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बिलासपुर की विशेष पॉक्सो कोर्ट ने सौतेली बेटी को गर्भवती बनाने वाले कलयुगी पिता को आखिरी सांस तक जेल की सजा सुनाई है. अपर सत्र न्यायाधीश ने इसे विश्वास का उल्लंघन बताते हुए आरोपी पर सात लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है.
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बिलासपुर. एक बेटी के लिए उसका पिता वो साया होता है, जो हर मुश्किल में उसके साथ खड़ा होता है. जब भी कोई परेशानी आती है, तो बेटियां अपने बाप को ही याद करती हैं. ये रिश्ता भले ही सगे और सौतेले का ही क्यों ना हो. लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो इन रिश्तों की मर्यादा को तार-तार कर देते हैं. ऐसी ही एक कलंकित करने वाली घटना छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से आई है, जिसमें एक सौतेले पिता ने सुरक्षा और अटूट भरोसे के इस पवित्र रिश्ते को तार-तार कर दिया. उसने न सिर्फ अपनी नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म किया, बल्कि उसे गर्भवती भी कर दिया. अब बिलासपुर की एक विशेष अदालत ने इस घिनौने कृत्य पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है. विशेष पॉक्सो कोर्ट ने इस मामले में अपनी ही मासूम सौतेली बेटी को हवस का शिकार बनाकर उसे गर्भवती करने वाले कलयुगी पिता को आखिरी सांस तक जेल की अंधेरी सलाखों के पीछे रहने की कठोरतम सजा सुनाई है.
इस संवेदनशील मामले की सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश पूजा जायसवाल की अदालत ने अपने अंतिम फैसले में बेहद तल्ख, गंभीर और ऐतिहासिक टिप्पणी की. अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट कहा कि यह केवल एक साधारण आपराधिक कृत्य नहीं है, बल्कि यह एक मासूम बच्ची के मन में मौजूद विश्वास और उसके संवैधानिक व सामाजिक संरक्षण के अधिकार का घोर उल्लंघन है. अदालत ने इस घृणित कार्य को पूरी तरह अक्षम्य माना और आरोपी की क्रूरता को देखते हुए उस पर सात लाख रुपये का भारी-भरकम मुआवजा देने की मजबूत अनुशंसा भी की है, जो राशि पीड़िता के पुनर्वास और सहायता के लिए प्रदान की जाएगी. अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता की मां को उसका पहला पति कोरोना काल के भयंकर संकट के दौरान हमेशा के लिए असहाय और अकेला छोड़कर कहीं दूर चला गया था. इसके बाद वह महिला पूरी तरह बेसहारा हो गई और अपनी तथा अपनी छोटी बच्ची की जिंदगी बसर करने के लिए उसने समाज के नियमों के अनुसार आरोपी के साथ ‘चूड़ी विवाह’ कर लिया था.
इस विवाह के बाद वे दोनों समाज के सामने एक आम पति-पत्नी की तरह एक ही घर में रहने लगे थे. अपनी रोजी-रोटी चलाने और पूरे परिवार का पेट पालने के उद्देश्य से आरोपी उस महिला और उसकी 11 वर्षीय मासूम बेटी को साथ लेकर मुंबई चला गया और वहां एक निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत में सुरक्षा गार्ड के रूप में काम करने लगा. एक दिन जब पत्नी घर में नहीं थी तो अकेले पाकर आरोपी ने मासूम बच्ची के साथ जबरदस्ती की और दुष्कर्म किया. इसके बाद उसने कई बार दरिंदगी की हदें पार की. दिसंबर के महीने में जब यह पूरा परिवार मुंबई से वापस छत्तीसगढ़ के अपने मूल गांव रतनपुर लौटा, तब वहां सरकार की ओर से चल रहे आयुष्मान सर्वे के दौरान स्थानीय मितानिन स्मृति गोपाल की नजर अचानक उस मासूम बच्ची के पेट पर पड़ी, जो काफी फूला हुआ था. इसके बाद उन्होंने बच्ची की बेखबर मां को इस बारे में बताया और बिना किसी देरी के तुरंत बड़े अस्पताल ले जाने की उचित सलाह दी.
मितानिन की बात मानकर जब महिला अपनी बच्ची को लेकर सिम्स अस्पताल पहुंची, तो वहां डॉक्टरों द्वारा कराई गई सोनोग्राफी रिपोर्ट में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ. मेडिकल रिपोर्ट से पता चला कि वह 11 साल की मासूम बच्ची पहले से ही आठ महीने की गर्भवती हो चुकी है. पहले तो महिला ने लोकलाज के डर से नशेड़ी युवकों पर दुष्कर्म का संदेह जताया था. लेकिन इस पूरे केस की जांच कर रहे तत्कालीन रतनपुर थाना प्रभारी रजनीश सिंह को महिला के बयानों पर पूरी तरह विश्वास नहीं हुआ. उनका शक सीधे तौर पर उस घर के भीतर रहने वाले सौतेली पिता पर जा टिका. पुलिस ने बच्ची और उसके सौतेले पिता का डीएनए रिपोर्ट लिया, जो नवजात शिशु से शत-प्रतिशत मैच हो गया. इस साक्ष्य के सामने आते ही आरोपी का घिनौना जुर्म अदालत के सामने साबित हो गया.
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