमित दायरे में रहने की उम्मीद है, लेकिन आर्थिक या फिर भू-राजनीतिक तनाव के एक बार फिर से बढ़ने से इसमें तेजी आने की संभावना है, वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने अपनी मिड ईयर गोल्ड आउटलुक 2026 में यह बताया है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार मौजूदा मैक्रो परिस्थितियों में 2026 की दूसरी छमाही के दौरान सोने का भाव लगभग 4,100 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस के आसपास से 5 प्रतिशत तक गिर सकता है। हालांकि परिषद के परिदृश्य से पता है कि सोना 4,500 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस की अपनी ऊपरी प्रवृति को फिर से शुरू कर सकता है यदि वैश्विक स्तर पर कोई  स्पष्ट संकेत मिलते हैं तो सोने की कीमतें  4,500 से 5,000 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस तक बढ़ सकती हैं।

सोने की कीमतों में तेजी आने की तीन वजहें 

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के अनुसार तीन वजहों से सोने में तेजी आने की संभावना बनती है, पहली बिगड़ती आर्थिक और भू-राजनीतिक परिस्थितियों, ब्याज दरों बदलाव और दीर्घकालिक निवेशकों की बढ़ती भागीदारी प्रमुख हैं। रिपोर्ट के अनुसार वित्तिय बाजार में अस्थिरता और भू-राजनीतिक जोखिम ने ऐतिहासिक रूप से सोने की कीमतों को बढ़ाया है। देखा जाए तो जीपीआर सूचकांक में हर महीने 100 अंकों की वृद्धि से सोने की कीमतों में 2.5 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होती है। हालांकि फेडरल बैंक की ब्याज दरों में नरम रुख अपनाने की उम्मीद से सोने को लाभ मिल सकता है।

बदलाव का असर कहां पड़ेगा?


  • रिपोर्ट बताती है, 2026 में वैश्विक अर्थव्यवस्था में सालाना आधार पर 2.9 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है, जबकि अमेरिका में यह दर 2.1 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।

  • वहीं अमेरिका में मुद्रास्फीति दूसरी तिमाही में लगभग 3.9 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। जबकि वैश्विक मुद्रास्फीति का साल भर का अनुमान 4.3 प्रतिशत है।

  • अगर मुद्रास्फीति लगातार उच्च स्तर पर बनी रहती है, तो यह सोने के लिए लाभकारी हो सकती है, क्योंकि मुद्रास्फीति स्थिर रहने से सोने की कीमतों में वृद्धि होती है।

  • वहीं अमेरिकी डॉलर की स्थिति भी महत्वपूर्ण है, वो भी काफी अलग बनी हुई है।

सोने की मांग के दो प्रमुख क्षेत्र पहले केंद्रीय बैंक और दूसरा भारत

रिपोर्ट ने सोने की मांग पर प्रकाश डालते हुए बताया है, केंद्रीय बैंक और भारत जहां सबसे अधिक मांग है। भारत सोने की मांग के मामले में दूसरा सबसे बड़ा बाजार है। जिसकी सालान मांग 800 टन है। अप्रैल की शुरुआत से सरकार ने आयात शुल्क को 6 प्रतिशत बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है और भारतीय रुपये पर दबाव की वजह से उपभोक्ताओं को सोने की खरीदारी नहीं करने के आग्रह और आयात कम करने के संदेश जारी किए गए हैं। इसलिए काउंसिल का अनुमान है, शुल्क में वृद्धि होने की वजह से आभूषण, सोने की छड़ों और सिक्कों की मांग में 50-60 टन यानी 10 प्रतिशत की कमी आने की संभावना है।

दूसरा केंद्रीय बैंकों की मांग

रिपोर्ट के अनुसार केंद्रीय बैंकों ने साल 2022 से औसतन 1,000 टन प्रति वर्ष सोना खरीदा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने अनुमान है, 600 टन प्रतिवर्ष के दीर्घकालिक औसत से अधिक भंडार में 20 से 30 टन की अतिरिक्त वृद्धि से सोने की कीमतें में लगभग 1 प्रतिशत की वृद्धि होनी चाहिए। धन कोष, पेंशन कोष, बीमा कंपनियों सहित लंबी अवधि के परिसंपत्ति धारक भी अपनी भागीदारी सोने में बढ़ा रहे हैं।

सोने की कीमतें सीमित रहने की संभावना

रिपोर्ट के अनुसार यदि सोने की कीमत मौजूदा स्तर से 10 से 15 प्रतिशत तक गिरती है, तो आगे की गिरावट सीमित रहने की संभावना है, क्योंकि ऐतिहासिक रूप से सोने की कीमतें गिरने से खरीदारी को बढ़ावा मिलता है।



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