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तकनीक में निवेश की आंधी: भारत में AI और डेटा आधुनिकीकरण दुनिया से अधिक? लेकिन क्या मिल रहा है सही रिटर्न?


भारतीय कॉरपोरेट जगत इस समय डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के एक बेहद आक्रामक दौर से गुजर रहा है, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा आधुनिकीकरण ने निवेश की पूरी दिशा बदल दी है। बैन एंड कंपनी की द इंडिया एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी रिपोर्ट 2026 के अनुसार, भारतीय उद्यम अपने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने के लिए तेजी से निवेश कर रहे हैं, जो ग्लोबल एवरेज से काफी आगे निकल चुका है। हालांकि, इस भारी-भरकम खर्च के बावजूद कंपनियों को इसे ठोस बिजनेस प्रॉफिट में बदलने के लिए कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। 

ग्लोबल ग्रोथ से आगे निकली भारतीय टेक स्पेंडिंग

भारतीय उद्यमों में तकनीकी निवेश का एक मजबूत चक्र चल रहा है। रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि 2026 में भारत में कुल आईटी स्पेंडिंग छह से आठ प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है, जो वैश्विक स्तर पर अनुमानित 4 से 6 प्रतिशत की ग्रोथ को पीछे छोड़ देगा। दिलचस्प बात यह है कि भारतीय कंपनियां अपने टेक बजट का एक बड़ा हिस्सा लंबी अवधि की क्षमता निर्माण पर खर्च कर रही हैं। भारत में टेक बजट का 50-60 प्रतिशत हिस्सा पूंजीगत व्यय के रूप में आवंटित किया जा रहा है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा महज 20-30 प्रतिशत ही है। 

एआई और डेटा बने निवेश के सबसे बड़े ड्राइवर

बदलाव से जुड़ी पहलों के लिए 2026 के टेक बजट का लगभग 40 प्रतिशत आवंटित किए जाने की उम्मीद है। इस बदलाव वाले बजट का 40-45 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह से एआई और डेटा-आधारित ट्रांसफॉर्मेशन पर केंद्रित होगा। 


  • कैपेक्स का बड़ा हिस्सा: निवेश का 30 प्रतिशत हिस्सा सीधे एआई प्लेटफॉर्म और डेटा आधुनिकीकरण की ओर जा रहा है, जिसके बाद कोर एप्लिकेशन और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर का नंबर आता है। 

  • लीडर्स की प्राथमिकता: अगले 12 महीनों में करीब 60 प्रतिशत सीआईओ हाई-इम्पैक्ट एआई रोडमैप, डेटा आधुनिकीकरण और एप्लिकेशन रेशनलाइजेशन को अपनी शीर्ष प्राथमिकता पर रखेंगे। 

निवेश भारी, लेकिन सामने हैं ये बड़ी चुनौतियां

तेजी से बढ़ते इस निवेश के बावजूद, कई संगठन इस खर्च को मापने योग्य कारोबारी परिणामों में बदलने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। 


  • रणनीतिक सोच का अभाव: केवल 15 प्रतिशत बिजनेस लीडर्स ही आईटी को वास्तव में रणनीतिक मानते हैं, जबकि 70 प्रतिशत इसे सिर्फ ‘अच्छा, लेकिन बहुत बेहतरीन नहीं’ की श्रेणी में रखते हैं। 

  • लीगेसी सिस्टम की बाधा: लगभग 72 प्रतिशत सीआईओ पुरानी तकनीक को डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की राह में सबसे बड़ी बाधा मानते हैं। 

  • अन्य चुनौतियां: इसके अलावा नेक्स्ट-जेनरेशन डोमेन में कुशल कर्मचारियों की कमी और नई तकनीकों से मिलने वाले अप्रमाणित रिटर्न  भी बड़ी रुकावटें हैं। 

भविष्य का नजरिया: फ्यूचर-बैक अप्रोच की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल मील के पत्थर छूने के बजाय विकास और लाभप्रदता से जुड़े आउटकम-बेस्ड मेट्रिक्स अपनाने की तत्काल आवश्यकता है। बैन एंड कंपनी के पार्टनर और एपीएसी टेक्नोलॉजी प्रैक्टिस लीडर संदीप नायक के अनुसार, “ऐसे समय में जब एआई बदलाव की गति को तेज कर रहा है, यह केवल टेक्नोलॉजी स्टैक को आधुनिक बनाने तक सीमित नहीं है; अब ‘फ्यूचर-बैक’ अप्रोच अपनाने और उद्यम की फिर से कल्पना करने का समय आ गया है”। 



रिपोर्ट का दावा है कि इस फ्यूचर-बैक दृष्टिकोण को अपनाकर उद्यम अपने एब्सोल्यूट एबिटडा में 15-20 प्रतिशत का सुधार कर सकते हैं। बैन एंड कंपनी में इंडिया एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी के प्रमुख नागराज जीएन ने स्पष्ट किया है कि एआई-संचालित बदलाव का पूरा लाभ उठाने के लिए कंपनियों को अपने ऑपरेटिंग मॉडल, गवर्नेंस स्ट्रक्चर और टैलेंट रणनीतियों पर नए सिरे से विचार करना होगा।



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