क्या देश के बड़े सरकारी बैंकों में से एक, बैंक ऑफ बड़ौदाके ग्राहकों का संवेदनशील डेटा सच में डार्कनेट पर बिक रहा है? हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर उड़े एक दावे ने देश के बैंकिंग सेक्टर और करोड़ों बैंक ग्राहकों के बीच सनसनी फैला दी है। दावा किया गया है कि बैंक का करीब 1 टेराबाइट निजी और संवेदनशील डेटा, जिसमें ग्राहकों की आधार डिटेल्स भी शामिल हैं, इंटरनेट के डार्कनेट प्लेटफॉर्म पर लीक हो गया है।
लेकिन क्या वाकई आपका पैसा और बैंक खाता खतरे में है? इस कथित डेटा लीक के पीछे की असली वजह क्या है और बैंक ने ग्राहकों के हितों की रक्षा और अपने वित्तीय जोखिम को कम करने के लिए क्या बड़े कदम उठाए हैं? आइए, आसान बोलचाल की भाषा में इस पूरे विषय को सिलसिलेवार ढंग से समझते हैं।
क्या वाकई बैंक ऑफ बड़ौदा का 1TB डेटा लीक हो गया है?
इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कुछ पोस्ट वायरल होने लगीं, जिनमें दावा किया गया कि बैंक ऑफ बड़ौदा एक संभावित डेटा लीक का शिकार हुआ है। इन पोस्ट्स में आरोप लगाया गया कि बैंक का करीब 1 टेराबाइट संवेदनशील डेटा अनधिकृत रूप से हासिल कर लिया गया है, जिसमें ग्राहकों के आधार कार्ड की जानकारियां भी शामिल हैं। इसके तुरंत बाद, इंटरनेट सुरक्षा पर नजर रखने वाली वेबसाइटों ने भी रिपोर्ट किया कि इस कथित सुरक्षा चूक से जुड़ा एक डेटासेट ऑनलाइन उपलब्ध हो गया है। इस खबर ने डिजिटल बैंकिंग सुरक्षा को लेकर ग्राहकों और विशेषज्ञों के बीच कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए।