खाद्य प्रसंस्करण सचिव अविनाश जोशी ने 2031 तक देश के खाद्य प्रसंस्करण स्तर को 25 फीसदी तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह लक्ष्य 2023 के 17 फीसदी के स्तर से काफी अधिक है। खाद्य प्रसंस्करण स्तर वह पैमाना है जो बताता है कि किसी कच्चे कृषि उत्पाद (जैसे फल, सब्जी, अनाज) को फैक्ट्री या रसोई में किस हद तक बदला, पकाया या संरक्षित किया गया है। सरकार इस क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए नई नीतिगत पहल पर विचार कर रही है। इन उपायों से खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को गति मिलने की उम्मीद है।
गुरुवार को एफआईसीसीआई की ओर से आयोजित एक सम्मेलन में जोशी ने यह जानकारी दी। उन्होंने क्रिसिल की एक रिपोर्ट का हवाला दिया। रिपोर्ट के अनुसार, 2010-11 में प्रसंस्करण स्तर 10 फीसदी था, जो 2023 में बढ़कर 17 फीसदी हो गया है। सचिव ने उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना की सफलता पर भी प्रकाश डाला। यह योजना क्षमताएं बढ़ाने और रोजगार सृजन में सहायक रही है। पीएलआई योजना 2021-22 से 2026-27 तक छह वर्षों के लिए लागू है। इसका कुल वित्तीय परिव्यय 10,900 करोड़ रुपये है। जोशी ने कहा कि प्रसंस्करण स्तर एक महत्वपूर्ण संकेतक है। उन्होंने उद्योग से इस लक्ष्य को एक चुनौती के रूप में लेने का आग्रह किया।
क्या है सरकार का नया लक्ष्य?
सरकार ने आंतरिक रूप से 2031 तक खाद्य प्रसंस्करण स्तर को कम से कम 25 फीसदी तक ले जाने का लक्ष्य तय किया है। जोशी ने बताया कि प्रसंस्करण स्तर में वृद्धि से मूल्य संवर्धन में मदद मिलेगी। इससे निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा और प्राथमिक, द्वितीयक तथा तृतीयक क्षेत्र के बाजार के लिए कई सकारात्मक प्रभाव पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि भारत में कृषि उत्पादन अधिशेष है। चुनौती यह है कि मात्रा से मूल्य की ओर तेजी से बढ़ा जाए। इसके बाद सभी के लिए पोषण हासिल किया जाए।
निवेश बढ़ाने के लिए क्या योजना है?
जोशी ने हाल ही में प्रधानमंत्री से हुई बातचीत का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 25 फीसदी प्रसंस्करण स्तर तक पहुंचने के लिए एक राष्ट्रीय प्रसंस्करण मिशन या पीएलआई 2.0 जैसी योजना की आवश्यकता है। इस क्षेत्र को बहुत कम समय में बढ़ा हुआ निवेश चाहिए। उन्होंने मंत्रालय के प्रस्ताव पर सकारात्मक प्रतिक्रिया की उम्मीद जताई। भारत के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में 90 फीसदी से अधिक इकाइयां एमएसएमई खंड में हैं। जोशी ने उद्योगों से अक्षमताओं को दूर करने और भारत को घरेलू व वैश्विक बाजार के लिए प्रतिस्पर्धी बनाने को कहा।
‘भारत ब्रांड’ से क्या लाभ होगा?
सरकार ने प्रसंस्कृत खाद्य के लिए ‘भारत ब्रांड’ बनाने पर काम शुरू कर दिया है। इस ‘भारत ब्रांड’ मंच के माध्यम से भारतीय व्यंजनों और भारतीय मादक पेय पदार्थों को दृश्यता देने की योजना है। मंत्रालय उद्योग की मदद से कई हस्तक्षेप करने की योजना बना रहा है। इससे भारतीय खाद्य और भारतीय व्यंजनों के लिए सकारात्मक प्रभाव पैदा होंगे। इन्हें वैश्विक स्तर पर ले जाया जा सकेगा। सचिव ने जोर दिया कि केंद्र इस क्षेत्र को विकसित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। खाद्य सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है और सुरक्षा नियमों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।



