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oi-Bhavna Pandey
Iran Us war: मिडिल ईस्ट में बढ़े तनाव में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान पर तीखी टिप्पणी ने माहौल को और गरमा दिया है। ट्रंप के धमकी भरे बयान के कुछ ही घंटों बाद तेहरान की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बघेर गालिबफ (Mohammad Bagher Ghalibaf) ने सोशल मीडिया के जरिए अमेरिका को तुरंत जवाब दिया।
बघेर गालिबफ ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि “अमेरिका के लापरवाह कदम पूरे क्षेत्र को बड़े संघर्ष की ओर धकेल रहे हैं।” गालिबफ ने वॉशिंगटन की नीतियों के खतरों के बारे में बताते हुए कहा कि ये हर परिवार के लिए ‘जीता-जागता नरक’ बन सकती हैं।

तनाव तब और बढ़ गया जब ट्रंप ने ईरान से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) खोलने की सख्त मांग की। इस पर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि अमेरिका, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) के नक्शेकदम पर चलता रहा, तो वह “जलकर राख हो जाएगा”। गालिबफ ने यह आरोप भी लगाया कि अमेरिकी प्रशासन नेतन्याहू के दबाव में काम कर रहा है, जिससे हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। उन्होंने यह भी साफ किया कि युद्ध से अमेरिका को कोई फायदा नहीं मिलने वाला है।

विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच बढ़ती बयानबाजी पूरे क्षेत्र को एक बड़े टकराव की ओर ले जा सकती है, जिसके गंभीर वैश्विक परिणाम हो सकते हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने पहले 6 अप्रैल तक एक समझौते पर पहुंचने या तेहरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने की चेतावनी दी थी। ऐसा न होने पर, उन्होंने अमेरिका द्वारा ईरान के पावर प्लांट और पुलों को निशाना बनाने की धमकी दी थी।
अपनी इसी धमकी को दोहराते हुए ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, “मंगलवार पावर प्लांट और ब्रिज डे होगा, सब कुछ एक साथ। ऐसा पहले कभी नहीं देखा होगा। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलो, नहीं तो नतीजे भुगतने होंगे।” इसके कुछ समय बाद, उन्होंने एक और पोस्ट में केवल इतना लिखा, “मंगलवार, रात 8:00 बजे (ईस्टर्न टाइम)!”।
ट्रंप के इन बयानों पर ईरानी दूतावास थाईलैंड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर तीखी प्रतिक्रिया दी। दूतावास ने लिखा, “राष्ट्रपति जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, उसे देखकर लगता है कि अमेरिका उम्मीद से पहले ही पाषाण युग में पहुंच गया है।” यह टिप्पणी अमेरिकी नीति की आलोचना थी।
इस घटनाक्रम के तुरंत बाद, ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में अपनी बात दोहराई। उन्होंने कहा कि यदि समझौता नहीं होता है, तो वे “सब कुछ नष्ट करने और तेल पर कब्जा करने” जैसे विकल्पों पर विचार कर सकते हैं। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि बातचीत में शामिल ईरानी प्रतिनिधियों को सीमित छूट मिली है, लेकिन अगर कोई सहमति नहीं बनती, तो इसके बेहद गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।



