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RBI: ‘भारतीय बैंकिंग प्रणाली उभरती चुनौतियों का सामना करने के लिए अच्छी स्थिति में’, बोले आरबीआई गवर्नर


भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवनर्र संजय मल्होत्रा ने मुंबई में एक कार्यक्रम में भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर बोलते हुए कहा कि भारत को एआई के क्षेत्र में अपनी प्रगति को निर्देशित करना होगा। इसके साथ ही उन्होंने वैश्विक जोखिम पर बोलते हुए कहा ,भारतीय बैंकिंग प्रणाली उभरती चुनौतियों का सामना करने के लिए अच्छी स्थितिम में है, क्योंकि यह क्षेत्र पूंजी, लाभ और परिसंपत्ति गुणवत्ता के मामले मजबूत है। उन्होंने कहा, हालांकि वैश्विक स्तर पर गैर सरकारी वित्तीय संस्थानों (एनबीएफसी) और अनियमित क्षेत्र के बीच बढ़ती परस्पर संबद्धता चिंता का विषय बनी हुई है। लेकिन भारत में इसको लेकर चिंता नहीं है।

भारत की बैंकिंग प्रणाली मजबूत है

उन्होंने कहा वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं में पश्चिम एशिया के तनाव ही अकेली चुनौती नहीं है, टैरिफ और साइबर धोखाधड़ी भी एक बड़ा जोखिम और चिंता का कारण है। लेकिन इसके बावजूद भारतीय बैंकिंग प्रणाली और वित्तीय स्थिरता काफी मजबूत है। उन्होंने कहा, भारतीय बैंकिंग प्रणाली चुनौतियों का सामना करने के लिए अच्छी स्थिति में है, क्योंकि बैंकिंग क्षेत्र मजबूत पूंजी, लाभप्रदता और परिसंपत्ति गुणवत्ता के मामले में मजबूत है। उन्होंने कहा, जब भी वैश्विक चुनौतियां हमारे सामने आई हैं, हम उनमें और मजबूत होकर निकले हैं। क्योंकि हमने अपने सप्लाई चेन में विविधा लाई है, ऊर्जा के अन्य विकल्पों जैसे एथेनॉल और ईवी को अपनाया है। वहीं सरकार द्वारा कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) किए गए हैं, जो अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे।

सीमा पार भुगतानऔर लोकल करेंसी पर चर्चा चल रही है

गवर्नर ने बिक्स देशों के साथ  सीमा पार भुगतान और लोकल करेंसी पर बोलते हुए कहा, बिक्स देशों के केंद्रीय बैंकों की एक टास्क फोर्स का निर्माण किया गया है, जिसमें पब्लिक डिजिटल इंफ्रास्टक्चर, रिटेल ट्रांजेक्शन, सीमा पार भुगतान, रेमिटेंनस और सीबीडीसी जैसे विषयों पर विचार विमर्श चल रहा है। लोकल करेंसी को लेकर केंद्रीय बैंक के साथ एमओयू हुए हैं, लेकिन अभी यह शुरुआती चरण में हैं।

एसबीआई के चेयरमैन ने कहा- विकसित अर्थव्यवस्था बनने के लिए एआई महत्वपूर्ण

इस अवसर प र स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के चेयरमैन चाल्ला श्रीनिवासुलु सेट्टी ने कहा, एआई आधारित बैंकिंग के अगले चरण को तकनीकि क्षमताओं को आर्थिक अवसरों में बदलने पर ध्यान केंद्रित करना होगा, क्योंकि भारत 2047 तक एक विकसित अर्थव्यवस्था बनने की अपनी महत्वकांक्षा का दिशा पर काम कर रहा है। हम उसको समर्थन देने की जरूरत है,  एआई के नेतृत्व में आने वाली लहर बैंकिंग को अर्थव्यस्था के साथ गहराई से जोड़ेगी साथ ही ग्रामीण भारत, छोटे कारोबारियों और उनक ग्राहकों तक ले जाएगी जो बैंकिंग व्यवस्था से अछूते हैं। उन्होंने कहा कि कृषि में एआई  उपयोग एक महत्वपूर्ण अवसर है, क्योंकि कृषि ऋण में निर्णय लेने में सहायक है, डेटा आधारित जोखिमों का मूल्यांकन होता है, डिजिटल रिकॉर्ड रखने के साथ ही बैंकों को ऋण पहुंच बनाने और पोर्टफोलियों में सुधार करने में इसकी बड़ी भूमिका है।



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