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भारत का ऐसा बाजार जो हफ्ते में सिर्फ 3 घंटे रहता है खुला, मिलते हैं अनोखी चीजें


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भारत में कुछ ऐसे अनोखे बाजार भी हैं जो हफ्ते में सिर्फ 3 घंटे के लिए ही लगते हैं, लेकिन फिर भी यहां भारी भीड़ देखने को मिलती है. असम के मायोंग, नागालैंड के दीमापुर और दिल्ली के कुछ संडे मार्केट जैसे स्थानों पर लोग दूर-दूर से खरीदारी करने पहुंचते हैं, जहां स्थानीय सामान और पारंपरिक चीजों की खास झलक मिलती है.

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भारत में बाजारों की कोई कमी नहीं है, लेकिन कुछ ऐसे अनोखे हाट भी हैं जो सिर्फ कुछ घंटों के लिए ही लगते हैं. खास बात यह है कि इतने कम समय के बावजूद इनमें जबरदस्त रौनक रहती है और लोग दूर-दूर से खरीदारी करने पहुंचते हैं. इन बाजारों की पहचान सिर्फ सामान बेचने से नहीं, बल्कि इनसे जुड़ी परंपराओं और लोकल संस्कृति से भी होती है.

असम का मायोंग (जादुई बाजार)
असम के मोरीगांव जिले का Mayong सबसे रहस्यमयी जगहों में से एक माना जाता है. इसे “जादुई गांव” भी कहा जाता है क्योंकि यहां तंत्र-मंत्र और लोक मान्यताओं की पुरानी परंपरा रही है. यहां लगने वाला साप्ताहिक बाजार हर हफ्ते कुछ ही घंटों के लिए खुलता है. इस बाजार में स्थानीय लोग जड़ी-बूटियां, पारंपरिक ताबीज, देसी इलाज से जुड़ी चीजें और घरेलू उपयोग की वस्तुएं बेचते हैं. पर्यटकों के लिए यह जगह इसलिए भी खास है क्योंकि यहां उन्हें एक अलग ही सांस्कृतिक अनुभव मिलता है.

नागालैंड का दीमापुर बाजार
नागालैंड के Dimapur में लगने वाला साप्ताहिक बाजार भी काफी मशहूर है. यह बाजार हफ्ते में एक दिन लगता है और सुबह के कुछ घंटों में ही इसकी पूरी रौनक देखने को मिलती है. यहां स्थानीय लोग अपने खेतों से लाए हुए ताजे फल, सब्जियां, बाजरा, सूखे खाद्य पदार्थ और पारंपरिक चीजें बेचते हैं. इस बाजार की खास बात यह है कि यहां मिलने वाला सामान पूरी तरह लोकल होता है, जो नागालैंड की संस्कृति और जीवनशैली को दर्शाता है.

दिल्ली के संडे मार्केट
भारत की राजधानी दिल्ली में भी ऐसे बाजार देखने को मिलते हैं जो सीमित समय के लिए ही लगते हैं. कुछ पुराने “संडे मार्केट” सुबह जल्दी लगते हैं और कुछ ही घंटों में खत्म हो जाते हैं. यहां कपड़े, जूते, घरेलू सामान और सस्ते फैशन आइटम्स की भरमार रहती है. कम कीमत और बड़ी भीड़ की वजह से ये बाजार हमेशा चर्चा में रहते हैं.

क्यों खास हैं ये बाजार?
इन बाजारों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये सिर्फ खरीदारी की जगह नहीं हैं, बल्कि लोगों के मिलने-जुलने और लोकल संस्कृति को समझने का जरिया भी हैं. सीमित समय होने की वजह से यहां खरीदारी बहुत तेज होती है और पूरा माहौल कुछ ही घंटों में बदल जाता है.

आज भी जिंदा है पुरानी परंपरा
आज भले ही ऑनलाइन शॉपिंग और बड़े मॉल आ गए हों, लेकिन नॉर्थ-ईस्ट के ये साप्ताहिक हाट अभी भी वैसे ही चलते हैं. यहां आपको असली गांव की जिंदगी देखने को मिलती है. इसी वजह से ये छोटे से बाजार सिर्फ खरीदारी की जगह नहीं हैं, बल्कि एक पूरी संस्कृति और परंपरा का हिस्सा हैं, जिसे लोग आज भी बहुत दिल से निभाते हैं.

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Vividha SinghSub Editor

विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें



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