राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भारत की नेतृत्व क्षमता और आर्थिक क्षेत्र में अवसरों पर मंथन हुआ। शहीद सुखदेव कॉलेज से पढ़ाई कर चुके पूर्व छात्रों (अल्युमनाई) के संघ- स्कोब्सा (SCOBSA) ने एक कॉन्क्लेव के दौरान ‘भारत मीन्स बिजनेस’ विषय पर भारत के आर्थिक नेतृत्व के लेकर विस्तार से चर्चा की। स्कोब्सा कॉन्क्लेव 2026 में पूर्व छात्र, नीति निर्माता, और औद्योगिक क्षेत्र के दिग्गजों ने तेजी से बढ़ती भारत की अर्थव्यवस्था में क्षेत्रीय व्यवधानों पर बात की।
आधुनिक पेशेवर जीवन के विशेष पहलुओं पर भी चर्चा
सम्मेलन में आधुनिक पेशेवर जीवन के विशेष पहलुओं पर भी भी चर्चा हुई। कॉन्क्लेव के दौरान भारत की नवाचार क्षमता और उपभोक्ता बाजार के रूप में देश की ताकत के बारे में भी विस्तार से बातें हुईं। तकनीक के दौर में डिजिटल होती जा रही दुनिया और भारत के पास बुनियादी ढांचे की विशाल क्षमता के बारे में भी बताया गया।
स्कोब्सा कॉन्क्लेव 2026 की झलकियां:
- स्कोब्सा अध्यक्ष नीति माकर ने मेहमानों और उद्योग जगत की हस्तियों / प्रतिनिधियों का स्वागत किया।
- यूनियन बैंक ऑफ इंडिया बना टाइटल स्पॉन्सर।
- लाइट्सस्पीड इंडिया के विवेक गंभीर ने बदलाव के दौर में नेतृत्व की अहमियत बताई।
- कॉन्क्लेव में लॉरियल इंडिया के असीम कौशिक और पब्लिकिस सैपिएंट के संजय मेनन भी शामिल हुए।
- पूंजी बाजारों के उदय के बीच युवा बिजनेस लीडर्स की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया।
- द कन्वर्जेंस फाउंडेशन के आशीष धवन ने संस्थाओं के निर्माण पर जोर दिया।
- दैनिक जीवन में वेलनेस को समाहित करने की अहमियत पर द चैप्टर, इस्प्रवा रियल्टी की दर्शिनी थानावाला ने अपनी राय साझा की।
- व्यावहारिक अंतर्दृष्टि जैसे अहम विषय पर चर्चा में कैप्टन प्रवीण दहिया और इनक्वेस्ट टीम ने अपने विचार रखे।
- एसएससीबीएस की प्रिंसिपल प्रोफेसर पूनम वर्मा ने संस्थागत संबोधन दिया।
- कार्यक्रम 18 अप्रैल, 2026 को दिल्ली के कापसहेड़ा में वेलकमहोटल बाय आईटीसी में संपन्न हुआ।
स्कोब्सा नेटवर्क अहम ताकत
कॉन्क्लेव में मौजूद हस्तियों ने भारत के विनिर्माण यानी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्र को भी वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए महत्वपूर्ण बताया। उद्योग जगत की एक प्रमुख हस्ती- असीम कौशिक ने कहा कि शहीद सुखदेव कॉलेज के पूर्व छात्रों की भूमिका भी सराहनीय है। ऐसी चर्चाओं के लिए स्कोब्सा नेटवर्क अहम ताकत है। तेजी से बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य के कारण सामने आ रही वित्तीय अनिश्चितताओं पर भी विस्तार से बातें हुईं।