वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौता अंतिम चरण में है। हालांकि, यह समझौता तब तक लागू नहीं हो सकता, जब तक भारत को प्रतिस्पर्धी देशों पर शुल्क में लाभ न मिले। उन्होंने इंडिया ग्लोबल फोरम के यूके-इंडिया वीक कार्यक्रम में यह बात कही। गोयल ब्रिटेन के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर चर्चा के लिए तीन दिवसीय यात्रा पर हैं।
मंत्री ने इस सप्ताह नई दिल्ली में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर के साथ दो दिवसीय वार्ता की थी। यह वार्ता भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण पर केंद्रित थी। वाणिज्य मंत्रालय के बयान में 24 जुलाई को समाप्त हो रहे 10 फीसदी अस्थायी शुल्क से पहले सभी मतभेदों के सुलझने का कोई संकेत नहीं मिला। गोयल ने स्पष्ट किया कि मुक्त व्यापार समझौते का मूल उद्देश्य बाजार पहुंच में प्रतिस्पर्धी देशों पर तुलनात्मक लाभ प्रदान करना है।
उन्होंने कहा कि जब तक यह प्रतिस्पर्धी लाभ सुनिश्चित करने का ढांचा अंतिम रूप नहीं लेता, अमेरिका के साथ समझौता लागू नहीं हो सकता। अमेरिका को ऐसे कानूनी उपकरण और समर्थन खोजना होगा जो भारत को यह बढ़त दे सकें। समझौते का ढांचा इस साल छह फरवरी को अंतिम रूप दिया गया था। तब से दोनों टीमें बारीकियों को अंतिम रूप देने पर काम कर रही हैं।
क्या है प्रतिस्पर्धी शुल्क लाभ की चुनौती?
समझौते के पहले चरण के ढांचे को अंतिम रूप दिए जाने पर भारत को आसियान देशों, श्रीलंका, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धियों पर लाभ था। तब अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर 18 फीसदी शुल्क की घोषणा की थी। उस समय भारत के प्रतिस्पर्धी देशों पर शुल्क 19 से 20 फीसदी के बीच था। लेकिन अब सभी देशों को समान 10 फीसदी अतिरिक्त शुल्क का सामना करना पड़ रहा है। गोयल ने बताया कि यह समझौता भारत पर 50 फीसदी शुल्क को घटाकर 18 फीसदी करने के लिए किया गया था। इस बदलाव ने भारत के लिए समझौते को आकर्षक बनाया था।
समझौते में देरी क्यों हो रही है?
अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने 3 जून को मुंबई में कहा था कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता 99 फीसदी पूरा हो चुका है। उन्होंने उम्मीद जताई थी कि शेष 1 फीसदी मुद्दों को अगले कुछ हफ्तों में सुलझा लिया जाएगा। गोयल ने बताया कि जब भारत ने अमेरिका के साथ समझौता अंतिम रूप दिया था, तब अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम के तहत शुल्क लागू थे। अब बातचीत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अस्थायी 10 फीसदी शुल्क व्यवस्था की पृष्ठभूमि में हो रही है। यह व्यवस्था एक महीने में यानी 24 जुलाई को समाप्त होने वाली है।
भारत को अब क्या चाहिए?
गोयल ने कहा कि पूरा समझौता उस प्रतिस्पर्धी लाभ पर केंद्रित था जो भारत को 18 फीसदी शुल्क के साथ पड़ोसी और प्रतिस्पर्धी देशों पर मिला था। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप के व्यापक शुल्कों को रद्द करने और 24 जुलाई को अतिरिक्त अस्थायी शुल्क समाप्त होने के बाद, भारत को समझौते को लागू करने का कोई ठोस कारण चाहिए। मंत्री ने कहा कि अब ध्यान इस बात पर है कि भारत को वियतनाम, थाईलैंड, फिलीपींस, मलेशिया, इंडोनेशिया, चीन, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देशों पर प्रतिस्पर्धी शुल्क लाभ मिले। ये देश विकास के समान चरण में हैं या भारत जैसी ही लागत संरचना रखते हैं। भारत चाहता है कि उसके उत्पादों को बाजार में बेहतर पहुंच मिले।



