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70,500 रुपए की साइबर ठगी की जांच के लिए निकली मुंबई पुलिस के हाथ बड़ा स्कैम लगा है. यह स्कैम करीब 63.69 करोड़ रुपए का बताया जा रहा है. इस मामले में मुंबई पुलिस ने पश्चिम बंगाल से पहली गिरफ्तारी की है. अब तक पड़ताल में पता चला है कि यह साइबर फ्रॉड नेक्सेस करीब 3 हजार लोगों को निशाना बना चुका है. क्या है पूरा मामला, जानने के लिए पढ़ें आगे…
मुंबई पुलिस ने 63 करोड़ रुपए के साइबर फ्रॉड का खुलासा किया है. (एआई इमेज)
Cyber Crime: 70 हजार रुपए की तलाश में निकली मुंबई पुलिस के हाथ 63 करोड़ रुपए से अधिक का बिग स्कैम लगा है. जी हां, यह मामला मुंबई के एक व्यक्ति के बैंक खाते से निकली 70 हजार रुपए की रकम से जुड़ा था. पहली नजर में यह मामला भी एक आम साइबर फ्रॉड की तरह दिख रहा था. लेकिन, जब पुलिस ने इसकी जांच शुरू की तो एक ऐसा नेटवर्क सामने आया जिसने सभी को भी चौंका दिया. जांच में पता चला कि यह सिर्फ एक व्यक्ति के साथ हुई धोखाधड़ी नहीं थी, बल्कि पूरे देश में फैले एक बड़े साइबर गिरोह का हिस्सा था. पुलिस का दावा है कि इस नेटवर्क ने अब तक करीब 2,993 लोगों को निशाना बनाकर ₹63.69 करोड़ की ठगी की है.
क्या था पूरा मामला
पुलिस के अनुसार, पीड़ित को महानगर गैस लिमिटेड (एमजीएम) के नाम से एक एसएमएस मिला. मैसेज में लिखा था कि अगर उसने तुरंत अपनी बिलिंग डिटेल अपडेट नहीं की, तो उसका गैस कनेक्शन बंद कर दिया जाएगा. मैसेज में एक डाउनलोड लिंक भी दिया गया था. मैसेज बिल्कुल असली कंपनी की तरफ से भेजे गए नोटिफिकेशन जैसा लग रहा था. इस मैसेज में किसी तरह के इनाम या लॉटरी का लालच नहीं दिया गया था. प्रॉसेस के लिए सिर्फ चंद मिनटों का टाइम दिया गया था, जिससे यूजर बिना सोचे समझे लिंक पर क्लिक कर दे. पीड़ित ने जैसे ही लिंक पर क्लिक किया, उनके एंड्रॉइड फोन में एक एप्लिकेशन इंस्टॉल हो गई. कुछ ही मिनटों बाद उसके बैंक खाते से ₹70,500 निकल गए.
पुलिस को हुआ बड़े नेटवर्क का शक
- खाते से रुपए निकलने के बाद पीडि़त ने तत्काल इसकी जानकारी मुंबई पुलिस से साझा की. मुंबई पुलिस ने मामले की जांच शुरू की. धीरे-धीरे यह जांच एक बड़े साइबर नेटवर्क की तरफ बढ़ने लगी.
- जांच में पता चला कि ऐसी घटनाएं सिर्फ मुंबई तक सीमित नहीं थीं. मुंबई पुलिस का दावा है कि इसी नेटवर्क के जरिए देशभर में हजारों लोगों को निशाना बनाया गया था. शुरुआती जांच में करीब 2,993 पीड़ितों की पहचान हुई और ठगी की रकम करीब ₹63.69 करोड़ तक पहुंच गई.
- पुलिस की जांच अब मुंबई से निकलकर पश्चिम बंगाल तक पहुंच गई. जांच के दौरान मिले डिजिटल फुट प्रिंट का पीछा करते-करते पुलिस पश्चिम बंगाल तक पहुंच गई. यहां से 26 साल के एसके मंडल को गिरफ्तार किया गया.
- पूछताछ में पता चला कि आरोपी एक साइंस ग्रेजुएट है. वह खुद लोगों को फोन करके ठगी नहीं करता था, बल्कि उसका काम ऐसे फेक एंड्रॉइड ऐप यानी फेक एपीके (APK) फाइल तैयार करना था.
- इस ऐप का इस्तेमाल अलग-अलग साइबर गैंग लोगों को फंसाने के लिए करते थे. पुलिस के अनुसार, उसने अब तक 91 फेक एपीके फाइलें बनाई थीं. इन ऐप्स को इस तरह डिजाइन किया जाता था कि वे किसी सरकारी विभाग, बैंक, गैस कंपनी जैसी एजेंसियों के असली ऐप जैसे दिखाई दें.
एपीके इंस्टॉल होते ही फोन पर हो जाता था कंट्रोल
- इस मामले की सबसे खतरनाक बात इसका तरीका बताया जा रहा है. पहले साइबर ठग लोगों को फोन करके ओटीपी, बैंक डिटेल या पासवर्ड पूछते थे, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं था. जैसे ही पीड़ित अपने फोन में फेक एपीके फाइल इंस्टॉल करता था, उसके बाद हैकर्स को मोबाइल फोन पर कंट्रोल मिल जाता था.
- पुलिस के अनुसार, इस एपीके फाइल के जरिए हैकर्स फोन में हो रही सभी गतिविधियों को ट्रैक कर सकते थे. इतना ही नहीं, वह बैंक से जुड़े मैसेज पढ़े जा सकते थे. जरूरी जानकारी हासिल की जा सकती थी. साथ ही, बिना बार-बार पीड़ित से बात किए बैंक खाते से पैसे निकाले जा सकते थे.
- जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, पुलिस को इस नेटवर्क से जुड़े कई अहम सबूत मिले. पुलिस का दावा है कि जांच के दौरान 967 फर्जी सिम कार्ड और 37,200 बैंक खातों से जुड़े रिकॉर्ड बरामद किए गए हैं. इन सिम कार्ड और बैंक खातों का इस्तेमाल चोरी के पैसे को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था.
- साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि एंड्रॉइड यूजर्स के लिए फेक एपीके फाइलें आज सबसे बड़े खतरों में से एक बन चुकी हैं. गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड होने वाले ऐप कई सिक्योरिटी जांच से गुजरते हैं, लेकिन एसएमएस, व्हाट्सएप या ईमेल के जरिए भेजी जाने वाली एपीके फाइलें इन सुरक्षा जांचों से बाहर होती हैं.
- अगर कोई यूजर खुद इन्हें इंस्टॉल करने की अनुमति दे देता है, तो फोन में मैलवेयर पहुंच जाता है. इसके बाद यह चुपचाप बैकग्राउंड में काम करता रहता है और कई बार यूजर को लंबे समय तक पता भी नहीं चलता कि उसका फोन हैक हो चुका है.
सामने आया साइबर अपराध का नया चेहरा
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Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international…
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