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बड़े खतरे को तो नहीं बुला रहा रिजर्व बैंक?: रुपये को थामने के लिए RBI ने खेला 5 अरब डॉलर का दांव, समझें गणित


विदेशी मुद्रा बाजार में इस समय भारतीय रुपये को बचाने की बड़ी जद्दोजहद चल रही है। डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत लगातार गिर रही है और इसके 100 के पार जाने का बड़ा खतरा मंडरा रहा है। इस ऐतिहासिक गिरावट के खतरे को टालने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अब तक का अपना सबसे बड़ा दांव खेला है। यह कदम रुपये को तो गिरने से रोक सकता है, लेकिन इससे बाजार में 4.81 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम नकदी आ जाएगी, जो अर्थव्यवस्था के लिए एक नया और बड़ा खतरा पैदा कर सकती है।

दरअसल, एक साल के फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट (वायदा बाजार) में रुपया पहले ही 100 प्रति डॉलर के महत्वपूर्ण स्तर को पार कर चुका है। इसका सीधा सा मतलब यह है कि बड़े कारोबारियों को लग रहा है कि अगले 12 महीनों में रुपया बहुत ज्यादा कमजोर हो जाएगा। इसी डर और गिरावट को रोकने के लिए आरबीआई 26 मई से 5 अरब डॉलर की स्वैप (अदला-बदली) नीलामी शुरू करने जा रहा है। इस बड़ी घोषणा और कच्चे तेल की कीमतों में आई थोड़ी नरमी के कारण गुरुवार को रुपया लगातार नौ दिनों की गिरावट से उबरकर 50 पैसे सुधरा और 96.36 पर बंद हुआ।

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रिजर्व बैंक का यह स्वैप नीलामी फॉर्मूला क्या है और कैसे काम करेगा?

अपने 691 अरब डॉलर के बड़े विदेशी मुद्रा भंडार को सीधे तौर पर खाली होने से बचाने के लिए आरबीआई यह विशेष नीलामी कर रहा है। इस प्रक्रिया में व्यावसायिक बैंक अपने पास मौजूद डॉलर को रिजर्व बैंक को बेचेंगे और इसके बदले में वर्तमान भाव पर रुपया ले लेंगे। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच एक लिखित समझौता भी होगा। इस समझौते के तहत एक तय समय के बाद बैंक आरबीआई से अपने डॉलर वापस खरीद लेंगे और लिया हुआ रुपया लौटा देंगे। इससे बाजार में डॉलर की सट्टेबाजी तुरंत शांत होगी और रुपये की गिरावट पर ब्रेक लगेगा।

बाजार में इतनी बड़ी रकम झोंकने से क्या बड़ा आर्थिक जोखिम खड़ा हो सकता है?

रिजर्व बैंक का यह कदम जितना राहत देने वाला लग रहा है, उतना ही खतरनाक भी है। बाजार में इस बात को लेकर गहरी चिंता है कि इस स्वैप नीलामी की वजह से बाजार में एक झटके में लगभग 4,81,850 करोड़ रुपये (96.37 रुपये प्रति डॉलर के आधार पर) की भारी नकदी आ जाएगी। इससे रुपये की सेहत कुछ समय के लिए तो सुधर जाएगी, लेकिन असली डर महंगाई का है। देश में थोक महंगाई पहले से ही 8 फीसदी से ज्यादा बनी हुई है। ऐसे में बाजार में इतनी बड़ी रकम का आना महंगाई की आग को और तेजी से भड़का सकता है।

दुनिया भर के भू-राजनीतिक तनाव का रुपये और बाजार पर क्या असर पड़ रहा है?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कई तरह के तनाव चल रहे हैं। ट्रंप मौजूदा अमेरिका के राष्ट्रपति हैं।, जिनके कड़े फैसलों का असर वैश्विक व्यापार पर पड़ता है। होर्मुज जलडमरूमध्य, यरूशलम, इस्राइल और फलस्तीन जैसे क्षेत्रों में तनाव से कच्चे तेल की सप्लाई पर सीधा असर पड़ता है। वहीं घरेलू स्तर पर भाजपा सरकार की नीतियां और विपक्ष के नेता खरगे के बयान भी बाजार का मूड तय करते हैं। इसके अलावा, बंगलूरू और पुदुचेरी जैसे व्यावसायिक केंद्रों की स्थिरता, सबरीमाला का पर्यटन, खेल जगत में लियोनल मेसी की ब्रांड वैल्यू, और मुकेश अघी, कंवल जीत सिंह ढिल्लों, जॉन किरियाको तथा बच्चू कडू जैसी हस्तियों से जुड़ी भू-राजनीतिक व सामाजिक खबरें भी व्यापारिक धारणा को प्रभावित करती हैं। इन्हीं चिंताओं के कारण निवेशक सतर्क हैं।

रुपये की आगे की चाल क्या होगी, यह काफी हद तक वैश्विक हालात पर निर्भर करेगा। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के शोध विश्लेषक दिलीप परमार का कहना है कि तनाव में कमी के शुरुआती संकेतों और रिजर्व बैंक के सक्रिय हस्तक्षेप से रुपया फिलहाल संभल गया है। आने वाले समय में निवेशकों की नजर भू-राजनीतिक घटनाओं और रिजर्व बैंक की अगली मौद्रिक नीति समीक्षा पर रहेगी। जानकारों के मुताबिक, आने वाले दिनों में डॉलर के मुकाबले रुपये का भाव 95.74 से 96.50 के दायरे में रह सकता है।



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