दिल्ली सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोने की कीमत में ₹1,000 प्रति 10 ग्राम की गिरावट दर्ज की गई, जिसके बाद यह पांच सप्ताह के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। हालांकि, इस गिरावट के बावजूद सोने की कीमतें अभी भी ऊंचे स्तरों पर बनी हुई हैं और बाजार में आगे की दिशा को लेकर निवेशकों की नजर वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर है। खास तौर पर अमेरिकी फेड की ब्याज दरों से जुड़ी टिप्पणियां, डॉलर की चाल, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और अंतरराष्ट्रीय बाजार में निवेशकों की गतिविधियां सोने की कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं।
वहीं, चांदी की कीमतों में इस दौरान कोई बड़ी गिरावट देखने को नहीं मिली। औद्योगिक मांग से समर्थन मिलने के कारण चांदी अपने पिछले स्तरों के आसपास स्थिर बनी रही। चांदी को कीमती धातु के साथ-साथ औद्योगिक धातु के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है, इसलिए इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़ी मांग इसकी कीमतों को सहारा दे सकती है। यही वजह है कि सोने में दबाव के बावजूद चांदी का प्रदर्शन अपेक्षाकृत स्थिर रहा।
त्योहारी सीजन और शादी-ब्याह के दौर से पहले सोने की कीमतों में आई यह गिरावट खुदरा ग्राहकों और ज्वेलर्स का ध्यान आकर्षित कर सकती है। कीमतों में नरमी आने पर ऐसे खरीदार जिन्हें शादी या त्योहारों के लिए आभूषण खरीदने हैं, वे अपनी खरीदारी की योजना पर विचार कर सकते हैं। हालांकि, केवल एक दिन की गिरावट को कीमतों में स्थायी बदलाव का संकेत मानना उचित नहीं होगा। सोने की कीमतें आगे भी अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर, ब्याज दरों, बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक परिस्थितियों जैसे कई कारकों से प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए खुदरा खरीदारों और निवेशकों के लिए खरीदारी से पहले स्थानीय बाजार का ताजा भाव, शुद्धता, मेकिंग चार्ज और अन्य शुल्कों की जानकारी लेना जरूरी है।



