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AAP की टूट से BJP को पंजाब में क्या फायदा: चड्‌ढा केजरीवाल के खिलाफ नैरेटिव सेट करेंगे, पाठक स्ट्रैटजी बनाएंगे; जानें ‘कैप्टन’ कौन होगा – Ludhiana News


पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ही आम आदमी पार्टी (AAP) में टूट हो गई। पंजाब के 6 सांसदों ने अचानक पार्टी छोड़ दी। इनमें से 3 राघव चड्‌ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक ने भाजपा जॉइन कर ली। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि पंजाब में AAP के MLA भी ट

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वहीं एक तरफ सत्ताधारी पार्टी की टूट और फिर भाजपा में जाना। बड़ा सवाल ये है कि AAP की फूट का पंजाब में BJP को कितना बैनिफिट मिलने वाला है। खासकर, राघव चड्‌ढा और संदीप पाठक जैसे चेहरे, जिनकी बदौलत AAP ने 2022 में ‘बदलाव’ का माहौल बनाकर 117 में से रिकॉर्ड 92 सीटें जीत लीं थी। वहीं अशोक मित्तल भले ही सियासी तौर पर नए हों, लेकिन एजुकेशन और कारोबारी सेक्टर में वह पंजाब के जाने-माने नाम हैं।

सांसदों की टूट के बाद AAP के नुकसान से BJP को क्या फायदा मिलेगा?, इसके लिए दैनिक भास्कर ने 3 पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रोफेसर डॉ. कृष्ण कुमार रत्तू, इंजीनियर पवनदीप शर्मा और सीनियर जर्नलिस्ट प्रमोद बातिश से बात की। इस बातचीत से क्या निचोड़ निकला, ये जानने के लिए पूरी रिपोर्ट पढ़ें….

भास्कर पैनल के 3 पॉलिटिकल एक्सपर्ट

राघव चड्‌ढा से AAP की अंदरूनी बातें बाहर आएंगी

साल 2022 में AAP की सरकार बनने के बाद राघव चड्‌ढा पंजाब में पार्टी के सबसे ताकतवर चेहरा बनकर रहे। टिकट बंटवारा व कैंपेन ही नहीं बल्कि मंत्रिमंडल से लेकर सरकार चलाने तक में उनकी प्रभावी भूमिका रही। इस दौरान किस AAP नेता ने क्या किया, सरकार में दिल्ली का कितना दखल रहता है, AAP ने फंड वगैरह कैसे जुटाए, ये तमाम बातें बाहर आईं तो सीधे तौर पर AAP को नुकसान पहुंचाएंगी।

वहीं कई बड़े नेता एक्सपोज हुए तो इससे पंजाबियों में AAP के खिलाफ नैरेटिव बनेगा। पंजाबी कभी भी बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं करते हैं। चड्‌ढा के जरिए AAP की नेगेटिव ब्रॉन्डिंग करवाकर भाजपा खुद को मजबूत करने की कोशिश करेगी। चड्‌ढा की कही बातों का भरोसा भी ज्यादा होगा क्योंकि वह सरकार के शुरूआती 2 साल पंजाब में पार्टी और सरकार के सेंटरपॉइंट रह चुके हैं। AAP को उनकी बातों को झुठलाने के लिए बहुत मशक्कत करनी पड़ेगी।

संदीप पाठक के जरिए 2022 जैसी स्ट्रैटजी का फायदा

संदीप पाठक का अचानक पार्टी छोड़ना और भाजपा में जाना AAP के लिए सबसे बड़ा झटका है। इसकी बड़ी वजह उनका पॉलिटिकल स्ट्रेटेजिस्ट होना है। 2022 में बैकएंड यानी पर्दे के पीछे से उनकी बनाई स्ट्रैटजी AAP के लिए कामयाब रही। टिकट बंटवारे से लेकर कैंपेन डिजाइन और फिर दिल्ली व पंजाब के नेताओं के बीच कोऑर्डिनेशन के साथ 92 विधायकों को संभालने में उनका बड़ा रोल रहा। उनके जाने से AAP के लिए सीधे तौर पर रणनीतिक वैक्यूम क्रिएट हो गया है।

वहीं 2022 में जैसी हालत AAP की पंजाब में थी, वैसी ही BJP की अकाली दल से गठबंधन के टाइम से है। भाजपा कुछेक सीटें जीतती जरूर है लेकिन कभी प्रभावी रोल में नहीं आ सकी। 2027 में पहली बार भाजपा फुल फ्लैश सरकार बनाने के हिसाब से वर्किंग कर रही है। 2022 में जब AAP को रिकॉर्डतोड़ जीत मिली तो इसने सबको हैरान कर दिया। तब ऐसा माहौल था कि कांग्रेस तत्कालीन सीएम चरणजीत चन्नी के जरिए सरकार रिपीट कर सकती है।

