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आम जनता को राहत! इन प्रोडक्ट पर Customs Duty खत्म, बाजार जाने से पहले चेक करें क्या होगा सस्ता?


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oi-Sohit Kumar

Customs Duty Exemption: मिडिस ईस्ट (Middle East) में जारी तनाव और ऊर्जा आपूर्ति में बाधाओं के बीच केंद्र सरकार ने भारतीय उद्योगों को बड़ी राहत दी है। सरकार ने कई महत्वपूर्ण पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर पूर्ण सीमा शुल्क छूट (Full Customs Duty Exemption) देने का निर्णय लिया है। यह छूट 30 जून तक लागू रहेगी, जिसका मुख्य उद्देश्य घरेलू उद्योगों पर बढ़ते लागत के बोझ को कम करना है। आइए जानतें हैं इस फैसले से आम आदमी और उद्योगों को क्या लाभ होने वाला है…

सरकार के इस कदम से कच्चे माल की लागत कम होगी, जिससे सीधे तौर पर निम्नलिखित क्षेत्रों में कीमतें घटने की उम्मीद है:

customs duty exemption

  • प्लास्टिक और पैकेजिंग: घरेलू उपयोग के प्लास्टिक उत्पाद, बाल्टियां, और पैकिंग मटेरियल सस्ते हो सकते हैं।
  • दवाइयां (Pharma): कई दवाओं के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले सॉल्वेंट्स और रसायनों की लागत गिरेगी।
  • कपड़ा उद्योग (Textiles): सिंथेटिक कपड़ों और फाइबर की कीमतों में कमी आएगी।
  • ऑटोमोबाइल: कारों और बाइक्स में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक और रबर कंपोनेंट्स की निर्माण लागत कम होगी।
  • खेती-किसानी: फर्टिलाइजर (Fertilizers) के लिए जरूरी रसायनों पर छूट से किसानों को राहत मिलेगी।

इन उत्पादों पर मिलेगी पूरी छूट (Complete List)

सरकार ने रसायनों और पॉलिमर की एक लंबी लिस्ट को ड्यूटी फ्री कर दिया है:

  • 1. केमिकल्स: एनहाइड्रस अमोनिया, टोल्यूनि, स्टाइरीन, मेथनॉल, आइसोप्रोपिल अल्कोहल, फिनोल, एसिटिक एसिड।
  • 2. पॉलिमर और प्लास्टिक: पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलीस्टाइनिन, पीवीसी (PVC), पॉलीकार्बोनेट, एपॉक्सी रेजिन।
  • 3. औद्योगिक इनपुट: विनाइल एसीटेट मोनोमर, शुद्ध टेरेफ्थेलिक एसिड (PTA), एथिलिंडायमाइन, टोल्यूनि डी-आइसोसाइनेट।
  • 4. सिंथेटिक रबर: पॉली ब्यूटाडीन, स्टाइरीन ब्यूटाडीन।

खाद की उपलब्धता पर सरकार की नजर
एक तरफ जहां उद्योगों को शुल्क में राहत दी गई है, वहीं दूसरी ओर किसानों के लिए खाद की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा ने राज्यों के कृषि मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक कर यूरिया और डीएपी (DAP) की उपलब्धता की समीक्षा की है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी इस मुद्दे पर संसद में उच्च स्तरीय चर्चा कर रहे हैं ताकि रबी और आगामी सीजन में खाद की कोई कमी न हो।

सरकार ने क्यों उठाया ये कदम?

मिडिल ईस्ट संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल से निपटने के लिए यह सरकार का एक ‘टारगेटेड’ कदम है। हालांकि इससे सरकारी खजाने पर करीब 1.3 लाख करोड़ रुपये का बोझ पड़ने का अनुमान है, लेकिन इससे बाजार में महंगाई को कंट्रोल करने और औद्योगिक उत्पादन को गति देने में मदद मिलेगी।



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