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जापान में पीयूष गोयल का सख्त अंदाज: चीन पर तंज से लेकर जापानी उद्योग को आईना; निवेश का न्योता, साझेदारी पर दम


केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल जापान से निवेश मांगने पहुंचे हैं, लेकिन टोक्यो में उनका तेवर मांगने वाले का नहीं था। सोमवार को अलग-अलग बैठकों में उन्होंने जापानी उद्योग जगत को भारत में निवेश का न्योता दिया और साथ ही उसकी शिकायतों पर पलटकर सवाल भी खड़े कर दिए और वहीं समाधान भी देकर नए भारत का नमूना भी दिखा दिया। एक बैठक में उन्होंने साफ कहा कि उद्योग के कुछ हिस्सों की मांगें पूरी करना बहुत मुश्किल होता है और इसके लिए वह माफी नहीं मांगते। गोयल की दो टूक- कहा कि वह खुलकर और साफ बोलते हैं। पीयूष गोयल का संदेश स्पष्ट था कि भारत निवेश के लिए दरवाजे खोल रहा है, लेकिन अपनी शर्तों और हितों की कीमत पर नहीं।

‘गायब होकर जापान में प्रोफेसर नहीं बनेंगे’

चीन का नाम लिए बगैर गोयल ने जापान की कमजोर नस को बहुत ही हल्के-फुल्के, लेकिन प्रभावी अंदाज में उठा दिया।भारत को डाटा सेंटर के लिए सबसे भरोसेमंद ठिकाना बताते हुए उन्होंने चीन पर तगड़ा तंज मारा। उन्होंने कहा कि भारत में आपके आंकड़े कभी चोरी नहीं होंगे और बौद्धिक संपदा से समझौता नहीं होगा। भारत में बौद्धिक संपदा का सम्मान है और उद्यमशीलता का उत्सव मनाया जाता है। इसके बाद बिना किसी देश या व्यक्ति का नाम लिए उन्होंने वह बात कही, जिसका इशारा कमरे में मौजूद हर शख्स ने समझा। गोयल ने कहा कि आपको यह चिंता नहीं करनी पड़ेगी कि भारत में पैसा कमा लिया या सफल कारोबारी बन गए तो एक दिन गायब हो जाएंगे और किसी जापानी विश्वविद्यालय में प्रोफेसर बनकर सामने आएंगे। भारत में वह जोखिम नहीं है।

इससे पहले भी वह इसी दिशा में इशारा कर चुके थे। जापानी कंपनियों की उस पुरानी रणनीति पर सवाल आया, जिसमें पहले चीन और फिर दक्षिण-पूर्व एशिया में विस्तार किया गया, तो गोयल ने भारत को किसी का विकल्प कहलाने से ही इनकार कर दिया। बोले, भारत कोई प्लस वन देश नहीं है, भारत अपनी खूबियों और अपने दम पर खड़ा भरोसेमंद साझेदार है। साथ जोड़ा, हम किसी की तकनीक नहीं चुराते और न ही बौद्धिक संपदा की नकल कर उत्पाद बाजार में लाते हैं।

दिक्कत सुनी और उसी बैठक में फोन घुमा दिया

तेवर सिर्फ सख्ती का नहीं था। कारोबार सुगमता पर सवाल आया तो गोयल ने उसी दिन की दो घटनाओं का उदाहरण रख दिया। उन्होंने बताया कि सुबह उनकी दो बड़ी कंपनियों के साथ बैठक हुई थी। इनमें एक भारत में सेमीकंडक्टर उपकरण बनाना चाहती है और दूसरी वाहन कलपुर्जों के क्षेत्र में काम करती है। दोनों की अपनी-अपनी अड़चनें थीं। गोयल के मुताबिक दोनों मामलों को बैठक के बीच में ही दो फोन कॉल से सुलझा दिया गया और आगे का ढांचा भी वहीं घोषित कर दिया गया। बोले, मैंने उन्हें भरोसा दिया है कि अगले दो महीने में भारत अपने नियमों में संशोधन करेगा, नए नियम लाएगा और यह सुनिश्चित करेगा कि भारत में उत्पादन लाते समय उन्हें कोई परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि यह सरकार चलते-चलते फैसले लेती है, जहां भी बात जायज और उचित हो। लेकिन जहां मांग सिर्फ इतनी हो कि दूसरे देश से बेहद कम या अनुचित कीमत पर आया माल भारत में आने दिया जाए, वहां सरकार माफी नहीं मांगेगी।

यह भी पढ़ें- पीयूष गोयल बोले: भारत को चाहिए सुजुकी की तरह मुनाफा देने वाली 1,580 कंपनियां, जापान हमसे खरीदे स्टील

इस्पात पर जापानी उद्योग को ही घेरा

जापान के उद्योग जगत और फिक्की के प्रतिनिधियों के साथ बैठक भी काफी अलग रही। सिर्फ मीठी-मीठी बातें नहीं बल्कि खरे अंदाज़ में गोयल ने मज़बूती से बात रखी। जापानी इस्पात उद्योग ने भारत के सुरक्षा शुल्क में रियायत की मांग रखी। गोयल ने पहले दुनिया के दूसरे बाजारों का आंकड़ा सामने रखा। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने 50 प्रतिशत, यूरोपीय संघ ने 50 प्रतिशत और ब्रिटेन ने भी 50 प्रतिशत सुरक्षा शुल्क लगाया है, जबकि भारत ने सिर्फ 12 प्रतिशत लगाया। उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने हर श्रेणी के इस्पात पर शुल्क नहीं लगाया, ऊंची श्रेणी का इस्पात अब भी पूरी तरह खुला है। इसके बाद गोयल ने ही जापानी उद्योग जगत को ही आईना दिखाया। उन्होंने कहा कि वाणिज्य मंत्री के तौर पर वह सात साल से जापानी उद्योग से अपील कर रहे हैं कि कम से कम वे इस्पात तो भारत से खरीदें जो ज्यादा फायदे का सौदा है, लेकिन जापानी कंपनियां नहीं खरीदतीं, भले भारतीय इस्पात सस्ता हो और गुणवत्ता एक जैसी हो। फिर सवाल दागा, जब आप खरीदते ही नहीं तो आप उम्मीद कैसे करते हैं कि हम आपको बचाएं।

एक जापानी प्रतिनिधि ने संक्रमण काल की दलील दी। उन्होंने बताया कि भारतीय साझेदार के साथ संयुक्त उपक्रम में ऊंची श्रेणी के वाहन इस्पात के लिए कुछ कच्चा माल जापान से मंगाना पड़ा, क्योंकि उसके लिए जरूरी मशीनें भारत में उपलब्ध नहीं थीं। गोयल ने दलील नहीं मानी। उन्होंने कहा कि सुरक्षा शुल्क और डंपिंग रोधी शुल्क विश्व व्यापार संगठन के नियमों के तहत पूरी तरह न्यायिक प्रक्रिया है, जिसमें मंत्री या मंत्रालय का सीधा दखल नहीं होता। बोले, फाइल तक मेरे पास से होकर नहीं जाती। उन्होंने जापानी उद्योग को स्वतंत्र प्राधिकरण के समक्ष जाने की सलाह दी और कहा कि मामले में दम हुआ तो वह अपनी स्वतंत्र राय बनाएगा।

मेज पर भारत की पेशकश

सेमीकंडक्टर

पीयूष गोयल के मुताबिक सेमीकॉन 2.0 को मंजूरी मिल चुकी है, जिसका परिव्यय 1.27 लाख करोड़ रुपये है। पहले चरण में 76 हजार करोड़ रुपये के तहत 12 परियोजनाओं को मंजूरी मिली और 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश जुटा। तीन इकाइयों में उत्पादन शुरू हो चुका है। उन्होंने अगले डेढ़ साल में इस क्षेत्र में करीब 50 अरब डॉलर जुटाने की बात कही और कहा कि उसके बाद सेमीकॉन 3.0 आएगा। उनका अनुमान है कि अगले पांच साल में भारत की सालाना सेमीकंडक्टर मांग 150 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है।

ऊर्जा

केंद्रीय मंत्री के मुताबिक 2014 में भारत की सौर क्षमता करीब दो गीगावाट थी, जो अब 160 गीगावाट से ऊपर है और तीन साल में 250 गीगावाट तक ले जाने का लक्ष्य है। देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता 552 गीगावाट है, जिसमें गैर-जीवाश्म स्रोतों की हिस्सेदारी 54 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। 2047 तक परमाणु क्षमता में 100 गीगावाट जोड़ने की योजना है।

डाटा सेंटर

मंत्री का दावा है कि भारत सात से आठ अमेरिकी सेंट प्रति यूनिट की दर पर चौबीसों घंटे स्वच्छ बिजली दे सकता है। वैश्विक सेवाओं के लिए डाटा सेंटर लगाने वाली कंपनियों को 2047 तक कर छूट दी गई है।

कारोबार माहौल

पीयूष गोयल के मुताबिक एक दशक में करीब 1500 कानून हटाए गए, 40 हजार से अधिक अनुपालन घटाए या खत्म किए गए और 29 श्रम कानूनों को चार संहिताओं में समेटा गया। पिछले वित्त वर्ष में देश की वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत रही।



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