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होर्मुज का खतरा बढ़ा तो बदली रणनीति: अब अमेरिका से एलपीजी आयात करेगा भारत; घटेगी पश्चिम एशिया पर निर्भरता


भारत अपनी रसोई गैस यानी एलपीजी आपूर्ति का नक्शा बदलने की तैयारी कर रहा है। सरकारी तेल कंपनियां 2027 से देश के कुल एलपीजी आयात का करीब एक-चौथाई हिस्सा अमेरिका से मंगाने की योजना पर आगे बढ़ रही हैं। भारत की एलपीजी जरूरत का बड़ा हिस्सा अभी पश्चिम एशिया से आता है, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ते जोखिम, आपूर्ति में रुकावट और अमेरिका के साथ व्यापार समझौते की बातचीत ने ऊर्जा नीति को नई दिशा दे दी है। यह कदम पश्चिम एशिया पर निर्भरता घटाने और वॉशिंगटन के साथ व्यापार संतुलन सुधारने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

क्या सरकारी तेल कंपनियां निभाएंगी सबसे बड़ी भूमिका?

सरकार की इस योजना में इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल विपणन कंपनियां अहम भूमिका निभाएंगी। ये कंपनियां पहले ही 2026 के लिए अमेरिकी खाड़ी तट से 22 लाख टन एलपीजी खरीदने का अनुबंध कर चुकी हैं। जून में अमेरिका से भारत का एलपीजी आयात पहली बार 10 लाख टन के पार जाने का अनुमान है।

क्या अमेरिका बनता जा रहा है भारत का रणनीतिक गैस आपूर्तिकर्ता?

इसका मतलब है कि अमेरिका अब भारत के रसोई गैस बाजार में केवल आकस्मिक आपूर्तिकर्ता नहीं, बल्कि एक रणनीतिक स्रोत बनता जा रहा है। भारत के लिए यह बदलाव मजबूरी और रणनीति, दोनों का मेल है। पश्चिम एशिया से कम आपूर्ति के कारण जनवरी-जून 2026 में एलपीजी की खपत घटकर करीब 1.47 करोड़ टन रह गई। इस अवधि में आयात भी करीब 28 फीसदी घटकर 75 लाख टन रह गया। आंकड़े बताते हैं कि आपूर्ति का यह झटका सिर्फ बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर सब्सिडी नीति पर भी पड़ सकता है।

क्या घरेलू तेल और गैस उत्पादन बढ़ाने की भी तैयारी है?

विदेशी गैस पर निर्भरता घटाने के साथ सरकार घरेलू तेल और गैस की खोज को भी बढ़ावा देना चाहती है। पेट्रोलियम मंत्रालय गहरे समुद्र में तेल और गैस की खोज के लिए करीब 80,000 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन पैकेज पर काम कर रहा है। कुओं की खुदाई की लागत का 50 फीसदी तक हिस्सा सरकार वहन कर सकती है। इसका उद्देश्य विदेशी और निजी कंपनियों को समुद्री क्षेत्रों में निवेश के लिए आकर्षित करना है।

क्या होर्मुज जलडमरूमध्य का विकल्प तलाश रहा है भारत?

होर्मुज जलडमरूमध्य भारत की ऊर्जा सुरक्षा की सबसे कमजोर कड़ी माना जाता है। पश्चिम एशिया से आने वाले तेल और गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। हालिया तनाव के बाद भारत ने रूस और लैटिन अमेरिका से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई है। एलपीजी के मामले में अमेरिका को बड़ा स्रोत बनाना भी इसी रणनीति का विस्तार है। हालांकि, यह जरूरी नहीं कि अमेरिकी एलपीजी हमेशा सस्ती ही पड़े।

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क्या ट्रेड डील भी इस रणनीति का अहम हिस्सा है?

अमेरिका लंबे समय से भारत पर ऊर्जा आयात बढ़ाने का दबाव डाल रहा है। भारत के लिए इसके दो बड़े फायदे हो सकते हैं। पहला, पश्चिम एशिया से आपूर्ति का जोखिम कम होगा। दूसरा, अमेरिका के साथ व्यापार घाटे को कम करने और रणनीतिक रिश्तों को मजबूत करने में ऊर्जा आयात संतुलनकारी भूमिका निभा सकता है।



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