MP Double Money Biggest Scam Mastermind: मध्य प्रदेश के बालाघाट में एक समय ऐसा था जब लोगों की आंखों में पैसे को डबल करने का ख्वाब था. कुछ रसूखदार अपनी काली कमाई दोगुना करने की लालच में आए फिर पीछे-पीछे आम नागरिक भी इस लालच की कतार में शामिल हुए. इसमें कई लोगों ने तगड़ी कमाई तो की लेकिन कई ऐसे लोग थे जिन्होंने जिंदगी भर की कमाई, जेवर और जमीन बेचकर पैसा डबल करने की चाह में सब कुछ दांव में लगा दिया. इसमें किसान, मजदूर से लेकर शिक्षक, पुलिस सहित सफेदपोश नेताओं ने भी दांव लगाया. शुरुआत में तो सब कुछ अच्छा चलता रहा लेकिन आखिर में इस डबल मनी स्कैम का भांडा फूट गया. अब पुलिस का कहना है कि यह स्कैम करीब 600 करोड़ रुपए का है. इसके पीछे ग्रामीण पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाला 12वीं पास सोमेंद्र कंकरायने था. अब सालों से फरार चल रहा सोमेंद्र के हाथों हथकड़ियां और वह जेल के पीछे है. जानिए 12वीं पास नटवरलाल की कहानी…
कहानी शुरू होती है अब से करीब 12 साल पहले से, जब सोमेंद्र कंकरायने 12वीं की पढ़ाई के बाद एक कॉलेज में बी. कॉम में एडमिशन लेता है. साथ ही इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स करता है. इस दौरान ही उसे चस्का लगता है पैसे कमाने का. इसके लिए उसे बिजनेस बेहतर ऑप्शन लगा. फिर सब कुछ छोड़ वह अपने गांव पहुंच गया. फिर उसने अनाज का व्यापार शुरू किया. इसमें वह धान, गेहूं, चना और दूसरी चीजें खरीदता और स्टॉक कर देता था. वहीं, जब इसके दाम बढ़ जाते तो वह इसे मार्केट में बेच देता. फिर धीरे से सोमेंद्र कंकरायने ने रियल एस्टेट कारोबार में अपना हाथ आजमाया. इसमें सोमेंद्र ने सबसे पहले एक जमीन खरीदी थी, जिसकी कीमत करीब 30 लाख रुपए थी. फिर उसने उसी जमीन को 35 लाख में बेच दी. इसके बाद उसे लगा की इस बिजनेस से जल्दी अमीर बना जा सकता है.
रियल एस्टेट से शुरू हुआ बिजनेस डबल मनी में कैसे बदला
सोमेंद्र कंकरायने ने अनाज का बिजनेस छोड़ रियल एस्टेट में हाथ आजमाया. इस बिजनेस में उसको सफलता मिली. इसी में उसने हैदराबाद की एक कंपनी माय होम में निवेश करना शुरू कर दिया. इसी दौरान उसने अपनी पुश्तैनी 11 एकड़ जमीन बेच दी और सारा पैसा उसी कंपनी में इन्वेस्ट कर दिया. इससे उसको फायदा हुआ. ऐसे में उसने सबसे पहले अपने रिश्तेदारों का पैसा डबल किया. फिर भरोसा पैदा हुआ, तो लोग जुड़ते गए. ऐसे में साल 2017 में शुरू हुआ स्कैम 2019 में 70 करोड़ रुपए से भी ज्यादा में पहुंच गई थी.
पहली बार फूटा था भांडा तो किसने बचाया
बताया जाता है कि उस समय 70 करोड़ रुपए की ज्यादा रकम वह हैदराबाद की माय होम कंपनी में निवेश कर चुका था. लेकिन कंपनी के लोगों ने ही उसके साथ धोखाधड़ी की थी. तब सोमेंद्र को हैदराबाद में ही बंदी बना लिया गया था. हालांकि, वह वहां से कैसे छूटा इसकी जानकारी नहीं मिल सकी है. फिर वहां से आने के बाद उस पर लगातार निवेशकों का पैसा वापस लौटाने का दबाव बना. लेकिन निवेशकों का पैसा नहीं मिला, तो गुस्सा फूटने लगा. साल 2019 में पहली बार सोमेंद्र का भांडा फूटा था. दरअसल, एक निवेशक के पैसे वापस न मिलने पर उसने सीएम हेल्पलाइन में शिकायत की थी. तब राजनीतिक संरक्षण के चलते कार्रवाई नहीं हो सकी. अगर उस वक्त कार्रवाई हुई होती, तो यह स्कैम अरबों तक नहीं पहुंचा.
फिर बेलगाम हो गया सोमेंद्र कंकरायने
साल 2019 में जैसे ही उस पर कार्रवाई से राहत मिली तो वह बेलगाम सा हो गया. ऐसे में उसने लोगों से पैसे इकट्ठा करना शुरू कर दिया. उसके साथ उसकी टीम भी बनती गई. इसमें एक नाम हेमराज आंबाडरे का है, जो 6 महीने में ही पैसा डबल करने का आश्वासन देकर निवेशकों से पैसे लेता था. इसके बाद अजय तिड़के नाम शख्स को भी जोड़ लिया. इन लोगों कई कंपनियां भी बनाई. इसके बाद आम लोगों से लेकर रसूखदारों ने भी इनके पास दोगुना पैसे के लालच में निवेश किया.
जानिए कैसे चलती रही पौंजी स्कीम
बालाघाट एसपी आदित्य मिश्रा ने बताया कि सोमेंद्र कंकरायने की डबल मनी पौंजी स्कीम फ्लॉप होने लगी. तब उसने नया रास्ता अपनाया. इसमें वह नए निवेशकों को अपनी पौंजी स्कीम में शामिल करता था. इसमें वह गारंटी के तौर पर पोस्ट डेटेड चेक का भी इस्तेमाल करता था. फिर आए हुए पैसे पुराने निवेशकों को लौटाता, जिससे लोगों का विश्वास भी बना रहता था. ऐसे में जिन लोगों के पैसे डबल हो भी जाते, तो वह फिर से उनकी पौंजी स्कीम में पैसा इन्वेस्ट करते थे. ऐसे में ये खेल करीब तीन साल तक चला. समय ये स्कीम कम समय की होने लगी फिर पैसे वापस करने का दबाव बनता गया. ऐसे में सालों से चल रहा सोमेंद्र का खेल खत्म होता नजर आया. पहली एफआईआर साल 2022 में हुई थी. इसमें पुलिस को अंदाजा है कि इस पौंजी स्कीम के जरिए लोगों ने 500 से 600 करोड़ रुपए निवेश कर दिए. हालांकि,
12वीं पास लड़के की लग्जरी लाइफ स्टाइल
डबल मनी मास्टरमाइंड सोमेंद्र कंकरायने खुद ही 12वीं पास और कॉलेज ड्रॉप आउट था. लेकिन खुद को हॉर्वर्ड से एमबीए बताता था. वह लग्जरी गाड़ियों का शौकीन भी था. साथ ही सेलिब्रिटिज से भी मुलाकात की खबरें फैलाता था. वह कहता था कि आपके पैसे में विदेशों में प्रॉपर्टी में निवेश करता हूं. वह लोगों में अपना भरोसा बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया पर फॉरेन ट्रिप्स का दावा करता था. लेकिन सच्चाई ये है कि उसके पास पासपोर्ट तक नहीं है. एक ऐसी ही जनचर्चा ये थी कि वह अपने घर की छत पर ही हेलीपैड बनाएगा.
