Homeअपराधजज ससुर और वकील पति, फिर भी नहीं मिला Twisha Sharma इंसाफ!...

जज ससुर और वकील पति, फिर भी नहीं मिला Twisha Sharma इंसाफ! रसूखदारों के 'दबाव' ने ली घर की बहू की जान! Newlywed Woman Suspicious Death


कुछ कहानियाँ शुरू होने से पहले ही खत्म हो जाती हैं, लेकिन अपने पीछे एक ऐसा सन्नाटा छोड़ जाती हैं जिसकी गूँज सालों तक सुनाई देती है। ट्विशा शर्मा की कहानी भी एक ऐसी ही दास्तां है, जो मासूमियत, सपनो और फिर अचानक मिले गहरे जख्मों के इर्द-गिर्द घूमती है। यह सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि उस बेबसी का प्रतीक बन गया है जिसे सुनकर आज भी आंखें नम हो जाती हैं। भोपाल के पॉश इलाके कटारा हिल्स में जब 31 वर्षीय ट्विशा शर्मा का शव फंदे से झूलता मिला, तो वह सिर्फ एक देह नहीं थी, बल्कि उन अनगिनत सपनों की लाश थी जिन्हें बड़ी बेरहमी से कुचला गया था। एक रिटायर्ड जज के रसूखदार घर की बहू, जिसके पास दुनिया की नजर में सब कुछ था, असल में अंदर ही अंदर कितनी तन्हा और बेबस थी, इसका अंदाजा उसके आखिरी पलों की दास्तां बयां करती है।
 

इसे भी पढ़ें: बड़ी खबर: Gautam Adani को अमेरिका से ‘क्लीन चिट’ की तैयारी? कांग्रेस बोली- ‘प्रधानमंत्री ने देश के हितों को गिरवी रखा’

 

सपनों की बलि और समझौते की चौखट

नोएडा की रहने वाली हंसती-खेलती ट्विशा ने एक साल पहले बड़े अरमानों के साथ भोपाल के वकील समर्थ शर्मा से शादी की थी। उसने नहीं जाना था कि जिस घर की नींव ‘न्याय’ (रिटायर्ड जज ससुर और पूर्व न्यायिक अधिकारी सास) पर टिकी है, वहीं उसे अपनी गरिमा और मर्जी के लिए भीख मांगनी पड़ेगी। भोपाल में बसने के लिए ट्विशा ने अपनी जमी-जमाई नौकरी छोड़ दी। लेकिन अफसोस, त्याग की इस मिसाल को ससुराल में कमजोरी समझ लिया गया। परिवार का आरोप है कि उस पर फिर से नौकरी करने के लिए इस कदर दबाव बनाया गया कि घर ‘घर’ न रहकर ‘मानसिक प्रताड़ना का केंद्र’ बन गया।

एक अधूरी ममता का बोझ

इस कहानी का सबसे दर्दनाक पहलू वो ‘अनचाहा गर्भ’ है, जिसे ट्विशा अभी अपनाने के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं थी। एक स्त्री के शरीर और उसकी कोख पर जब अपनों का ही पहरा लग जाए, तो रूह का टूटना लाजमी है। मायके वालों का आरोप है कि माँ बनने के फैसले को लेकर भी उस पर लगातार दबाव डाला जा रहा था, जिससे वह गहरे अवसाद और भावनात्मक उथल-पुथल के अंधेरे में धकेल दी गई।

“भैया, मुझे ले जाओ…”: वो आखिरी गुहार

ट्विशा के भाई, मेजर हर्षित शर्मा, जो सरहद पर देश की रक्षा करते हैं, आज अपनी बहन को न बचा पाने के गम में टूटे हुए हैं। उन्होंने बताया कि मौत से कुछ समय पहले ट्विशा ने उन्हें फोन किया था। उसकी आवाज में वो डर और सिहरन थी जो केवल वही समझ सकता है जिसका दम घुट रहा हो। मेजर हर्षित शर्मा ने कहा “उसने नोएडा वापस आने के लिए ट्रेन का टिकट भी बुक कर लिया था। वह बस एक बार अपनी माँ की गोद में सिर रखकर रोना चाहती थी, अपनी पुरानी जिंदगी में लौट जाना चाहती थी। लेकिन उस ट्रेन के आने से पहले ही उसने मौत का दामन थाम लिया।”
 

इसे भी पढ़ें: बड़ी खबर: Gautam Adani को अमेरिका से ‘क्लीन चिट’ की तैयारी? कांग्रेस बोली- ‘प्रधानमंत्री ने देश के हितों को गिरवी रखा’

न्याय की उम्मीद या रसूख की दीवार?

एम्स भोपाल में जब ट्विशा का पोस्टमार्टम हो रहा था, तो बाहर खड़े परिजनों की आंखों में सिर्फ आंसू नहीं, बल्कि इंसाफ की आग थी। एक फौजी भाई अपनी बहन के लिए पुलिस कमिश्नर के दरवाजे पर खड़ा है, यह सवाल पूछने के लिए कि क्या कानून सबके लिए बराबर है? पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने निष्पक्ष जांच का भरोसा तो दिया है, लेकिन सवाल वही है— क्या एक रसूखदार न्यायिक परिवार के खिलाफ जांच उतनी ही पारदर्शी होगी? उन्होंने आगे कहा कि नई शादीशुदा महिलाओं की मौत से जुड़े मामलों में विस्तृत जांच की आवश्यकता होती है, और उन्होंने आश्वासन दिया कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
ट्विशा शर्मा की मौत महज एक सुसाइड नहीं, बल्कि समाज के उस दोहरे चेहरे पर तमाचा है जो शिक्षित और संपन्न होने के बावजूद औरतों को सिर्फ एक ‘मशीन’ या ‘मिट्टी की मूरत’ समझते हैं। ट्विशा ने फांसी का फंदा नहीं चुना था, शायद उसे उस फंदे तक उन हालातों ने पहुंचाया जहां उम्मीद की हर किरण बुझ चुकी थी।
ट्विशा, तुम्हारी अधूरी कहानी अब एक चीख है, जो हर उस घर को सुनाई देनी चाहिए जहां किसी की बेटी घुट-घुट कर जी रही है।
 
Read Latest
National News in Hindi
only on Prabhasakshi  



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments