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करदाताओं के लिए जरूरी खबर: आईटीआर फाइलिंग सीजन शुरू, आयकर विभाग ने जारी किए ITR-1 और ITR-4 फॉर्म


आयकर दाताओं के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। आयकर विभाग ने असेसमेंट ईयर 2026-27 यानी वित्त वर्ष 2025-26 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग का सीजन आधिकारिक तौर पर शुरू कर दिया है। विभाग द्वारा ITR-1 और ITR-4 के लिए एक्सेल यूटिलिटीज जारी कर दी गई हैं, जिससे पात्र करदाता अपना रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।

आईटीआर फाइलिंग प्रक्रिया और इसके फायदे

आयकर रिटर्न एक ऐसा फॉर्म है जिसके माध्यम से करदाता आयकर विभाग को अपनी आय, कटौती और कर देनदारी की जानकारी देते हैं। नई एक्सेल यूटिलिटीज करदाताओं को एक सुविधाजनक ऑफलाइन विकल्प प्रदान करती हैं:


  • करदाता आईटी विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल से इन ऑफलाइन यूटिलिटीज को आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं।

  • इसके जरिए वे अपनी आय और कर का विवरण ऑफलाइन दर्ज कर सकते हैं और अपनी कर देनदारी की सटीक गणना कर सकते हैं।

  • इसके बाद, एक JSON फाइल जनरेट करके उसे ई-फाइलिंग वेबसाइट पर सबमिट और वेरिफाई करने के लिए अपलोड किया जा सकता है।

आयकर विभाग के इस कदम का मुख्य उद्देश्य वेतनभोगी कर्मचारियों, पेंशनभोगियों, छोटे व्यवसायियों और पेशेवरों को अपनी फाइलिंग प्रक्रिया जल्दी शुरू करने में मदद करना है। इससे वे 31 जुलाई की सामान्य समय सीमा के करीब होने वाली अंतिम समय की भीड़ और तकनीकी परेशानियों से बच सकेंगे। 

ITR-1 फॉर्म किसके लिए है?

वर्तमान में करदाताओं की श्रेणी, आय की प्रकृति और कुल कमाई के आधार पर सात अलग-अलग ITR फॉर्म (ITR-1 से ITR-7) मौजूद हैं। इनमें से ITR-1 फॉर्म की शर्तें इस प्रकार हैं:


  • यह उन निवासी व्यक्तियों के लिए है जिनकी कुल वार्षिक आय 50 लाख रुपये तक है।

  • इस फॉर्म का उपयोग वे करदाता कर सकते हैं जिनकी आय का स्रोत वेतन, पेंशन, अधिकतम दो घर की संपत्ति और बैंक ब्याज जैसे अन्य स्रोत हैं।

  • इस श्रेणी के तहत 5,000 रुपये तक की कृषि आय की भी अनुमति दी गई है।

  • इसके अतिरिक्त, वे करदाता भी ITR-1 का उपयोग कर सकते हैं जिन्हें धारा 112A के तहत 1.25 लाख रुपये तक का दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ हुआ है।

ITR-4 फॉर्म किसके लिए है?

दूसरी ओर, ITR-4 फॉर्म व्यवसायों और पेशेवरों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है:


  • यह फॉर्म उन निवासी व्यक्तियों, हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF) और सीमित देयता भागीदारी (LLP) को छोड़कर अन्य फर्मों पर लागू होता है, जिनकी कुल आय 50 लाख रुपये तक है।

  • यह विशेष रूप से उन करदाताओं के लिए डिज़ाइन किया गया है जो धारा 44AD, 44ADA या 44AE के तहत प्रकल्पित कराधान योजनाओं का विकल्प चुनते हैं।

  • ITR-1 की तरह ही, धारा 112A के तहत 1.25 लाख रुपये तक के दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ वाले करदाता भी इस फॉर्म का उपयोग करने के पात्र हैं।

ITR-1 और ITR-4 यूटिलिटीज के जारी होने के साथ ही करदाताओं के पास अब अपना टैक्स रिटर्न समय से पहले दाखिल करने का एक बेहतरीन मौका है। समय सीमा (31 जुलाई) से पहले रिटर्न दाखिल कर लेने से करदाता अंतिम समय की भीड़ से बच सकते हैं और फाइलिंग प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा कर सकते हैं।





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