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CBSE ने 12वीं की रीवैल्यूएशन फीस ₹700 से ₹100 की: एक नंबर भी बढ़ा तो पूरी फीस वापस होगी, छात्रों के विरोध के बाद फैसला


नई दिल्ली1 घंटे पहले

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शिक्षा मंत्रालय ने 12वीं के छात्रों के विरोध के बाद सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन यानी CBSE के रीवैल्यूएशन फीस में कटौती की है। अब स्कैन कॉपी के लिए 700 की जगह 100 रुपए ही देने होंगे। प्रति सवाल दोबारा जंचवाने के लिए अब 100 की जगह 25 रुपए ही लगेंगे।

शिक्षा सचिव संजय कुमार ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ये घोषणाएं कीं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी छात्र के कुल अंकों में एक अंक भी बढ़ता है तो उसे रीवैल्यूएशन प्रोसेस के लिए जमा की गई फीस वापस दी जाएगी।

19 मई से 22 मई के बीच छात्र अपनी स्कैन आंशर शीट हासिल कर सकते हैं। यदि वे अपनी कॉपी को वेरिफाई या री-इवैल्युएट कराना चाहें तो अगले एक हफ्ते में 26-29 मई के बीच ऐसा भी कर सकेंगे।

हालांकि बोर्ड ने कहा कि रि-इवैल्युएशन की प्रक्रिया भी ओएसएम (ऑन स्क्रीन मार्किंग) से ही होगी, न कि मैनुअली। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यदि ज्यादा आवेदन आए तो बोर्ड इस प्रक्रिया की तिथि और बढ़ा सकता है।

स्टूडेंट्स ने शिकायत की थी- ‘OSM की वजह से कम नंबर आए’

शिक्षा मंत्रायल ने ये फैसला CBSE 12वीं बोर्ड में ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) की वजह से रिजल्ट पर पड़ने वाले असर के बाद लिया है। दरअसल, CBSE 12वीं बोर्ड रिजल्ट के बाद कई स्टूडेंट और उनके पेरेंट्स ने ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम पर सवाल उठाया है। उनकी शिकायत है कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग यानी OSM की वजह से 12वीं में स्टूडेंट्स के काफी कम नंबर आए हैं।

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राहुल बोले- नीट से लेकर CBSE तक विफल रहे शिक्षा मंत्री

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा- पहले नीट पेपर लीक, जिसने 22 लाख छात्रों को प्रभावित किया। फिर CBSE 12वीं के छात्रों को एक खराब ओएसएम सिस्टम के कारण उम्मीद से कम अंक मिले, जिससे कई छात्रों ने अपनी कॉलेज पात्रता खो दी।

अब CSBE 9वीं क्लास के लाखों छात्रों को अचानक 1 जुलाई से एक नई भाषा सीखने के लिए कहा गया है, जबकि न शिक्षक हैं, न पाठ्यपुस्तकें। तीन परीक्षाएं। तीन आयु वर्ग। एक मंत्री। धर्मेंद्र प्रधान जी केवल एक बार विफल नहीं हुए हैं। उन्होंने एक साथ भारत के छात्रों के हर आयु वर्ग को विफल किया है।

JEE में 99 पर्सेंटाइल वाले स्टूडेंट्स का 12वीं बोर्ड में 75% भी नहीं

स्टूडेंट्स का आरोप था कि कॉपियां स्क्रीन पर चेक होने से स्टेप-मार्किंग में भी गड़बड़ी हुई। इसकी वजह से जवाब सही होने पर भी काफी नंबर कटे। ऐसे JEE में 99 पर्सेंटाइल लाने वाले स्टूडेंट्स भी बोर्ड के 75% क्राइटेरिया से बाहर हो गए हैं। अब वे IIT-NIT में एडमिशन नहीं ले सकेंगे। क्योंकि नॉर्म्स के मुताबिक, JEE मेन में अच्छे रैंक के साथ ही 12वीं बोर्ड में 75% कम्पलसरी है। OMS पर CBSE बोला- जिनमें गड़बड़ी उन्हें मैन्युअली जांचा

नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शिक्षा मंत्रालय के संजय कुमार ने कहा कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम पहली बार लागू नहीं किया गया है। CBSE ने पहली बार 2014 में OSM शुरू किया था, लेकिन उस समय तकनीकी और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी की वजह से इसे जारी नहीं रखा।

संजय कुमार ने कहा कि 98,66,222 उत्तर पुस्तिकाओं में से केवल 13,583 कॉपियां ऐसी थीं, जिनकी स्कैन कॉपी ऑन स्क्रीन नहीं जांची जा सकी। संभवत: छात्र द्वारा हल्के रंग की स्याही वाले पेन के इस्तेमाल के चलते ऐसा हुआ। 9 मई के बाद इन कॉपियों को मैनुअली जांचा गया और 13 मई को नतीजे घोषित हुए।

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