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170 टन का ‘भीम चूल्हा’… झारखंड का ये है सबसे अनोखा पर्यटन स्थल!


पलामू: ठंड के मौसम में लोग घूमने फिरने और परिवार के साथ पिकनिक मनाने वाले लोकेशन की तलाश करते हैं. ऐसे में सितंबर-अक्टूबर माह में झारखंड के कई प्राकृतिक धरोहर खूबसूरती से खिल जाते है. जहां लोग पिकनिक मनाने पहुंचते है. पलामू जिले के मोहम्मदगंज प्रखंड में स्थित भीम चूल्हा प्राकृतिक खूबसूरती और धार्मिक आस्था का अनोखा संगम है. यहां बड़ी संख्या में घूमने के लिए पर्यटक पहुंचते हैं.

दरअसल, पलामू जिला मुख्यालय मेदिनीनगर से करीब 70 किलोमीटर दूर स्थित इस पर्यटन स्थल को लेकर मान्यता है कि महाभारत काल से जुड़ी कहानी बयां करती है. यहां पांचों पांडव माता कुंती के साथ अज्ञातवास के दौरान यहां रुके थे. इसी दौरान पांडव यहां खाना पकाया करते थे और भीम ने तीन विशाल पत्थरों को जोड़कर चूल्हे का निर्माण किया था. इस विशाल चूल्हे का वजन करीब 170 टन का तैयार किया था. जो आज भी यहां आने वाले पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है.

पांडवों से जुड़ी निशानियां

बता दें कि भीम चूल्हा परिसर में पांडवों से जुड़ी कई मान्यताएं देखने को मिलती हैं. यहां पत्थरों पर पांडवों के पदचिह्न होने की बात कही जाती है. पांचों पांडवों और माता कुंती की मूर्तियां भी स्थापित हैं. वहीं, एक पत्थर को ‘हथिया बाबा’ के नाम से जाना जाता है. स्थानीय मान्यता है कि पांडवों के साथ आया हाथी युग परिवर्तन के बाद पत्थर में बदल गया. मंदिर के नीचे एक गुफा होने की भी चर्चा है, जिसे लेकर लोगों का विश्वास है कि अज्ञातवास के दौरान पांडव और माता कुंती इसी क्षेत्र में रहा करते थे.

पर्यटन के लिए विकसित हुआ क्षेत्र

भीम चूल्हा को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए यहां पार्क, वॉच टावर और अन्य सुविधाएं विकसित की गई हैं. चूल्हे के ऊपर विशाल कराह भी बनाया गया है, ताकि पर्यटक उस मान्यता को समझ सकें कि कभी इसी स्थान पर माता कुंती खाना बनाया करती होंगी. वॉच टावर से आसपास के जंगल, पहाड़ी क्षेत्र, कोयल नदी और भीम बराज का मनमोहक नजारा दिखाई देता है. धार्मिक आस्था के कारण यहां दूर-दूर से श्रद्धालु भी पहुंचते हैं. ठंड के मौसम में लोग पिकनिक मनाने पहुंचते है.

कोयल नदी और बोटिंग बना रही आकर्षण

बता दें कि भीम चूल्हा की खूबसूरती को कोयल नदी और भीम बराज और खास बना देते हैं, नदी की कलकल बहती धारा के किनारे बैठकर लोग घंटों प्रकृति का आनंद लेते हैं. अब यहां बोटिंग की सुविधा भी पर्यटकों को आकर्षित कर रही है. पर्यटक राहुल कुमार ने बताया कि पहले यहां 6-सीटर बोट उपलब्ध थी, लेकिन अब 8-सीटर बोट आने के बाद कुल तीन मोटर बोट हो गई हैं. इससे अधिक पर्यटक एक साथ नौका विहार का आनंद ले सकते हैं.

जानें कैसे पहुंचें यहां

बता दें कि भीम चूल्हा का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन मोहम्मदगंज है, जो करीब 3 किलोमीटर दूर बताया जाता है. सड़क मार्ग से यह पलामू जिला मुख्यालय मेदिनीनगर से लगभग 70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. जहां पिकनिक मनाने और धार्मिक आस्था के साथ प्रकृति, नदी और महाभारत काल से जुड़ी स्थानीय मान्यताओं को एक ही जगह महसूस करना चाहते हैं, तो भीम चूल्हा आपके लिए एक खास पर्यटन स्थल हो सकता है.



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