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2029 से लागू हो सकता है वन नेशन वन इलेक्शन: संसदीय समिति के अध्यक्ष बोले- 99% लोग पक्ष में; राज्यों के विशेषज्ञों से सलाह ले रहे


नई दिल्ली18 मिनट पहले

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तस्वीर 23 सितंबर की है, जब दिल्ली के जोधपुर ऑफिसर्स हॉस्टल में वन नेशन-वन इलेक्शन के लिए बनाई कमेटी की बैठक हुई थी।

संसद की संयुक्त समिति(JPC) कोशिश कर रही है कि 2029 के लोकसभआ चुनावों तक ‘एक देश, एक चुनाव’ लागू हो सके। समिति के अध्यक्ष पी.पी. चौधरी के अनुसार, अब तक चर्चा में शामिल लगभग 99% नागरिक समाज और संगठनों ने इसका समर्थन किया है।

समिति ने गोवा के मुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्रियों सहित कई राज्यों के विशेषज्ञों से इस पर सलाह ली है।

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वन नेशन वन इलेक्शन से जुड़े 5 सवाल

1. आखिर इसका क्या मतलब है?

लोकसभा, विधानसभा, स्थानीय निकायों के चुनाव अलग-अलग कराने के बजाय एक साथ कराना।

2. जिन राज्यों का कार्यकाल 2029 के बाद भी बचा होगा, उनका क्या होगा?

संविधान संशोधन के जरिए उन राज्यों के कार्यकाल को समय से पहले ही समाप्त करके 2029 के चुनावी चक्र के साथ जोड़ा जाएगा।

3. जिनका कार्यकाल 2029 से पहले खत्म हो रहा होगा, उनका क्या होगा?

वहां कुछ समय के लिए राष्ट्रपति शासन लग सकता है या फिर केवल 2029 तक के लिए चुनाव संभव।

4. इसमें क्या कानूनी चुनौतियां आएंगी?

कई अनुच्छेदों (जैसे 83, 172, 356) में संशोधन करना होगा। संसद में दो-तिहाई बहुमत और आधे राज्यों की मंजूरी चाहिए।

5.अगर बीच में ही कोई सरकार गिर जाए, तो क्या नियम प्रस्तावित हैं?

इस नए प्रस्ताव के तहत मध्यावधि चुनाव पूरे 5 साल के लिए नहीं कराए जाएंगे, बल्कि केवल बचे हुए कार्यकाल के लिए ही कराए जाएंगे, ताकि अगला मुख्य चक्र न बिगड़े।

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वन नेशन, वन इलेक्शन पर सुरक्षित रास्ता भी तलाश रही सरकार

केंद्र सरकार वन नेशन वन इलेक्शन के लिए सुरक्षित रास्ता तलाश रही है। इसके लिए बनी जेपीसी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक समिति ‘टू-फेज ट्रांजिशन मॉडल’ पर विचार कर रही है, जिससे राज्यों में बार-बार चुनाव कराने या विधानसभाओं के कार्यकाल में बहुत बड़ी कटौती करने की जरूरत न पड़े।

पूरे देश को एक साथ चुनावी चक्र में लाने के बजाय दो चरणों- 2029 और 2034 में बढ़ने का विकल्प सबसे व्यावहारिक माना जा रहा है। पहले चरण में 2029 के लोकसभा चुनाव के साथ करीब 20 राज्यों के विधानसभा चुनाव कराए जा सकते हैं।

संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की अवधि 2026 के मानसून सत्र तक बढ़ाई जा चुकी है। ऐसे में 2029 से चुनावी चक्र एक करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। वहीं, 2034 तक पूरे देश को साझा चुनावी चक्र में लाने का लक्ष्य है।

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संविधान में गुंजाइश है, लेकिन सहमति पर जोर

लॉ कमीशन के पूर्व सदस्य और मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के लॉ कॉलेज के डीन आनंद पालीवाल ने कहा कि एक देश-एक चुनाव’ को चरणबद्ध तरीके से लागू करने के लिए संवैधानिक विकल्प मौजूद हैं। कुछ राज्यों में विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने से पहले चुनाव कराए जा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों में कार्यकाल बढ़ाने के विकल्प भी हैं। भारत में पहले भी विशेष परिस्थितियों में लोकसभा और विधानसभाओं के कार्यकाल में बदलाव किए गए हैं। हालांकि किसी भी व्यापक बदलाव के लिए संसद द्वारा आवश्यक कानूनी प्रावधान और राजनीतिक सहमति जरूरी होगी।

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में पैनल का गठन

‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ पर विचार करने के लिए पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की अध्यक्षता में 2 सितंबर 2023 को एक पैनल का गठन किया गया था। इस पैनल ने हितधारकों-विशेषज्ञों के साथ चर्चा और 191 दिनों के शोध के बाद 14 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।

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1967 तक साथ हुए चुनाव

1952 से 1967 तक यानी चार बार लोकसभा व अधिकांश विधानसभा चुनाव साथ हुए। 1967 के बाद कई राज्यों में सरकारें गिरने लगीं। 1968-69 में कई विधानसभाएं भंग हुईं और 1970 में लोकसभा भी कार्यकाल पूरा होने से पहले भंग हो गई। इससे देश का साझा चुनावी चक्र बिखर गया।

1971 में लोकसभा के मध्यावधि चुनाव हुए और राज्यों में चुनाव अलग-अलग समय पर होने लगे। बाद में गठबंधन सरकारों, राष्ट्रपति शासन और समय से पहले चुनाव ने अंतर और बढ़ा दिया। विधि आयोग और नीति आयोग समय-समय पर चुनावी चक्र एक करने की सिफारिश करते रहे हैं।

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वन नेशन-वन इलेक्शन के मुद्दे पर ठित संयुक्त संसदीय समिति ने विभिन्न राज्यों का दौरा कर राजनीतिक दलों और अधिकारियों से परामर्श शुरू कर दिया है। प्रियंका गांधी, संबित पात्रा और बांसुरी स्वराज समेत समिति के 39 सदस्य आज से तीन दिनों के लिए गुजरात पहुंचे हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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