ऐसी ही स्थिति CM भगवंत मान के नाम पर अब AAP भी मानकर चल रही है। मगर, संदीप पाठक के जरिए भाजपा फिर से उसी तरह की रणनीति बनाकर चुनावी में चौंका सकती है। इसके अलावा उनके विधायकों से रिश्तों का फायदा तो मिलेगा ही, जिसमें AAP से टिकट कटने पर भाजपा उन्हें उम्मीदवार बनाने में देरी नहीं करेगी।

AAP को जिनसे फाइनेंशियल डेंट, BJP को उनका फायदा

चुनाव लड़ने के लिए संगठन के साथ फंड भी बहुत जरूरी है। ताबड़तोड़ रैलियां, वर्करों-प्रचारकों के लिए इंतजाम के लिए पैसा चाहिए। शायद यही सोचकर AAP ने लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के संस्थापक अशोक मित्तल, ट्राइडेंट ग्रुप के चेयरमैन राजिंदर गुप्ता और सन ग्रुप के मालिक विक्रमजीत साहनी को अपने साथ जोड़ा। कोई पॉलिटिकल बैकग्राउंड न होने के बाद भी उन्हें सीधे राज्यसभा में भेज दिया।

हालांकि AAP ने 2027 की जिस सोच के साथ इन्हें बैठे-बैठाए राज्यसभा सांसद बनाया, वह चुनाव से पहले ही गच्चा दे गई। AAP को उम्मीद थी कि 2027 के चुनाव में तीनों से उन्हें चुनाव लड़ने के लिए फाइनेंशियल सपोर्ट मिलेगा लेकिन इस पर पानी फिर गया। इसके साथ ही पिछले चुनाव में फाइनेंशियल प्लानिंग करने वाले राघव चड्‌ढा भी भाजपा में ही जा चुके हैं। ऐसे में चुनाव से ऐन पहले AAP को चुनावी जंग के लिए फाइनेंशियल सपोर्ट के लिए भी जूझना होगा।

लीडरशिप के लिहाज से BJP में काफी स्पेस है। भाजपा ये नैरेटिव बनाएगी कि AAP में गलत काम हो रहा। राघव चड्‌ढा ने भी पार्टी छोड़ते हूुए साफ कहा कि वहां गलत काम हो रहे थे, जिसमें वह भागीदार नहीं बन सकते। इससे पहले कुमार विश्वास जैसे नेताओं ने भी यही आरोप लगाए थे। चुनाव के ठीक पहले BJP आप में इंटरनल कॉन्ट्रोवर्सी को और बढ़ाएगी ताकि AAP खुद को संभालने में इतनी मजबूर हो जाए कि चुनावी ग्राउंड में मुकाबले में कमजोर पड़ सके।

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BJP की पंजाब को लेकर क्या चुनावी तैयारी है?

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन कह चुके हैं कि अकेले चुनाव लड़ेंगे। इस बारे में पॉलिटिकल एक्सपर्ट पूर्व डिप्टी डायरेक्टर प्रो. कृष्ण कुमार रत्तू कहते हैं- BJP बहुत एग्रेसिव ढंग से 2027 में पंजाब चुनाव पर वर्किंग कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी डेरा सचखंड बल्लां आ चुके। डेरा ब्यास वालों से भी कई मंत्री मिल चुके। दूसरे डेरों से भी भाजपा की नजदीकियां जगजाहिर हैं। ऐसे में उनकी पूरी प्लानिंग तैयार है।

सीनियर जर्नलिस्ट प्रमोद बातिश कहते हैं – भाजपा को 117 सीटों पर चुनाव लड़ना है और उसके लिए उन्हें विनिंग कैंडिडेट चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा की पकड़ कमजोर है। इसीलिए नेताओं को जॉइन कराया जा रहा है। चुनाव और नजदीक आने दीजिए, अभी AAP ही नहीं बल्कि कांग्रेस और अकाली दल से भी नेता टूटकर भाजपा में जाते नजर आएंगे।

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पंजाब के 2022 के विधानसभा चुनाव में BJP को 6% ही वोट मिले। 2 साल बाद 2024 में लोकसभा चुनाव हुए तो 19% वोट मिले। इस बार यहां चार कोणीय मुकाबला बन रहा है। ऐसे में भाजपा अगर 10% वोट बढ़ा ले गई तो फिर वह जरूर चौंका सकती है।

किसान आंदोलन के वक्त सिखों के एक वर्ग में BJP के प्रति निगेटिव सोच बनी, मगर अब ये बदल रही है। भाजपा ने कई सिख चेहरे आगे किए। पंजाब में बड़े नेताओं की स्टेज पर भी सिख चेहरे ज्यादा प्रमुखता से दिखते हैं। डिबेट में भी सिख चेहरे जोरदार ढंग से भाजपा का पक्ष रखते हैं। ये सब भाजपा की चुनावी तैयारियों का हिस्सा ही है।

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BJP की तैयारी पूरी, लेकिन कैप्टन कौन होगा? इस सवाल पर सीनियर जर्नलिस्ट प्रमोद बातिश कहते हैं- कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब के सबसे कद्दावर नेता हैं, लेकिन उम्र और स्वास्थ्य की वजह से वे अब उतने सक्रिय नहीं हैं। भाजपा उन्हें एक ‘मार्गदर्शक’ के रूप में इस्तेमाल करेगी। बिट्टू इस वक्त भाजपा के सबसे ‘हॉट फेवरेट’ सिख चेहरे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते होने के नाते उनके पास एक विरासत है। वे युवा हैं, आक्रामक हैं। इसी वजह से लोकसभा चुनाव हारने के बावजूद उन्हें केंद्र में मंत्री बनाया। भाजपा उन पर दांव खेल सकती है।

बातिश आगे कहते हैं- चर्चा नवजोत सिद्धू की वापसी की भी है। उनकी पत्नी डॉ. नवजोत कौर भी कह चुकी हैं कि हमारी नाराजगी अकाली दल को लेकर थी। भाजपा ने हाल ही में अमृतसर लोकसभा सीट से पिछली बार चुनाव लड़ने वाले तरनजीत संधू को दिल्ली का नया LG बना दिया। फिलहाल ये सीट भाजपा में लोकसभा कैंडिडेट के लिहाज से खाली है। सिद्धू ने इसी सीट से अरुण जेटली को टिकट देने पर नाराजगी जताकर भाजपा छोड़ी थी। यह एक सीक्वेंस बनता दिख रहा है। सिद्धू भीड़ खींचने वाले नेता तो बनेंगे, लेकिन उनका अनिश्चित स्वभाव पार्टी कैडर के लिए जरूर परेशानी वाला हो सकता है।

बातिश के मुताबिक भाजपा का कोर वोट बैंक हिंदू है। सुनील जाखड़ जैसे नेता इस वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन पंजाब में ‘सिख मुख्यमंत्री’ की परंपरा को देखते हुए पार्टी किसी हिंदू चेहरे को आगे करने से बच सकती है, या फिर ‘डिप्टी सीएम’ का फॉर्मूला अपना सकती है।

RSS की तरफ से BJP को क्या मदद मिल रही? RSS पंजाब में शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों के जरिए समाज के अलग-अलग वर्गों के साथ गोष्ठियां कर रहा है। लोगों को पंच परिवर्तन के जरिए राष्ट्र निर्माण की बात करते हुए मोदी सरकार के कुछ बड़े फैसलों का जिक्र भी कर रहें। भाजपा ने ग्रामीण क्षेत्रों में भी अपनी गतिविधियां शुरू कर दी हैं। आरएसएस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अक्टूबर महीने से आरएसएस पंजाब में स्वयंसेवकों को जोड़ने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू करने जा रहा है।

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पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले AAP के 7 सांसदों ने पार्टी छोड़ दी। इनमें 6 सांसद पंजाब के हैं। AAP के इलेक्शन स्ट्रेटजी के चाणक्य डॉ. संदीप पाठक और सुपर CM कहे जाने वाले राघव चड्‌ढा तो कल ही BJP में भी शामिल हो गए। इनका BJP में जाना इसलिए ज्यादा चर्चा में है क्योंकि 2022 में AAP को पंजाब की 117 में से 92 सीटें जिताने वाली टीम में ये सबसे अहम जोड़ी थी। (पढ़ें पूरी खबर)

——– राघव चड्‌ढा विवाद- इससे पहले 35 नेता AAP छोड़ चुके:सबसे ज्यादा 20 पंजाब के, इनमें सांसद-MLA भी; कुमार विश्वास का न इस्तीफा, न निकाला

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राज्यसभा सांसद राघव चड्‌ढा आम आदमी पार्टी (AAP) को छोड़ने वाले पहले नेता नहीं हैं। AAP की स्थापना से लेकर अब तक 35 बड़े नेता इस पार्टी से किनारा कर चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा 20 नेता पंजाब से ताल्लुक रखते हैं। AAP छोड़ने वाले प्रमुख चेहरों में कुमार विश्वास, योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण शामिल हैं। पूरी खबर पढ़ें…



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