Homeव्यवसायHormuz Tension: अमेरिका से समझौते के बाद भी ईरान का कड़ा रुख,...

Hormuz Tension: अमेरिका से समझौते के बाद भी ईरान का कड़ा रुख, जानिए क्यों तेल टैंकरों को लेना पड़ रहा यू-टर्न


फारस की खाड़ी में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका और ईरान के बीच जलमार्ग खोलने के समझौते के महज कुछ ही हफ्तों बाद, होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों को अचानक अपना रास्ता बदलने और यू-टर्न लेने पर मजबूर होना पड़ा है। ओमान के तट के पास कम से कम आठ जहाजों की ओर से अचानक रास्ता बदलने की इस घटना ने वैश्विक तेल बाजारों और समुद्री सुरक्षा पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में अचानक क्या हुआ है?

फारस की खाड़ी से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे कम से कम आठ जहाजों को ओमान के तट के पास अचानक अपना रास्ता बदलना पड़ा है। ब्लूमबर्ग ने शिप-ट्रैकिंग डेटा का हवाला देकर बताया है कि शुक्रवार और शनिवार के बीच इन जहाजों ने तेजी से यू-टर्न लिया। रास्ता बदलने वाले इन जहाजों में कच्चे तेल के टैंकर, उत्पाद टैंकर, बल्क कैरियर और वाहन ले जाने वाले जहाज शामिल थे। इनमें से कुछ जहाज तो उस चोकपॉइंट (संकड़े समुद्री मार्ग) तक पहुंच चुके थे जहां मुसेंदम प्रायद्वीप का सिरा खाड़ी की ओर निकला हुआ है, लेकिन वहां से उन्हें अचानक पीछे मुड़ने पर मजबूर होना पड़ा। यह घटना साफ इशारा करती है कि इस महत्वपूर्ण वैश्विक जलमार्ग को पूरी तरह से खोलना अभी भी एक बेहद जटिल चुनौती बना हुआ है।

अमेरिकी समझौते के बावजूद ईरान क्यों दिखा रहा है कड़ा रुख?

हैरानी की बात यह है कि जून के मध्य में ही अमेरिका और ईरान के बीच इस जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए एक समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत अमेरिकी सेना ओमान के तट के पास जहाजों को सुरक्षित रूप से होर्मुज पार कराने में मदद कर रही है। इसके बावजूद, ईरान लगातार इस रणनीतिक जलमार्ग पर अपना पूर्ण नियंत्रण होने का दावा कर रहा है। पिछले कुछ महीनों के दौरान फारस की खाड़ी से बाहर निकलने की कोशिश करने वाले जहाजों ने रेडियो संचार पर ईरानी बलों से चेतावनियां मिलने के बारे में बताया है। ईरानी बलों की ओर से जहाजों को रेडियो पर स्पष्ट रूप से कहा गया कि उन्हें खाड़ी पार करने के लिए तेहरान (ईरान) से अनुमति लेनी होगी। इतना ही नहीं, जिन जहाजों ने बिना अनुमति के आगे बढ़ने की कोशिश की, उन पर हमले भी किए गए, जिससे जहाजों के सुरक्षित आवागमन को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। ईरान का कहना है कि सभी जहाजों को केवल उसी मार्ग से गुजरना चाहिए जो उसके की ओर से अधिकृत या घोषित किया गया है।

यू-टर्न लेने वाले जहाजों ने कौन सा नया रास्ता चुना?

डेटा से पता चलता है कि जब ओमान के रास्ते सुरक्षित मार्ग पर संकट बढ़ा, तो जहाजों को ईरान की ओर से तय किए गए नियमों के आगे झुकना पड़ा। यू-टर्न लेने वाले जहाजों में से एक कच्चे तेल के टैंकर, दो उत्पाद टैंकरों और एक बल्क कैरियर ने उत्तर की ओर रुख किया। इन जहाजों ने अंततः खाड़ी से बाहर निकलने के लिए ईरान के करीब वाले समुद्री मार्ग का इस्तेमाल किया, जैसा कि ईरानी बलों की ओर से निर्देशित किया गया था। इससे साफ होता है कि सुरक्षा खतरों से बचने के लिए अब जहाजों को मजबूरन उस रास्ते पर जाना पड़ रहा है जहां ईरान का सीधा नियंत्रण और प्रभाव है।

जहाजों की आवाजाही के आंकड़े क्या कहानी बयां कर रहे हैं?

युद्ध के सबसे खराब दौर की तुलना में वर्तमान में जहाजों की आवाजाही में थोड़ा सुधार जरूर देखा गया है, लेकिन यह अभी भी सामान्य दिनों के स्तर से बहुत दूर है। आंकड़ों के अनुसार:


  • इस सप्ताह सोमवार से औसतन लगभग 34 कमोडिटी जहाजों ने रोजाना इस जलडमरूमध्य को पार किया है। यह युद्ध के दौरान के औसत से अधिक है, लेकिन युद्ध-पूर्व के सामान्य स्तर से काफी कम है।

  • इसके विपरीत, 30 जून और 1 जुलाई के बीच ओमान की सीमा से होकर 65 जहाज गुजरे थे। इनमें से 59 जहाजों को अमेरिकी सुरक्षा सहायता और समर्थन प्राप्त था।

  • यह आंकड़े दर्शाते हैं कि अमेरिकी सुरक्षा और उनकी मदद के बावजूद ईरान के दबाव के कारण समुद्री व्यापारिक कंपनियां अभी भी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हो पा रही हैं।

वैश्विक तेल बाजार और शिपिंग उद्योग पर इसके क्या प्रभाव होंगे?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल चोकपॉइंट है, जहां से वैश्विक तेल का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस मार्ग पर अनिश्चितता का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजारों पर पड़ता है।


  • बढ़ी हुई लागत और बीमा प्रीमियम: जहाजों के यू-टर्न लेने और लंबे या जोखिम भरे मार्गों को चुनने से परिचालन लागत बढ़ जाती है। साथ ही, युद्ध क्षेत्र घोषित होने के कारण जहाजों के बीमा प्रीमियम में भी भारी उछाल आ सकता है।

  • शिपिंग कंपनियों का जोखिम सहने का स्तर: रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि तेल टैंकर कंपनियों और उनके चालक दल का जोखिम सहने का स्तर कितना है। जब तक कंपनियां इस रूट पर सुरक्षित महसूस नहीं करेंगी, तब तक वैश्विक तेल आपूर्ति और कच्चे तेल की कीमतें पूरी तरह से सामान्य नहीं हो पाएंगी।

आगे की राह क्या है?

अमेरिका की ओर से समर्थित सुरक्षित ओमान मार्ग और ईरान के अपने संप्रभु मार्ग के दावों के बीच फंसी शिपिंग कंपनियां इस समय असमंजस में हैं। हालांकि राजनयिक स्तर पर समझौते किए गए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ईरान होर्मुज पर अपनी पकड़ ढीली नहीं करना चाहता। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या अमेरिका इस सुरक्षा घेरे को और मजबूत करता है या फिर शिपिंग लाइनों को सुरक्षा के लिए पूरी तरह से ईरानी शर्तों को मानने पर विवश होना पड़ेगा। वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा का भविष्य इसी टकराव के समाधान पर टिका हुआ है।



Source link

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments