अपने पास पड़े कैश को बाजार के डर या कम ब्याज दर के चक्कर में यूं ही बेकार न छोड़ें। शॉर्ट टर्म कैश मैनेजमेंट से पैसे को ऐसी जगह रखें, जहां वह सुरक्षित भी रहे, जरूरत पड़ने पर तुरंत मिल जाए और बचत खाते से बेहतर रिटर्न दे।
देहरादून में रहने वाले मयंक खंडूरी पिछले कुछ दिनों से थोड़े परेशान हैं। दरअसल, तीन साल पहले उन्होंने ऊंची ब्याज दर पर एक बड़ी एफडी कराई थी। पिछले हफ्ते वह एफडी मैच्योर हो गई और मोटा पैसा उनके बचत खाते में आ गया। मयंक को लगा था कि वह दोबारा उसी दर पर एफडी करा लेंगे, लेकिन जब वह बैंक पहुंचे तो पता चला कि ब्याज दरें अब पहले जैसी नहीं रहीं।
मयंक अब इस उलझन में हैं कि इस ‘कैश’ का क्या करें? बाजार में इतनी उथल-पुथल है, तो वहां डर लग रहा है और बैंक बचत खाते का ब्याज महंगाई के मुकाबले नाकाफी है।
मयंक को चिंता है कि यह पैसा अगर सही जगह नहीं रखा गया, तो महंगाई इसकी वैल्यू धीरे-धीरे चट कर जाएगी।
बेकार पड़ा कैश समस्या क्यों है?
लोग कैश को अपने पास इसलिए रखते हैं, क्योंकि वे चाहते हैं कि किसी आपात स्थिति में वे इसे तुरंत निकाल सकें। यह बात समझ में आती है। लेकिन इसके बीच का भी एक रास्ता है। आपको जोखिम भरे शेयर बाजार और सुस्त बचत खाते में से किसी एक को चुनने की जरूरत नहीं है। आप ऐसी जगह ढूंढ सकते हैं, जहां आपका पैसा सुरक्षित रहे, जरूरत पड़ने पर आसानी से मिल जाए और साथ ही बढ़ता भी रहे।
सेविंग अकाउंट का स्मार्ट विकल्प हैं लिक्विड फंड्स
अगर आपको पैसे की जरूरत कभी भी पड़ सकती है, तो सेविंग अकाउंट के बजाय लिक्विड फंड्स बेहतर हैं। इसमें रिस्क बहुत कम है और लिक्विडिटी इतनी शानदार है कि 24 घंटे के भीतर पैसा आपके खाते में आ जाता है। यह बैंक सेविंग अकाउंट से आमतौर पर 2-3% ज्यादा रिटर्न देते हैं।
टैक्स बचाने का ब्रह्मास्त्र आर्बिट्राज फंड्स
जो लोग ऊंचे टैक्स स्लैब (30%) में हैं, उनके लिए एफडी का ब्याज घाटे का सौदा है क्योंकि उस पर पूरा टैक्स लगता है। आर्बिट्राज फंड्स कैश मार्केट और फ्यूचर मार्केट के बीच कीमतों के अंतर से मुनाफा कमाते हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा टैक्स स्ट्रक्चर है। इसे इक्विटी की तरह ट्रीट किया जाता है।
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एफडी और सेविंग का हाइब्रिड मॉडल है स्वीप-इन डिपॉजिट
अगर आपको तकनीकी झंझटों में नहीं पड़ना, तो अपने मौजूदा बैंक खाते में स्वीप-इन सुविधा शुरू कर सकते हैं। इसमें बैंक एक सीमा (जैसे 25,000 रुपये) के ऊपर की रकम को अपने आप एफडी में बदल देता है।
जब आपको पैसे की जरूरत होती है, तो बैंक अपने आप उस एफडी को बिना किसी पेनल्टी के तोड़कर आपके खाते में पैसा डाल देता है। यानी सुरक्षा सेविंग अकाउंट वाली और ब्याज एफडी वाला।
ट्रेजरी बिल…सरकार को दीजिए उधार
सुरक्षा के मामले में इससे ऊपर कुछ नहीं है। ट्रेजरी बिल भारत सरकार की ओर से जारी किए जाते हैं। ये 91 दिन, 182 दिन और 364 दिन की अवधि के लिए होते हैं। चूंकि इसे रिजर्व बैंक प्रबंधित करता है, इसलिए पैसा डूबने का खतरा शून्य है। अब रिटेल डायरेक्ट पोर्टल के जरिए आम लोग भी सीधे सरकार के इन बिलों में निवेश कर सकते हैं।
छोटी अवधि में निवेश के लिए 5 सूत्रीय फॉर्मूला
| विकल्प | जोखिम | लिक्विडिटी | अनुमानित रिटर्न | टैक्स का हाल |
|---|---|---|---|---|
| सेविंग अकाउंट | बहुत कम | सबसे ज्यादा | 3–4% | टैक्स स्लैब के अनुसार |
| स्वीप-इन एफडी | बहुत कम | बहुत अच्छी | 6–7% | टैक्स स्लैब के अनुसार |
| लिक्विड फंड | कम | बहुत अच्छी | 6.5–7.5% | टैक्स स्लैब के अनुसार |
| आर्बिट्राज फंड | कम | अच्छी | 7–8% | शेयर जैसा टैक्स (कम) |
| ट्रेजरी बिल | शून्य | औसत | 6.5–7% | टैक्स स्लैब के अनुसार |
पैसे से पैसा बनाना सीखें
बाजार के डर को अपनी वित्तीय स्थिति को स्थिर (फ्रीज) न करने दें। लिक्विड या आर्बिट्राज फंड जैसे टूल का उपयोग करने से आपका पैसा आपात स्थिति के लिए तैयार रहता है और फिर भी बढ़ता रहता है। केवल कागज के अपने कैश को ढेर के रूप में सोचना बंद करें। इसे एक ऐसे औजार के रूप में देखें, जिसे अपनी कमाई खुद करनी चाहिए।
– अंकुश पाहूजा
मैनेजिंग पार्टनर कंप्लीट सर्कल
अपनाएं सुरक्षा पहले वाला नियम
अपना कैश कहीं और शिफ्ट करने से पहले खुद से पूछें:
■ मुझे इसकी जरूरत कब है? (मैं कितनी जल्दी इसे वापस पा सकता हूं?)
■ मेरा टैक्स ब्रैकेट क्या है? (यह आपको आर्बिट्राज या लिक्विड फंड के बीच चयन करने में मदद करता है।)
■ क्या यह मेरे बचत खाते से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है? (यदि नहीं, तो इसे क्यों शिफ्ट करें?).
सलाह
अपने पूरे पैसे को एक ही जगह (जैसे सिर्फ बचत खाता) में छोड़ देना वित्तीय आत्महत्या है। आपको चाहिए कि अपने पैसे को तीन हिस्सों में बांटें
■ इमरजेंसी फंड: स्वीप-इन एफडी या लिक्विड फंड में।
■ टैक्स प्लानिंग: आर्बिट्राज फंड में।
■ अगले साल की जरूरत: ट्रेजरी बिल या मनी मार्केट फंड में।



