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ताजमहल-लाल किला तो बहुत घूमे, भारत की इन 9 जगहों का नाम भी जानते हैं क्या? यूनेस्को लिस्ट


Hidden UNESCO World Heritage sites in India : जब भी छुट्टियों में कहीं घूमने का प्लान बनता है, तो हमारे दिमाग में वही गिने-चुने नाम आते हैं- शिमला-मनाली की वादियां, गोवा के बीचेस, या फिर दिल्ली का लाल किला और आगरा का ताजमहल. बेशक ये जगहें बेहद खूबसूरत हैं, लेकिन क्या हर बार वही जानी-पहचानी भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाना बोरिंग नहीं लगता? अगर आप इस बार कुछ ऐसा देखना चाहते हैं जो अनोखा हो, ऐतिहासिक हो और जहाँ पर्यटकों का हुजूम आपके वेकेशन का मजा किरकिरा न करे, तो यह लिस्ट खास आपके लिए है.

आपको जानकर हैरानी होगी कि हमारे देश में कई ऐसी छिपी हुई धरोहरें मौजूद हैं, जिन्हें उनकी ऐतिहासिक और प्राकृतिक अहमियत के लिए ‘यूनेस्को’ (UNESCO) वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा तो मिला हुआ है, लेकिन आज भी ये आम टूरिस्ट्स की नजरों से दूर हैं. यानी यहाँ आपको इतिहास की भव्यता भी मिलेगी और सुकून भी.

तो चलिए, अपनी ट्रैवल बकेट लिस्ट को थोड़ा अपग्रेड करते हैं और जानते हैं भारत की 9 खूबसूरत और ‘सीक्रेट’ यूनेस्को साइट्स के बारे में-

1.चंपानेर-पावागढ़ आर्कियोलॉजिकल पार्क, गुजरात (Champaner-Pavagadh Archaeological Park)-
गुजरात की पावागढ़ पहाड़ियों पर बसा यह पार्क प्राकृतिक सुंदरता और इतिहास का एक बेजोड़ मेल है. यहाँ आठवीं शताब्दी के किले, महल, बावड़ियाँ और मस्जिदें मौजूद हैं, जो हिंदू और इस्लामिक वास्तुकला (Architecture) के शानदार फ्यूजन को दर्शाती हैं. पहाड़ी की चोटी पर स्थित कालिका माता मंदिर के कारण यह स्थान आध्यात्मिकता और इतिहास दोनों का केंद्र है.

2.कैपिटल कॉम्प्लेक्स टूरिस्ट सेंटर, चंडीगढ़ (Capitol Complex Tourist Center)-
मशहूर आर्किटेक्ट ‘ले कोरबुसिए’ (Le Corbusier) द्वारा डिजाइन किया गया यह कॉम्प्लेक्स आधुनिक वास्तुकला का एक बेहतरीन अजूबा है. आजादी के बाद भारत के शहरी नियोजन (Urban Planning) को दर्शाती इस साइट में सचिवालय, विधानसभा और उच्च न्यायालय शामिल हैं, जो अपनी मिनिमलिस्ट और ज्योमेट्रिक डिजाइन के लिए जाने जाते हैं.

3.पट्टदकल, कर्नाटक (Pattadakal)-
मलप्रभा नदी के तट पर स्थित पट्टदकल, शुरुआती चालुक्य वास्तुकला का एक शानदार उदाहरण है. इस मंदिर परिसर में 10 मंदिर हैं, जिनमें उत्तर और दक्षिण भारतीय शैलियों का अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता है. सातवीं और आठवीं शताब्दी की नक्काशीदार मूर्तियां और भव्य पत्थर के खंभे कला प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं.

4.कास पठार, महाराष्ट्र (Kaas Plateau)-
इसे ‘महाराष्ट्र की फूलों की घाटी’ भी कहा जाता है. मानसून के मौसम में यह पूरा पठार रंग-बिरंगे जंगली फूलों की चादर से ढक जाता है. अपनी अनूठी पारिस्थितिक (Ecological) महत्ता और दुर्लभ पौधों की प्रजातियों के कारण इसे यूनेस्को की सूची में शामिल किया गया है. यह प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफरों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है.

5.हैलेबिडु, कर्नाटक (Halebidu)-

होयसल साम्राज्य की प्राचीन राजधानी रहा हैलेबिडु अपने उत्कृष्ट मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है. यहाँ के होयसलेश्वर और केदारेश्वर मंदिर की दीवारों पर पत्थरों को तराशकर बनाई गई पौराणिक कथाएँ, फूल-पत्तियों और जानवरों की आकृतियां वास्तुकला की बारीकी को दर्शाती हैं. इतिहास को करीब से जानने वालों के लिए यह एक मस्ट-विजिट प्लेस है.

6.काकतीय रुद्रेश्वर मंदिर, तेलंगाना (Kakatiya Rudreshwara Temple)-
रामप्पा मंदिर के नाम से मशहूर यह 13वीं शताब्दी का मंदिर काकतीय काल की कला का शिखर है. भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इसके निर्माण में इस्तेमाल की गईं ‘पानी में तैरने वाली ईंटें’ और भूकंपरोधी तकनीक हैं. यहाँ की मूर्तियों में नर्तकियों और संगीतकारों के दृश्यों को बेहद खूबसूरती से उकेरा गया है.

7.बीदर किला, कर्नाटक (Bidar Fort)-
दक्कन के पठार पर स्थित यह विशाल किला बहमनी सल्तनत की वास्तुकला और रणनीतिक सूझबूझ की कहानी कहता है. 5 किलोमीटर के दायरे में फैले इस किले में रंगीन महल, फारसी शैली की टाइलें, भव्य प्रवेश द्वार और विशाल जलाशय मौजूद हैं, जो आपको इतिहास के पन्नों में ले जाते हैं.

8.नालंदा महाविहार का पुरातत्व स्थल, बिहार (Nalanda Mahavihara)-
5वीं से 12वीं शताब्दी तक दुनिया भर के विद्वानों को आकर्षित करने वाला नालंदा विश्वविद्यालय प्राचीन भारत के ज्ञान और दर्शन का सबसे बड़ा केंद्र था. आज यहाँ मौजूद मठों, स्तूपों और व्याख्यान कक्षों के अवशेष भारत की समृद्ध शैक्षणिक और सांस्कृतिक विरासत की गवाही देते हैं.

9.खंगचेंदजोंगा राष्ट्रीय उद्यान, सिक्किम (Khangchendzonga National Park)-
दुनिया की तीसरी सबसे ऊंची चोटी, माउंट कंचनजंगा के साए में बसा यह नेशनल पार्क अपनी बेमिसाल जैव विविधता (Biodiversity) और ग्लेशियर झीलों के लिए जाना जाता है. इस साइट का न केवल पारिस्थितिक बल्कि सांस्कृतिक महत्व भी है, क्योंकि यहाँ की स्थानीय जनजातियों की परंपराएं इस प्रकृति से गहराई से जुड़ी हैं.

तो देर किस बात की? अगली बार जब आप घूमने की प्लानिंग करें, तो रूटीन टूरिस्ट डेस्टिनेशन्स को छोड़कर भारत के इन अनछुए और नायाब यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स का रुख करें. यकीन मानिए, यहाँ का सुकून और इतिहास आपको हमेशा के लिए याद रहेगा!



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