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अर्थव्यवस्था: वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत, जानें आरबीआई बुलेटिन में क्या


भारतीय अर्थव्यवस्था ने वैश्विक चुनौतियों के बावजूद उल्लेखनीय मजबूती दिखाई है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नवीनतम बुलेटिन में मंगलवार को यह जानकारी दी गई। मजबूत घरेलू मांग और औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि को इस मजबूती का मुख्य कारण बताया गया है। मानसून की अच्छी स्थिति ने कृषि क्षेत्र के जोखिमों को कम करने में मदद की है।

भारतीय रिजर्व बैंक की बुलेटिन में भारतीय अर्थव्यवस्था की एक आशावादी तस्वीर पेश की गई है। इसमें बताया गया है कि भारत पर अमेरिका के अतिरिक्त 10 फीसदी शुल्क का असर पड़ोसी चीन और कुछ अन्य एशियाई अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में कम होने की संभावना है। वैश्विक अर्थव्यवस्था भू-राजनीतिक माहौल और व्यापार संबंधी अनिश्चितताओं का सामना कर रही है। इसके बावजूद, घरेलू अर्थव्यवस्था ने इन चुनौतियों के प्रति लचीलापन दिखाया है।

क्या वैश्विक चुनौतियों का भारत पर असर कम हुआ?

वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अस्थिरता और व्यापार संबंधी अनिश्चितताएं बनी हुई हैं। हालांकि, आरबीआई बुलेटिन के अनुसार भारत पर इनका प्रभाव सीमित रहा है। अमेरिका द्वारा लगाए गए धारा 301 शुल्क के तहत भारत पर अतिरिक्त 10 फीसदी शुल्क लगाया गया था। लेकिन भारत की प्रमुख निर्यात वस्तुएं जैसे स्मार्टफोन, पेट्रोलियम उत्पाद और फार्मास्यूटिकल्स इसके दायरे से बाहर हैं। इस कारण अमेरिका के बाजार में भारत पर चीन, वियतनाम और थाईलैंड जैसी कुछ एशियाई अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में कम असर पड़ने की उम्मीद है।

घरेलू अर्थव्यवस्था को किसने दी मजबूती?

घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत घरेलू मांग और विनिर्माण व सेवा क्षेत्र की बढ़ती गतिविधियों से सहारा मिला है। जून में कमी दर्ज करने के बाद जुलाई में दक्षिण-पश्चिम मानसून ने गति पकड़ी। इससे खरीफ की बोआई सामान्य रकबे के करीब पहुंच गई। जुलाई में वर्षा बढ़ने से अखिल भारतीय जलाशय भंडारण अपने दशकीय औसत के करीब और पिछले स्तर से अधिक रहा। मुख्य उपभोक्ता मूल्य सूचकांक मुद्रास्फीति खाद्य मुद्रास्फीति के कारण थोड़ी बढ़ी, लेकिन मुख्य मुद्रास्फीति स्थिर बनी रही। तरलता की स्थिति में सुधार हुआ, जिससे ऋण वृद्धि और निवेश गतिविधि को समर्थन मिला। विदेशी पूंजी प्रवाह में भी उछाल आया, जिसने बाहरी क्षेत्र को मजबूत किया।

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की क्या स्थिति रही?

जून 2026 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रवाह में पिछले महीने की तुलना में सुधार देखा गया। यह उच्च सकल प्रवाह के कारण हुआ। कुल इक्विटी प्रवाह का लगभग 74 फीसदी सिंगापुर, नीदरलैंड, अमेरिका और कनाडा से आया। विनिर्माण क्षेत्र को इक्विटी प्रवाह का सबसे बड़ा हिस्सा मिला। इसके बाद बिजली उत्पादन, कंप्यूटर और संचार सेवाओं का स्थान रहा। बाहर जाने वाले एफडीआई में पिछले दो महीनों से गिरावट का रुख जारी रहा। बाहर जाने वाले एफडीआई प्रवाह का लगभग 65 फीसदी सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका की ओर निर्देशित था। वित्तीय, बीमा और व्यावसायिक सेवाएं, विनिर्माण, थोक/खुदरा व्यापार, रेस्तरां और होटल प्रमुख क्षेत्र थे, जिनमें बाहर जाने वाले एफडीआई का 74 फीसदी हिस्सा था।



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