भारत के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के ऋणदाता, एचडीएफसी बैंक में पिछले दिनों हुई प्रशासनिक उथल-पुथल को लेकर बैंक के शीर्ष नेतृत्व ने आखिरकार अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। बैंक के प्रबंध निदेशक (एमडी) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) शशिधर जगदीशन ने शनिवार को जारी वार्षिक रिपोर्ट में स्वीकार किया कि पार्ट-टाइम चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती का अचानक इस्तीफा एक बेहद चुनौतीपूर्ण घटनाक्रम था, जिसने बैंक के कॉर्पोरेट गवर्नेंस (प्रशासनिक मानकों) पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। देश के बैंकिंग इतिहास में यह पहली बार था जब एचडीएफसी बैंक के किसी पार्ट-टाइम चेयरमैन ने अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही पद छोड़ दिया। हालांकि, बैंक के बोर्ड ने तुरंत सक्रियता दिखाते हुए बाहरी कानून फर्मों से इसकी गहन जांच कराई है।
अतानु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे से बैंक के सामने क्या चुनौतियां खड़ी हुईं?
अतानु चक्रवर्ती ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंत में, 18 मार्च 2026 को अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया था। उनका कार्यकाल समाप्त होने में एक वर्ष से अधिक का समय शेष था, लेकिन उन्होंने अपने त्यागपत्र में ‘नैतिक चिंताओं’ का हवाला दिया था। जगदीशन के अनुसार, इस अचानक हुए इस्तीफे और चक्रवर्ती के पत्र में की गई टिप्पणियों के कारण बाजार और शेयरधारकों के बीच बैंक के प्रशासनिक ढांचे को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे थे, जो बैंक के लिए एक बेहद संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण समय था।
गवर्नेंस के सवालों पर बैंक बोर्ड ने क्या एक्शन लिया और जांच में क्या निकला?
गवर्नेंस के प्रति शेयरधारकों के भरोसे को बहाल करने के लिए एचडीएफसी बैंक के बोर्ड ने बेहद सक्रिय रुख अपनाया। चूंकि बैंक के अमेरिकन डिपॉजिटरी रिसीट्स (एडीआर) न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज पर भी सूचीबद्ध हैं, इसलिए बोर्ड ने मामले की निष्पक्षता और गंभीरता को देखते हुए घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों स्तरों की प्रतिष्ठित बाहरी कानूनी फर्मों को नियुक्त किया। इन कानूनी फर्मों को चक्रवर्ती के इस्तीफे के पत्र में दिए गए बयानों की विस्तृत समीक्षा करने का जिम्मा सौंपा गया था।
इसके बाद, 26 जून 2026 को बैंक ने इन बाहरी कानून फर्मों की जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों को साझा किया। जगदीशन ने बताया कि जांच में पाया गया कि चक्रवर्ती के इस्तीफे के पत्र में लगाए गए आरोप और उनके निहितार्थ बैंक के दस्तावेजों की समीक्षा और गवाहों के बयानों से साबित नहीं हो सके। यानी बाहरी जांच में इन गंभीर आरोपों की पुष्टि नहीं हुई।
नए नेतृत्व के रूप में राजीव कुमार की क्या भूमिका होगी और बैंक की क्या तैयारी है?
इस संकट के बाद बैंक ने नए पार्ट-टाइम चेयरमैन के रूप में राजीव कुमार का स्वागत किया है। राजीव कुमार के पास देश की वित्तीय और बैंकिंग प्रणाली का व्यापक अनुभव है। वह वित्तीय सेवा सचिव और बाद में वित्त सचिव के रूप में एक परिवर्तनकारी भूमिका निभा चुके हैं।
विशेष रूप से वर्ष 2017 से 2020 के दौरान, जब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक एनपीए संकट, पूंजी की कमी, कर्ज की रुकावट, ऋणों के दोहराव और पोंजी योजनाओं जैसी गंभीर विनियामक चुनौतियों से जूझ रहे थे, तब उन्होंने बैंकिंग प्रणाली में विकास और वित्तीय समावेशन को आगे बढ़ाया था।
एमडी जगदीशन ने भरोसा दिलाया है कि बैंक कॉर्पोरेट गवर्नेंस के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसके लिए बैंक ने अपने आंतरिक सुरक्षात्मक ढांचे को मजबूत करना और प्रमुख नियंत्रण प्रक्रियाओं को अपडेट करना जारी रखा है। साथ ही, बैंक की सहायक कंपनियों को एक मजबूत प्रशासनिक आधार और जोखिम प्रबंधन के साथ संचालित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
इस प्रशासनिक उठापटक के बीच बैंक का वित्तीय प्रदर्शन और भावी नजरिया कैसा रहा?
गवर्नेंस की चुनौतियों के बावजूद, एचडीएफसी बैंक का व्यावसायिक प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है। जगदीशन ने वार्षिक रिपोर्ट में बताया कि बैंक ने अपनी पारंपरिक रूप से मजबूत संपत्ति गुणवत्ता को बनाए रखते हुए एडवांस, जमा और लाभप्रदता में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की है।
भविष्य के दृष्टिकोण के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि बैंक अपने जोखिम प्रबंधन ढांचे को और सुदृढ़ करेगा। इसके अलावा, ग्राहकों के अनुभव को और बेहतर बनाने के लिए प्रौद्योगिकी, विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का बड़े पैमाने पर लाभ उठाया जाएगा। उनका मानना है कि बैंक की वास्तविक परीक्षा केवल अनुकूल परिस्थितियों में नहीं, बल्कि हर दौर में ग्राहकों और शेयरधारकों की निरंतर सेवा करने की क्षमता से होती है।