आखिरी के दो महीने में हुआ बड़ा खेल
मामले का खुलासा साल 2022 में हुआ था. यह मुद्दा विधानसभा में गुंजा था. इसके बाद प्रशासन ने सोमेंद्र कंकरायने और उसके साथियों पर कार्रवाई भी की थी. 17 मई को सोमेंद्र और उसके साथियों की गिरफ्तारी हुई थी. इस दौरान सोमेंद्र और उसके साथियों पर बड्स एक्ट 2019 के तहत कार्रवाई की गई. वह 27 जुलाई 2022 को जमानत पर बाहर आया. लेकिन उससे पहले रसुखदार निवेशकों ने पैसा वापस पाने के लिए सोमेंद्र और उसके साथियों को धमकाना भी शुरु किया. ऐसे में सोमेंद्र और साथियों ने एजेंटों की संख्या भी बढ़ा दी. तब गरीब, मजदूर और मध्य वर्गीय परिवारों ने अपनी जमा पूंजी तक लालच में गवा दी. 20 दिसंबर 2022 को सोमेंद्र और उसके साथियों की बेल याचिका खारिज हो गई, जिसके बाद से वह फरारी काट रहा था।
जानिए कैसे गिरफ्तार हुआ था सोमेंद्र?
बालाघाट एसपी आदित्य मिश्रा ने बताया कि गिरफ्तारी से बचने के लिए वह तमाम धार्मिक स्थलों पर घूमता रहा. इधर पुलिस ने उसकी करोड़ों रुपये की संपत्तियां सीज कर दी थीं और जमीनों की रजिस्ट्री पर रोक लगा दी थी. जांच के दौरान पुलिस ने रणनीति के तहत एक जमीन की रजिस्ट्री की अनुमति दी, जिसके बाद आरोपी और उसके साथियों ने टेलीग्राम ऐप के जरिए बातचीत और लेन-देन शुरू किया. यही पुलिस के लिए सबसे अहम सुराग साबित हुआ. तकनीकी निगरानी और लोकेशन ट्रैकिंग के आधार पर विशेष टीम हरिद्वार पहुंची और योजनाबद्ध तरीके से दबिश देकर मुख्य आरोपी सहित 8 लोगों को गिरफ्तार कर लिया. इसमें उसका मामा रामप्रसाद मंसूरे भी शामिल है. उसका मामा पेशे से शिक्षक है, जिसने कई शिक्षकों को भी झांसे में लिया था. आपको बता दें कि 63 से ज्यादा मामले दर्ज है.
गिरफ्तारी के बाद क्या बोला सोमेंद्र
सोमेंद्र कंकरायने की गिरफ्तारी के बाद जब मीडिया के सामने पेश किया गया, तो वह ज्यादा कुछ कह नहीं सका. उसने बताया कि वह धार्मिक प्रवृत्ति का है. इसलिए वह देश के तमाम धार्मिक स्थलों पर रहता था. सोमेंद्र ने कहा है कि कई ऐसे लोग भी जिन्होंने उसके नाम का इस्तेमाल किया है. उनके गर्म किए तवे पर कोई और रोटी सेंक गया. ऐसे में प्रशासन से चाहता है कि वह उनकी भी जांच करें. सोमेंद्र ने बताया कि उनकी उसकी फेवरेट ऑरेंज कलर की हरियर गाड़ी पूर्व विधायक और बीजेपी नेता रमेश भटेरे से जुड़े शख्स के पास है.
बड़ा सवाल ये कब मिलेगा पैसा?
एसपी आदित्य मिश्रा ने बताया कि अब आरोपियों के गिरफ्तारी के बाद न्यायिक प्रक्रिया तेज हो जाएगी. सोमेंद्र के 32 से ज्यादा अकाउंट फ्रीज किए जा चुके हैं. वहीं, उसकी कई चल और अचल संपत्तियों को कुर्क किया गया है. वहीं, कोर्ट के फैसले के बाद ही निवेशकों को उनका मूलधन लौटाया जा सकेगा. ऐसे में निवेशकों को काफी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है. वहीं, निवेशकों से भी अपील की गई है कि कोई भी आरोपियों के परिजनों को परेशान न करें. न ही कोई उनके घर जाए और न ही उनके परिजनों को तंग करें. वहीं, किसी भी निवेशक के ऐसा करने की शिकायत मिलती है, तो उन पर कानूनी कार्रवाई की बात कहीं गई है.



