Homeअपराधयहां गाजर-मूली की तरह बिकते हैं बच्‍चे! UP के इस शहर से...

यहां गाजर-मूली की तरह बिकते हैं बच्‍चे! UP के इस शहर से पकड़ा गया ‘बेबी सेल गैंग’, निशाने पर थी खास महिलाएं


Last Updated:

रायबरेली पुलिस ने बच्चों की खरीद-फरोख्त करने वाले एक इंटरस्टेट ‘बेबी सेल गैंग’ का पर्दाफाश किया है. गिरोह रेलवे स्टेशन और सार्वजनिक जगहों पर अकेली महिलाओं को निशाना बनाकर नवजात और छोटे बच्चों का अपहरण करता था. पुलिस ने 4 महिलाओं समेत 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर 9 महीने के बच्चे को सकुशल बरामद किया है. पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह लाखों रुपये में बच्चों की डील करता था और इसके तार कई राज्यों तक फैले हुए हैं.

Zoom

आखिरकार रायबरेली के एसपी रवि कुमार की मेहनत रंग लाई और गोद उजाड़ने वाले गिरोह को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया गया.

Raebareli News: उत्तर प्रदेश के रायबरेली से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां पुलिस ने एक ऐसे इंटरस्टेट ‘बेबी सेल गैंग’ का भंडाफोड़ किया है, जो मासूम बच्चों को गाजर-मूली की तरह खरीदने और बेचने का धंधा चला रहा था. इस गिरोह के निशाने पर खासतौर पर वे महिलाएं होती थीं, जो रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड या सार्वजनिक जगहों पर अपने छोटे बच्चों के साथ अकेली सफर करती थीं. रायबरेली पुलिस ने इस खौफनाक गिरोह के 4 महिलाओं समेत 9 सदस्यों को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने उनके कब्जे से 9 महीने के अपहृत बच्चे को भी सकुशल बरामद किया है.

ट्रेन में हुई दोस्ती, फिर गोद से गायब हुआ मासूम

  1. रायबरेली के पुलिस अधीक्षक रवि कुमार के अनुसार, यह मामला 13 मई 2026 का है. मध्य प्रदेश की रहने वाली एक महिला अपने पति से नाराज होकर दिल्ली से लखनऊ आई थी.
  2. वहां से वह अपने मायके सिंगरौली जाने के लिए त्रिवेणी एक्सप्रेस में सफर कर रही थी. उसके साथ दो छोटे बच्चे भी थे. बड़ा बेटा करीब 2 साल का था, जबकि छोटा बेटा सिर्फ 9 महीने का था.
  3. यात्रा के दौरान ट्रेन में एक महिला और एक पुरुष उससे घुलने-मिलने लगे. दोनों ने बातचीत के जरिए महिला का भरोसा जीत लिया. रास्ते में आरोपी महिला ने बच्चे को खिलाने के बहाने उसे गोद में ले लिया.
  4. जैसे ही ट्रेन रायबरेली पहुंची, दोनों आरोपी महिला को स्टेशन के बाहर भोजनालय तक ले गए. वहां मौका मिलते ही वे 9 महीने के मासूम को लेकर फरार हो गए.
  5. जब मां को अपने बच्चे के गायब होने का एहसास हुआ तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई. स्टेशन पर चीख-पुकार मच गई और तुरंत पुलिस को सूचना दी गई.

सीसीटीवी और सर्विलांस से खुला ‘बेबी सेल गैंग’ का राज

पुलिस अधीक्षक रवि कुमार ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए एसओजी और सर्विलांस टीम को जांच में शामिल किया गया. रेलवे स्टेशन और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई. मोबाइल लोकेशन और सर्विलांस की मदद से पुलिस धीरे-धीरे पूरे गिरोह तक पहुंच गई. 20 मई को पुलिस ने रेलवे कॉलोनी इलाके के पास से सफेद रंग की हुंडई वेन्यू कार के साथ 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने बच्चे को भी सुरक्षित बरामद कर लिया.

ऐसे चलता था मासूमों की खरीद-फरोख्त का धंधा

  1. पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने जो खुलासे किए, वह बेहद डराने वाले हैं. आरोपियों ने बताया कि वे लोग संगठित तरीके से नवजात और छोटे बच्चों की खरीद-फरोख्त करते थे.
  2. गिरोह में हर सदस्य की अलग जिम्मेदारी थी. कुछ लोग अस्पतालों, गांवों और कस्बों में ऐसे दंपत्तियों की तलाश करते थे, जिन्हें बच्चा चाहिए होता था. इसके बाद बच्चों की डील तय की जाती थी.
  3. इसके बाद गिरोह के सदस्य रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसे इलाकों में अकेली महिलाओं को तलाशते थे. खासकर वे महिलाएं, जिनके साथ छोटे बच्चे होते थे.
  4. आरोपी पहले उनसे दोस्ती करते, भरोसा जीतते और फिर मौका मिलते ही बच्चों का अपहरण कर लेते. पुलिस जांच में सामने आया कि इस गिरोह के तार बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड तक फैले हुए हैं.
  5. रामकुमार दास और उसकी पत्नी रेशमा देवी बच्चों को चोरी करने का काम करते थे. दोनों रेलवे स्टेशन और सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं को फंसाते थे.
  6. किरणजीत कौर उर्फ ‘सरदार आंटी’ बच्चों की डील कराने का काम करती थी. वहीं सुमित कुमार खरीदारों और गिरोह के बीच मिडिएटर की भूमिका निभाता था.
  7. पुलिस के मुताबिक गिरोह लाखों रुपये में बच्चों का सौदा करता था. चोरी किए गए बच्चों को निसंतान दंपत्तियों तक पहुंचाया जाता था.

क्लीनिक और मेडिकल नेटवर्क भी जांच के घेरे में

जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह कुछ क्लीनिकों और मेडिकल नेटवर्क की मदद से भी काम करता था.
एक आरोपी ब्रह्मपाल सिंह क्लीनिक में काम करता था और वहीं से ऐसे लोगों की जानकारी गिरोह तक पहुंचती थी, जिन्हें बच्चा चाहिए होता था. पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि कहीं इस रैकेट में और डॉक्टर, नर्स या मेडिकल स्टाफ तो शामिल नहीं हैं.

पुलिस की बड़ी कार्रवाई, लेकिन कई सवाल बाकी

रायबरेली पुलिस ने सभी 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने अब तक कितने बच्चों को बेचा और किन-किन राज्यों में यह नेटवर्क फैला हुआ है. इस घटना ने एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. रेलवे स्टेशन और सार्वजनिक जगहों पर छोटे बच्चों के साथ सफर करने वाली महिलाओं को अब और ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है. रायबरेली पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं. फिलहाल पुलिस गिरोह के पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी हुई है.

About the Author

authorimg

Anoop Kumar MishraAssistant Editor

Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments