इंडोनेशिया के बाद आर्मेनिया और सऊदी अरब ने भी भारत की दुश्मन की नजर से बचने में सक्षम स्वदेशी अस्त्र मिसाइल में दिलचस्पी दिखाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया इंडोनेशिया यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के साथ-साथ हवा से हवा में वार करने वाली स्वदेशी अस्त्र मिसाइल पर भी सहमति बनी थी।
सीडीएस जनरल अनिल चौहान की यात्रा के दौरान क्या हुआ?
सूत्रों के मुताबिक इंडोनेशिया के बाद अब आर्मेनिया और सऊदी अरब भी भारत के साथ अस्त्र पर बातचीत कर रहे हैं। आने वाले दिनों में कुछ और देश भी इसमें दिलचस्पी दिखा सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक इस साल फरवरी में तत्कालीन सीडीएस जनरल अनिल चौहान की आर्मेनिया यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच इस पर चर्चा हुई थी। अब आर्मेनिया अस्त्र मिसाइल खरीदने की रेस में सबसे आगे चल रहा है। आर्मेनियाई वायुसेना के बेड़े में सुखोई-30 विमान भी हैं।
किन क्षेत्रों में सहयोग करेंगे दोनों देश?
भारत अपने सुखोई-30 के साथ अस्त्र मिसाइल का एकीकरण कर चुका है, इसलिए आर्मेनिया के लिए यह तकनीकी रूप से सबसे मुफीद सौदा साबित हो सकता है। आर्मेनिया अपने सुखोई-30 बेड़े के आधुनिकीकरण के लिए भारत के अनुभव का लाभ उठाने का इच्छुक है। दोनों देश निगरानी प्रणालियों, अंतरिक्ष, साइबर सुरक्षा, सामरिक संचार और प्रशिक्षण में सहयोग की संभावनाएं भी तलाश रहे हैं।
जैमिंग-रोधी तकनीक ने खींचा सऊदी अरब का ध्यान
सऊदी अरब की वायुसेना में अमेरिकी और ब्रिटिश लड़ाकू विमान हैं, लेकिन अस्त्र मिसाइल की किफायती लागत और बेहतरीन जैमिंग-रोधी तकनीक ने रियाद का ध्यान खींचा है। सऊदी अरब अपने रक्षा आयात में विविधता लाना चाहता है। यदि अस्त्र का एकीकरण सऊदी अरब के एफ-15 और यूरोफाइटर टाइफून जैसे लड़ाकू विमानों पर होता है, तो यह भारतीय रक्षा उद्योग के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी। पश्चिमी प्लेटफॉर्मों पर भारतीय मिसाइलों के एकीकरण का रास्ता खोल सकती है।



