भारत चीन को निर्यात बढ़ाने और आयात निर्भरता कम करने के लिए एक विविध रणनीति अपना रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि घरेलू क्षमताओं को मजबूत किया जा रहा है। आपूर्तिकर्ता आधार का विविधीकरण भी किया जा रहा है। अधिकारी के अनुसार, चीन से पूरी तरह से अलग होना मुश्किल है। चीनी इनपुट भारत के औद्योगिक विकास का आधार हैं।
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भारत मुख्य रूप से कच्चा माल, मध्यवर्ती और पूंजीगत वस्तुएं आयात करता है। इनमें ऑटो पार्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक पुर्जे और मोबाइल फोन घटक शामिल हैं। मशीनरी और सक्रिय दवा सामग्री भी आयात की जाती है। इनका उपयोग तैयार माल के उत्पादन और घरेलू विनिर्माण में होता है। 2025-26 में भारत का चीन को निर्यात 37 फीसदी बढ़कर 19.47 अरब डॉलर हो गया। यह 2024-25 में 14.25 अरब डॉलर था। चीन से आयात 16 फीसदी बढ़कर 131.63 अरब डॉलर हो गया। व्यापार घाटा 2025-26 में 112.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
निर्यात और आयात में वृद्धि
पिछले वित्तीय वर्ष में प्रिंटेड सर्किट बोर्ड और बिजली के उपकरणों के निर्यात में वृद्धि हुई। टेलीफोन सिस्टम, झींगा और एल्यूमीनियम सिल्लियां भी प्रमुख निर्यात वस्तुएं थीं। हालांकि, चीन के आयात में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए निर्यात बास्केट को व्यापक करना आवश्यक है। इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल मशीनरी और फार्मास्यूटिकल्स सामग्री के आयात में वृद्धि हुई है। ऑटो पार्ट्स, दूरसंचार उपकरण और औद्योगिक मशीनरी का आयात भी बढ़ा है।
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सरकार के प्रयास और भविष्य की रणनीति
सरकार घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए कई उपाय कर रही है। उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन योजना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह योजना घरेलू कारोबारों को मूल्य श्रृंखला बनाने में मदद कर रही है। चीन पर आयात निर्भरता कम करने के लिए चीन-गहन वस्तुओं की पहचान की जा रही है। एक अंतर-मंत्रालयी समिति निर्यात और आयात की नियमित निगरानी करती है।



