International
oi-Siddharth Purohit
America Iran Ceasefire: अमेरिका-ईरान के बीच हुआ सीजफायर टूटता दिख रहा है। दरअसल ट्रंप की सभ्यता खत्म कर देने वाली धमकी की डैडलाइन के 2 घंटे पहले दोनों देश समझौते के लिए राजी हो गए। हालांकि इस जंग में एक पार्टी इजरायल भी था लेकिन उसने समझौते के बीच में मैसेंजर का काम कर रहे पाकिस्तान से कोई बात नहीं की। जिसके बाद से ही ये लग रहा था कि समझौता शायद न टिके और अब इजरायली प्रधानमंत्री बेन्जामिन नेतन्याहू ने इसका इशारा भी दे दिया है। दरअसल इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले रोकने के फैसले का स्वागत तो किया, लेकिन साथ ही साफ कह दिया कि यह दो हफ्ते का युद्धविराम लेबनान पर लागू नहीं होगा। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के ऑफिस ने कहा कि लेबनान में इजरायल के सैन्य ऑपरेशन जारी रहेंगे।
इजरायल के हमले जारी
इसके पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दावा किया था कि सीजफायर लेबनान समेत हर जगह लागू होगा। वहीं ईरान ने भी ये शर्त रखी थी कि अगर लेबनान पर हमले होते हैं तो वह भी इजरायल पर दोबारा हमला कर सकता है। अगर ऐसा हुआ तो अमेरिका को सीजफायर तोड़ते हुए इजरायल के साथ जंग में कूदना पड़ेगा और ऐसा हुआ तो सीजफायर खत्म हो जाएगा। इसी बीच खबर आई कि लेबनान की नेशनल न्यूज एजेंसी के मुताबिक इजरायली सेना दक्षिणी इलाकों पर लगातार हमले कर रही है। लेबनान के शरीफा शहर पर बमबारी की गई और आसपास की एक इमारत को खाली करने की चेतावनी भी दी गई। अब इस बात का इंतजार किया जा रहा है कि ईरान, लेबनान पर हुए इन हमलों का कैसे जवाब देता है?

इजरायली हमलों पर क्या बोला लेबनान?
बुधवार को लेबनानी सेना ने नागरिकों को दक्षिणी लेबनान लौटने से मना किया। सेना ने कहा कि मौजूदा हालात और हमलों को देखते हुए लोग अभी अपने गांवों और कस्बों में वापस न जाएं, क्योंकि वे सीधे हमलों की चपेट में आ सकते हैं। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या ईरान और अमेरिका के बीच होने वाली अगली बातचीत में इजरायल-हिजबुल्लाह मुद्दे पर भी चर्चा होगी। लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम का मानना है कि दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह की गतिविधियों के पीछे ईरान का बड़ा रोल है। साथ ही, आने वाले दो हफ्ते लेबनान के लिए बेहद महत्वपूर्ण और सेंसटिव होंगे। इजरायल सुरक्षा की गारंटी चाहता है, लेकिन लेबनान की सरकार फिलहाल ऐसी गारंटी देने की स्थिति में नहीं है क्योंकि हिज्बुल्लाह के लड़ाके उसके कंट्रोल में नहीं रहते। यही वजह है कि यह पूरा मामला अभी भी बहुत नाजुक बना हुआ है।
कैसे लेबनान इस युद्ध में खींचा गया?
लेबनान 2 मार्च को इस युद्ध में शामिल हुआ, जब ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्लाह ने इजरायल पर हमले किए। हिजबुल्लाह ने इसे 28 फरवरी को ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या और 2024 के युद्धविराम के उल्लंघन का बदला बताया था। लेबनानी अधिकारियों के मुताबिक, 2 मार्च से अब तक इजरायली हमलों में 1,500 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और 12 लाख से ज्यादा लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। यह आंकड़े दिखाते हैं कि हालात कितने गंभीर हैं और आम लोगों पर इसका कितना बड़ा असर पड़ा है।
बफर जोन बनाने की तैयारी
इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में जमीनी कार्रवाई भी शुरू कर दी है। इसका मकसद बफर जोन बनाना है, यानी एक ऐसा इलाका जहां इजरायल ज्यादा कंट्रोल रख सके। हालांकि, इस पर हिजबुल्लाह या लेबनान सरकार की तरफ से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। उधर हिजबुल्लाह की रणनीति है कि वह ईरान के साथ मिलकर संभावित शांति वार्ताओं में अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाए। यानी वह सिर्फ सैन्य ही नहीं, बल्कि राजनीतिक स्तर पर भी अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है जो कि इजरायल होने नहीं देना चाहता।
हिज्बुल्लाह बनाम लेबनान की सरकार
हिजबुल्लाह लगातार लेबनान सरकार की आलोचना करता रहा है। उसका कहना है कि 2024 के युद्धविराम में सरकार इजरायल से अपनी शर्तें मनवाने में फेल रही। इजरायल ने न तो अपने सैनिक पीछे हटाए, न कैदियों को छोड़ा और न ही विस्थापित लोगों को वापस आने दिया।
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