पलामू: झारखंड में पलामू का किला करीब 400 साल पुरानी ऐतिहासिक धरोहर माना जाता है. ऐतिहासिक महत्व के साथ यह किला कई लोककथाओं और रहस्यों को अपने भीतर समेटे हुए है. सितंबर के महीने में हरियाली और सुहाने मौसम के बीच यह क्षेत्र घूमने के लिए खास बन जाता है. परिवार के साथ इतिहास और प्रकृति का आनंद लेने के लिए पर्यटक यहां पहुंचते हैं. किले तक पहुंचने के लिए प्रवेश टिकट लेना पड़ता है.
औरंगा नदी के किनारे असुर बांध की है अलग पहचान
बता दें कि पलामू किले से करीब डेढ़ किलोमीटर पश्चिम दिशा में औरंगा नदी के दक्षिणी छोर पर स्थित असुर बांध अपने आप में एक अलग पर्यटन स्थल है. लातेहार और पलामू को जोड़ने वाले इस क्षेत्र में नदी, जंगल और पहाड़ी परिवेश पर्यटकों को आकर्षित करता है. वहीं, सितंबर में बारिश के बाद आसपास का प्राकृतिक नजारा और भी खूबसूरत दिखाई देता है. यही वजह है कि असुर बांध स्थानीय लोगों के बीच पिकनिक और घूमने के पसंदीदा स्थानों में शामिल है.
एक रात में बांध बनाने की है मशहूर कहानी
स्थानीय लोग बताते है कि असुर बांध से जुड़ी एक लोककथा आसपास के गांवों में आज भी प्रचलित है. ग्रामीणों के अनुसार, चेरोवंश के प्रतापी राजा मेदिनीराय के समय एक असुर ने एक ही रात में बांध बनाकर पलामू किले को डुबोने की शर्त रखी थी. उसने सूर्योदय से पहले किले को डुबो देने की चुनौती स्वीकार की थी और असफल होने पर मृत्युदंड की सजा मानने की बात कही थी.
राजा मेदिनी राय की चतुराई से असुर भागा
उन्होंने आगे बताया कि असुर ने किले के पश्चिम में औरंगा नदी पर बांध बनाना शुरू किया. देखते ही देखते बांध का काफी हिस्सा तैयार हो गया. इससे किले के दरबारी घबरा गए और इसकी सूचना राजा मेदिनी राय को दी. इसके बाद राजा ने चतुराई दिखाते हुए किले में बड़ा अलाव जलवा दिया. आग की लपटों को देखकर असुर को लगा कि सूर्योदय हो चुका है. मृत्युदंड के डर से वह अधूरा बांध छोड़कर वहां से भाग गया. तभी से इस स्थान को असुर बांध के नाम से जाना जाने लगा है.
पर्यटन की यहां है विशेष संभावना
बता दें कि इस कहानी से आस पास के लोग आज भी चर्चा करते हैं. ऐतिहासिक सच्चाई चाहे जो हो, लेकिन असुर बांध आज स्थानीय पर्यटन की पहचान बन चुका है. आसपास के ग्रामीण भी इस स्थल से जुड़ी लोककथा को पीढ़ियों से सुनाते आ रहे हैं. वहीं, पर्यटन के लिहाज से यहां पर्यटकों के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित हों, तो पलामू किला और असुर बांध को जोड़कर एक बेहतर पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित किया जा सकता है.
जानें कैसे आएं पलामू किला
बता दें कि पलामू किला घूमने के लिए पर्यटक मेदिनीनगर से सड़क मार्ग के जरिए किले की ओर पहुंच सकते हैं. जहां पलामू जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर इस पर्यटक स्थल पर पहुंच सकते है. किले के आसपास पहुंचने के बाद निर्धारित प्रवेश व्यवस्था के तहत टिकट लेकर पर्यटक परिसर में प्रवेश कर सकते हैं. यहां जाने से पहले वाहन की स्थिति और स्थानीय रास्ते की जानकारी ले लेना बेहतर है, क्योंकि किले के अंतिम हिस्से तक पहुंचने में सड़क की स्थिति और वाहन प्रवेश के नियम महत्वपूर्ण हो सकते हैं.



