दक्षिण-पश्चिम मानसून का कमजोर रहना देश की वृद्धि और मुद्रास्फीति के दृष्टिकोण के लिए बाधा बन सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक ने सोमवार को जारी जून महीने की बुलेटिन में यह बात कही।
आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक आर्थिक परिदृश्य अभी भी नाजुक बना हुआ है। पश्चिम एशिया में हालिया अंतरिम शांति समझौते के बावजूद भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार व्यवधान लगातार बने हुए हैं। यह रिपोर्ट देश की आर्थिक स्थिति पर महत्वपूर्ण प्रकाश डालती है।
बुलेटिन में प्रकाशित ‘अर्थव्यवस्था की स्थिति’ नामक एक लेख में यह जानकारी दी गई है। वैश्विक आर्थिक परिदृश्य अमेरिका-ईरान अंतरिम शांति समझौते से मिली कुछ राहत के बावजूद कमजोर बना हुआ है। लेख में बताया गया है कि इस समझौते का टूटना कई महत्वपूर्ण जोखिमों को फिर से बढ़ा सकता है। इनमें मुद्रास्फीति संबंधी उम्मीदें प्रमुख हैं।
यह महत्वपूर्ण ऊर्जा बुनियादी ढांचे को बाधित कर सकता है। इसके अलावा, निवेश व्यय में देरी भी हो सकती है। खाद्य सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी बढ़ सकती हैं। एक प्रतिकूल वित्तीय स्थिरता दृष्टिकोण भी सामने आ सकता है।
क्या वैश्विक चुनौतियां भारत पर असर डालेंगी?
अमेरिका-ईरान समझौते के टूटने से खाद्य सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ सकती हैं। इससे प्रतिकूल वित्तीय स्थिरता दृष्टिकोण और संरचनात्मक रूप से कम वृद्धि का जोखिम पैदा हो सकता है। भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार व्यवधान वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। इन वैश्विक चुनौतियों का असर भारत पर भी पड़ सकता है। केंद्रीय बैंक ने इन जोखिमों के प्रति आगाह किया है। वैश्विक स्तर पर व्यापार में आने वाली बाधाएं भी चिंता का विषय हैं।
भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति कैसी है?
चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल के बीच, भारतीय अर्थव्यवस्था चौथी तिमाही 2025-26 में 7.8 फीसदी की दर से बढ़ी। यह वृद्धि निजी खपत और निश्चित निवेश के मजबूत समर्थन से हुई है। 2026-27 के पहले दो महीनों के उच्च-आवृत्ति संकेतक बताते हैं कि आर्थिक गति बनी हुई है। मई में तेजी के बावजूद, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति स्थिर बनी रही। यह दर्शाता है कि कीमतें नियंत्रण में हैं। घरेलू मांग में लगातार सुधार देखा जा रहा है।
भारत की ताकत क्या है?
भारत का बाहरी क्षेत्र लचीला बना हुआ है। इसे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्रवाह और पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार से मजबूत समर्थन मिला है। बुलेटिन में कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था कई अन्य देशों की तुलना में बेहतर बुनियाद के साथ इस उथल-पुथल में प्रवेश कर चुकी है। यह झटके को झेलने में सक्षम है। देश की मजबूत आर्थिक बुनियाद उसे वैश्विक अस्थिरता से निपटने में मदद करेगी। केंद्रीय बैंक ने साफ किया कि बुलेटिन में व्यक्त विचार लेखकों के अपने हैं, भारतीय रिजर्व बैंक के नहीं।



