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oi-Sumit Jha
Iran vs USA War News: राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा मंगलवार रात 8 बजे तक की दी गई डेडलाइन को ईरान ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। अमेरिका की ओर से भारी तबाही की धमकी मिलने के बावजूद, ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को खोलने से साफ मना कर दिया है।
ईरान का कहना है कि वह ‘टेम्पररी सीज़फ़ायर’ (अस्थाई युद्धविराम) के झांसे में नहीं आएगा, क्योंकि उसे वाशिंगटन की नीयत पर भरोसा नहीं है। ईरान के इस कड़े रुख ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह झुकने के बजाय टकराने को तैयार है। इस फैसले से मिडिल ईस्ट में युद्ध के बादल घने हो गए हैं और दुनिया की धड़कनें बढ़ गई हैं।

Strait of Hormuz News: ट्रंप का अल्टीमेटम और युद्ध की धमकी
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने बेहद कड़े लहजे में ईरान को चेतावनी दी है कि अगर मंगलवार रात 8 बजे तक समुद्री रास्ता नहीं खुला, तो अंजाम बुरा होगा। ट्रंप का मानना है कि ईरान वैश्विक व्यापार को बंधक बना रहा है। उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका अब बातचीत के मूड में नहीं है और अगर समय सीमा खत्म हुई, तो ईरान को ऐसी सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा जो उसने पहले कभी नहीं देखी होगी। यह सीधी जंग की शुरुआत का संकेत है।
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Trump Deadline Iran: ईरान ने ठुकराया ‘टेम्पररी सीज़फ़ायर’
रॉयटर्स के मुताबिक, ईरान के सीनियर अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे केवल कुछ समय की शांति (टेम्पररी सीज़फ़ायर) के बदले होर्मुज स्ट्रेट को फिर से नहीं खोलेंगे। ईरान का मानना है कि अमेरिका सिर्फ अपना रास्ता साफ करने के लिए कुछ समय का दिखावा कर रहा है और वह ‘परमानेंट सीज़फ़ायर’ (स्थाई शांति) के लिए कभी तैयार नहीं होगा। तेहरान ने साफ कह दिया है कि बिना किसी ठोस और स्थाई समाधान के वह पीछे हटने वाला नहीं है।
होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का अड़ियल रुख
ईरान ने इस बार अपनी रणनीति बदल ली है और वह अमेरिकी धमकियों को “ठेंगा” दिखा रहा है। ईरान के सैन्य कमांडरों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट उनकी सबसे बड़ी ताकत है और इसे खोलकर वे अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करेंगे। ईरान का यह सबसे बड़ा फैसला है क्योंकि वह जानता है कि रास्ता बंद रहने से तेल की किल्लत होगी, जिससे अमेरिका और उसके सहयोगियों पर दबाव बढ़ेगा। वह इस रास्ते को सौदेबाजी के बड़े हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है।
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क्या दुनिया महायुद्ध की ओर बढ़ रही है?
ट्रंप की डेडलाइन और ईरान की नाफरमानी ने पूरी दुनिया को संकट में डाल दिया है। अगर मंगलवार रात तक कोई कूटनीतिक समाधान नहीं निकलता, तो अमेरिकी सेना खाड़ी क्षेत्र में हमला बोल सकती है। जानकारों का कहना है कि यह टकराव केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था को तबाह कर सकता है। तेल की सप्लाई रुकने से भारत समेत कई देशों में महंगाई का तूफान आ सकता है और स्थिति बेकाबू हो सकती है।
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