दुनिया की सबसे मूल्यवान तकनीकी कंपनियों में शुमार एपल में एक बड़े रणनीतिक बदलाव की तैयारी पूरी हो चुकी है। दिग्गज तकनीकी कंपनी को अपना नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) मिल गया है। कंपनी ने बताया है कि वर्तमान सीईओ टिम कुक जल्द ही अपने पद से इस्तीफा देंगे, हालांकि वह कंपनी में एक सीमित भूमिका में बने रहेंगे। उनकी जगह एपल के हार्डवेयर इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख रहे जॉन टर्नस 1 सितंबर 2026 से कंपनी की कमान संभालेंगे।
जॉन टर्नस: प्रोफाइल और बैकग्राउंड
50 वर्षीय जॉन टर्नस पिछले तीन दशकों में एपल के ऐसे पहले सीईओ होंगे जिनका मुख्य बैकग्राउंड हार्डवेयर से जुड़ा है।
- शुरुआती सफर: पेंसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट टर्नस ने अपने करियर की शुरुआत एक वर्चुअल रियलिटी स्टार्टअप के साथ की थी।
- एपल में सफर: उन्होंने साल 2001 में एपल जॉइन किया था। कंपनी में उन्होंने सबसे पहले मैक की स्क्रीन पर काम करने से शुरुआत की और अपनी काबिलियत के दम पर धीरे-धीरे पूरे हार्डवेयर विभाग के प्रमुख बन गए।
प्रमुख उपलब्धियां और कार्यशैली
एक बड़े कॉर्पोरेट ढांचे में टर्नस का नेतृत्व और कार्यशैली उन्हें इस शीर्ष पद का प्रबल दावेदार बनाते हैं।
- इनोवेशन: टर्नस ने हाल के वर्षों में कंपनी के कई बड़े बदलावों का सफल नेतृत्व किया है। इसमें 2020 में इंटेल चिप्स को हटाकर एपल की अपनी खुद की चिप्स का इस्तेमाल करना और ‘आईफोन एयर’ का विकास शामिल है।
- टिम कुक जैसी कार्यशैली: एपल के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, टर्नस का काम करने का तरीका स्टीव जॉब्स के ‘विजनरी’ और जोखिम भरे अंदाज के बजाय टिम कुक के ‘स्थिर और प्रबंधकीय’ दृष्टिकोण से ज्यादा मेल खाता है।
- मुनाफे पर पैनी नजर: टर्नस कंपनी के मुनाफे (बॉटम लाइन) को सुरक्षित रखने के लिए जाने जाते हैं। उदाहरण के लिए, जब आईफोन में महंगे लेजर कैमरा कंपोनेंट को जोड़ने की बात आई, तो टर्नस ने इसे केवल महंगे ‘प्रो’ मॉडल्स तक सीमित रखने का सुझाव दिया, ताकि केवल वफादार ग्राहक ही इसका भुगतान करें और कंपनी का मुनाफा प्रभावित न हो।
- सहयोगी नेता: टर्नस को ‘मैन ऑफ द पीपल’ भी कहा जाता है। प्रमोशन मिलने के बाद भी उन्होंने अपने लिए अलग केबिन लेने से इनकार कर दिया और टीम के साथ ओपन ऑफिस में बैठना पसंद किया, जिससे वह एक जमीन से जुड़े सहयोगी नेता के रूप में उभरे हैं।
भविष्य की चुनौतियां: आर्थिक और भू-राजनीतिक मोर्चे
नए सीईओ के रूप में टर्नस की राह आसान नहीं होगी। आलोचकों और पूर्व कर्मचारियों का मानना है कि वे उत्पादों में नवाचार करने के बजाय उन्हें बनाए रखने में ज्यादा माहिर हैं और उन्होंने अभी तक कोई “कठिन निर्णय” नहीं लिया है। बतौर सीईओ, उन्हें दो बड़ी व्यापारिक चुनौतियों का सामना करना होगा:
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की रेस: जहां दुनिया भर की अन्य टेक कंपनियां एआई पर अरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं, वहीं एपल इस रेस में अभी पीछे चल रहा है।
- भू-राजनीतिक तनाव: अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बदलती टैरिफ नीतियां और विनिर्माण के लिए चीन पर अत्यधिक निर्भरता को प्रबंधित करना उनके लिए एक बड़ी परीक्षा होगी।
रिपोर्ट्स के अनुसार, टिम कुक ने करीब सालभर पहले ही पद छोड़ने के संकेत दे दिए थे। अब कुक सीईओ पद छोड़ते हैं, तो उनके बोर्ड चेयरमैन बनने की प्रबल संभावना है। 50 वर्ष की उम्र में कमान संभालने जा रहे टर्नस बिल्कुल उसी उम्र के हैं जिस उम्र में टिम कुक ने 2011 में एपल की कमान संभाली थी। हालांकि इस पद की दौड़ में क्रेग फेडरिघी और डिएड्र ओ’ब्रायन जैसे अन्य नाम भी शामिल थे, लेकिन फिलहाल टर्नस एपल के अगले ‘बॉस’ बनने जा रहे हैं।



