पश्चिम एशिया में एक बार फिर कूटनीति का बाजार गर्म है और चर्चा के केंद्र में हैं अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। ट्रंप एक ऐसी डील को आगे बढ़ाने में पूरी ताकत झोंक रहे हैं, जिसे लेकर कुछ देश तो उत्साहित हैं, लेकिन पाकिस्तान और सऊदी अरब जैसे प्रमुख देशों ने इसे लेकर साफ तौर पर असहमति जता दी है।
हम बात कर रहे हैं अब्राहम एकॉर्ड्स की। क्या है यह समझौता, कौन-कौन से देश इसके सदस्य हैं और क्यों इसे लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है? आइए इसे आसान भाषा में सवाल-जवाब के जरिए समझते हैं।
सवाल: अब्राहम एकॉर्ड्स आखिर है क्या?
जवाब: आसान शब्दों में कहें तो यह 2020 में अमेरिका की मध्यस्थता से शुरू किया गया एक समझौता है। इसका मुख्य उद्देश्य इस्राइल और अरब देशों के बीच कूटनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को सामान्य करना है। पहले अरब देशों की यह शर्त हुआ करती थी कि जब तक फिलिस्तीन के मुद्दे का समाधान नहीं होता, वे इस्राइल को मान्यता नहीं देंगे। लेकिन इस समझौते ने पुरानी परंपरा को तोड़ते हुए व्यापार, निवेश और रक्षा सहयोग को सबसे ऊपर रखा।
इस समझौते का नाम अब्राहम (इब्राहीम) के नाम पर रखा गया है, जो यहूदी धर्म, ईसाई धर्म और इस्लाम- तीनों प्रमुख धर्मों में एक साझा और सम्मानित पैगंबर या पूर्वज माने जाते हैं। इस नाम को चुनने का प्रतीक यह संदेश देना था कि ये देश साझा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के आधार पर क्षेत्र में शांति, भाईचारे और सहयोग की नई शुरुआत कर रहे हैं।



