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जेल से वसूली, विदेश से हुक्म: बिश्नोई-जठेड़ी समेत 20 पर मकोका के आरोप तय, ग्लोबल सिंडिकेट पर कोर्ट का प्रहार


दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने देश के सबसे खूंखार गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई, संदीप उर्फ काला जठेड़ी और उनके गिरोह के 18 अन्य सदस्यों के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (MCOCA) के तहत आरोप तय कर दिए हैं. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल (NDR रेंज) द्वारा की गई गहन जांच के बाद कोर्ट ने इन आरोपियों पर मकोका की धारा 3 और 4 के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी दी है.

जेल की सलाखों के पीछे से वसूली का साम्राज्य
जांच में यह बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि लॉरेंस बिश्नोई और उसके साथी जेल के अंदर से ही अपना आपराधिक सिंडिकेट चला रहे थे. यह गिरोह न केवल दिल्ली-एनसीआर, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों में व्यापारियों और रसूखदार लोगों से रंगदारी वसूलने का काम कर रहा था. वसूली से मिलने वाली भारी रकम का इस्तेमाल आधुनिक हथियार और गोला-बारूद खरीदने के साथ-साथ गिरोह की अन्य गतिविधियों को वित्तपोषित करने के लिए किया जाता था.

विदेशी धरती पर फैला गैंग का जाल
दिल्ली पुलिस की जांच के अनुसार, इस सिंडिकेट का विस्तार केवल भारत तक ही सीमित नहीं है. गिरोह के कई सक्रिय सदस्य फर्जी पासपोर्ट बनवाकर थाईलैंड, अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में भाग चुके हैं और वहीं से गैंग के ऑपरेशंस को संभाल रहे हैं. यह सिंडिकेट लूट, डकैती, जबरन वसूली और हत्या जैसे गंभीर अपराधों में संलिप्त रहा है. कोर्ट द्वारा आरोप तय किए जाने के बाद अब इन गैंगस्टर के लिए कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं, क्योंकि मकोका के तहत जमानत मिलना बेहद मुश्किल होता है.

मुख्य प्‍वाइंट्स
· मकोका के तहत कार्रवाई: पटियाला हाउस कोर्ट ने लॉरेंस बिश्नोई, काला जठेड़ी और 18 अन्य पर मकोका की धारा 3 और 4 के तहत आरोप तय किए.

· जेल से संचालन: गिरोह तिहाड़ और अन्य जेलों के भीतर से व्यापारियों से रंगदारी वसूलने का काम कर रहा था.

· विदेशी कनेक्शन: सिंडिकेट के गुर्गे थाईलैंड, अमेरिका और कनाडा से ऑपरेट कर रहे हैं.

· हथियारों की फंडिंग: वसूली गई रकम का बड़ा हिस्सा विदेशी हथियारों की खरीद और गैंग के विस्तार में लगाया जाता था.

· स्पेशल सेल की जांच: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल (NDR रेंज) ने इस सिंडिकेट के आर्थिक और आपराधिक ढांचे का पर्दाफाश किया.

विश्लेषण
लॉरेंस बिश्नोई और काला जठेड़ी पर मकोका के तहत आरोप तय होना दिल्ली पुलिस के लिए एक बड़ी जीत है. मकोका (MCOCA) जैसा सख्त कानून संगठित अपराधों को जड़ से खत्म करने के लिए बनाया गया है, जिसमें आरोपियों के खिलाफ जुटाए गए सबूतों की कानूनी अहमियत सामान्य कानूनों से अधिक होती है. कोर्ट का यह फैसला बताता है कि अब इस सिंडिकेट के लिए जेल से अपनी मर्जी चलाना आसान नहीं होगा. विशेष रूप से गिरोह का ग्लोबल कनेक्शन (कनाडा, अमेरिका) सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है. मकोका के तहत आरोप तय होने से अब इनके वित्तीय लेनदेन और फर्जी पासपोर्ट के जरिए विदेश भागने वाले नेटवर्क पर शिकंजा कसना आसान होगा.

सवाल-जवाब
कोर्ट ने लॉरेंस बिश्नोई और काला जठेड़ी पर किन धाराओं में आरोप तय किए हैं?

पटियाला हाउस कोर्ट ने इन गैंगस्टर और उनके गिरोह के अन्य सदस्यों पर मकोका (MCOCA) की धारा 3 और 4 के तहत आरोप तय किए हैं.

जांच के दौरान गिरोह के कामकाज के बारे में क्या जानकारी मिली?

जांच में सामने आया कि गिरोह जेल से संचालित हो रहा था और वसूली के पैसों का उपयोग हथियार खरीदने तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेटवर्क चलाने के लिए किया जा रहा था.

इस सिंडिकेट के सदस्य विदेश में किन देशों से सक्रिय हैं?

गिरोह के कई सदस्य फर्जी पासपोर्ट का उपयोग कर थाईलैंड, अमेरिका और कनाडा भाग गए हैं, जहाँ से वे गैंग की गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं.

मकोका (MCOCA) लगने से आरोपियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

मकोका के तहत आरोप तय होने का मतलब है कि यह एक संगठित अपराध साबित हो रहा है, जिसमें जमानत मिलना अत्यंत कठिन है और सजा का प्रावधान भी काफी कड़ा है.



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