Homeव्यवसायअमेरिका-ईरान युद्ध का असर: खरीफ फसलों और खाद की सप्लाई पर मंडराया...

अमेरिका-ईरान युद्ध का असर: खरीफ फसलों और खाद की सप्लाई पर मंडराया संकट, FAO अर्थशास्त्री ने दी चेतावनी


संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) के मुख्य अर्थशास्त्री मैक्सिमो टोरेरो ने भारत को लेकर बड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि खरीफ की फसल की बुवाई से पहले भारत में खाद्य महंगाई का खतरा बढ़ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव ने खाद की सप्लाई को प्रभावित किया है।

भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खाद पर 18.6 अरब डॉलर की सब्सिडी दी है। इसके बावजूद खाद की उपलब्धता कम होने का डर है। भारत अपनी जरूरत की लगभग 35 प्रतिशत खाद खाड़ी देशों से मंगवाता है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट आने से यह सप्लाई रुक गई है।

एएनआई से बात करते हुए, मैक्सिमो टोरेरो ने बताया कि अगर यह संकट जारी रहा, तो भारत को आयात के लिए ज्यादा पैसे देने होंगे। इससे गेहूं, चावल और सब्जियों की कीमतों पर दबाव बढ़ेगा। भारत के घरेलू खाद कारखाने भी अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहे हैं। गैस की कमी की वजह से ये कारखाने केवल 60 प्रतिशत क्षमता पर चल रहे हैं। पंजाब में नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड के प्लांट शुरू तो हुए हैं, लेकिन उनके सामने कई मुश्किलें हैं।

ये भी पढ़ें: Bengal Polls: ‘बंगाल में अपना खाता भी नहीं खोल पाएगी कांग्रेस’, चुनावी रैली में राहुल पर जमकर बरसे अमित शाह

भारत में मई से खरीफ फसलों की बुवाई शुरू होती है। साल 2026 में मानसून के सामान्य से कम रहने की 60 प्रतिशत संभावना है। अगर खाद के व्यापार में रुकावट 60 दिनों से ज्यादा रहती है, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। खाद महंगी होने से किसान इसका इस्तेमाल कम करेंगे, जिससे पैदावार घट जाएगी। इसका सबसे ज्यादा असर चावल, मक्का और गेहूं जैसी फसलों पर पड़ेगा।

वैश्विक स्तर पर खाद की कीमतें पहले ही 50 से 80 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं। हॉर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का 30 प्रतिशत खाद और 25 प्रतिशत तेल का व्यापार होता है। वहां तनाव की वजह से जहाजों का बीमा बहुत महंगा हो गया है। टैंकरों की आवाजाही 90 से 95 प्रतिशत तक गिर गई है।

एफएओ के अनुसार, इस संकट से दुनिया भर के किसानों की आय पांच प्रतिशत तक कम हो सकती है। ईंधन महंगा होने से सिंचाई और ढुलाई का खर्च भी बढ़ेगा। अगर यह स्थिति लंबे समय तक रही, तो दुनिया की आर्थिक विकास दर 1.7 प्रतिशत तक गिर सकती है। इससे महंगाई बढ़ेगी और विकास की रफ्तार धीमी हो जाएगी। भारत के साथ-साथ बांग्लादेश, श्रीलंका और केन्या जैसे देशों पर भी इसका गहरा असर पड़ेगा।

अन्य वीडियो-




Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments